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रामकथा सुनने उमड़ी भीड़
अमर उजाला, पंचकूला
Updated Thu, 28 Nov 2013 06:07 PM IST
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से सेक्टर-पांच के मेला ग्राउंड में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण नवाह ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन आशुतोष जी महाराज की शिष्या साध्वी वैष्णवी भारती जी ने जड़भरत प्रसंग सुनाया।
उन्होंने कहा कि जड़भरत जी को उनके परिवार के सदस्यों ने निकम्मा जानकर खेतों में फ सल की रखवाली के लिए भेज दिया। वहां से उन्हें काली माता के सामने बलि के रूप में चढ़ाने के लिए भील जाति के सैनिक ले गए।
काली मां ने मूर्ति में से प्रकट होकर जड़भरत की रक्षा की, लेकिन वर्तमान में भी हमारे देश में बलि का विधान है। पूछने पर लोग कहते हैं शास्त्रों में ऐसा लिखित है।
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शास्त्रों की भाषा संस्कृत है और उस भाषा की जानकारी न होने के कारण हम अपने अनुसार ही शास्त्रों में लिखे अर्थ का अनर्थ कर देते हैं। अपनी जीभ के स्वाद को पूरा करने के लिए परमात्मा के बनाए जीवों को काटते हैं।
साध्वी ने प्रह्लाद प्रसंग के माध्यम से भक्त और भगवान के संबंध का मार्मिक चित्रण किया।
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उन्होंने कहा कि जड़भरत जी को उनके परिवार के सदस्यों ने निकम्मा जानकर खेतों में फ सल की रखवाली के लिए भेज दिया। वहां से उन्हें काली माता के सामने बलि के रूप में चढ़ाने के लिए भील जाति के सैनिक ले गए।
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काली मां ने मूर्ति में से प्रकट होकर जड़भरत की रक्षा की, लेकिन वर्तमान में भी हमारे देश में बलि का विधान है। पूछने पर लोग कहते हैं शास्त्रों में ऐसा लिखित है।
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साध्वी ने प्रह्लाद प्रसंग के माध्यम से भक्त और भगवान के संबंध का मार्मिक चित्रण किया।