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क्यों, रेप केस में दोषी राम रहीम के खिलाफ बोल नहीं रहे नेता, ये हैं कारण?
ओमप्रकाश तिवारी/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
Updated Fri, 01 Sep 2017 12:16 AM IST
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राम रहीम
- फोटो : social media
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साध्वी रेप केस में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को 20 साल की सजा हुई, लेकिन उसके खिलाफ बोलने से नेता लोग बच रहे हैं। किसी भी सियासी दल का कोई भी नेता डेरा मुखी के कृत्यों का मुखर होकर विरोध नहीं कर रहा है। यदि कोई नेता बोलता भी है तो यही कहता है कि कानून अपना काम करेगा। केंद्र और प्रदेश में सत्ताधारी पार्टी भाजपा की हालत ज्यादा खराब है।
इस प्रकरण से जनता में स्पष्ट संदेश गया है कि डेरामुखी को भाजपा सरकार बचा रही है। उसकी चलती तो गुरमीत राम रहीम सलाखों के पीछे नहीं जाता। यही नहीं अदालत के फैसले के बाद जो हिंसा हुई उसके लिए भी लोग भाजपा सरकार को ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तो भाजपा सरकार को लगातार फटकार लगा रहा है। इससे सरकार की छवि काफी खराब हुई है, लेकिन भाजपा की अपनी सियासी मजबूरी है। यही हाल अन्य दलों का भी है।
चुनाव के समय हर राजनीतिक दल डेरा सच्चा सौदा के समर्थकों का वोट चाहता है। इसके लिए वह डेरा मुखी के सामने नतमस्तक होता है। डेरा मुखी समर्थन रूपी आशीर्वाद देता है तो उसके समर्थक संबंधित दल को वोट देते हैं। जाहिर है कि इसके बदले में संबंधित राजनीतिक दल डेरा को लाभ पहुंचाता है। राम रहीम मामले में इस समय यही होता दिख रहा है। भाजपा के केंद्रीय और प्रदेश के कई मंत्रियों ने डेरा को लाखों रुपये अनुदान भी दिया है।
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इस प्रकरण से जनता में स्पष्ट संदेश गया है कि डेरामुखी को भाजपा सरकार बचा रही है। उसकी चलती तो गुरमीत राम रहीम सलाखों के पीछे नहीं जाता। यही नहीं अदालत के फैसले के बाद जो हिंसा हुई उसके लिए भी लोग भाजपा सरकार को ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तो भाजपा सरकार को लगातार फटकार लगा रहा है। इससे सरकार की छवि काफी खराब हुई है, लेकिन भाजपा की अपनी सियासी मजबूरी है। यही हाल अन्य दलों का भी है।
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चुनाव के समय हर राजनीतिक दल डेरा सच्चा सौदा के समर्थकों का वोट चाहता है। इसके लिए वह डेरा मुखी के सामने नतमस्तक होता है। डेरा मुखी समर्थन रूपी आशीर्वाद देता है तो उसके समर्थक संबंधित दल को वोट देते हैं। जाहिर है कि इसके बदले में संबंधित राजनीतिक दल डेरा को लाभ पहुंचाता है। राम रहीम मामले में इस समय यही होता दिख रहा है। भाजपा के केंद्रीय और प्रदेश के कई मंत्रियों ने डेरा को लाखों रुपये अनुदान भी दिया है।
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गद्दी मिलने के बाद राम रहीम ने काफी विस्तार किया
Ram Rahim
डेरा सच्चा सौदा की स्थापना साल 1948 में शाह मस्ताना महाराज ने की थी। उनके बाद शाह सतनाम महाराज ने डेरे की गद्दी संभाली। साल 1990 में महज 23 साल की उम्र में डेरे की गद्दी राजस्थान में जन्मे गुरमीत सिंह को मिल गई। इसके बाद गुरमीत ने डेरे का काफी विस्तार किया। देश दुनिया में इसकी 250 से अधिक शाखाएं और 5 करोड़ से अधिक समर्थक हो गए हैं। हरियाणा और पंजाब में ही एक करोड़ से अधिक समर्थक बताए जाते हैं।
पंजाब के करीब 75 लाख समर्थक मालवा क्षेत्र की करीब 69 विधानसभा सीटों पर अच्छा खासा प्रभाव रखते हैं। इसी तरह हरियाणा में 25 लाख से अधिक समर्थक प्रदेश के 9 जिलों की करीब 36 विधानसभा सीटों पर प्रभाव रखते हैं। यही वजह है कि राजनीतिक दल हर चुनाव में डेरा सच्चा सौदा के समर्थन की उम्मीद करते हैं। लगभग सभी सियासी दल डेरा से समर्थन मांगते हैं, लेकिन डेरा अपना नफा-नुकसान सोचने के बाद मतदान से 3-4 दिन पहले किसी एक दल को समर्थन देने का एलान करता है।
यह सिलसिला पिछले कई सालों से चलता आ रहा है। हरियाणा में साल 2014 में हुए विधानसभा चुनाव से पहले डेरा सच्चा सौदा कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) को समर्थन देता रहा है। लेकिन इस बार के चुनाव में भाजपा को अपना आशीर्वाद दिया है। इसकी नींव साल 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डेरा के सामाजिक कार्यों की सराहना करके कर दी थी। इसके बाद डेरे से समर्थन लेने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज मिलने गए।
डेरा मुखी ने विधानसभा चुनाव के मतदान से तीन दिन पहले भाजपा को समर्थन देने का एलान किया। इसके बावजूद अलग अलग दलों के नेता डेरा में शीश झुकाने और आशीर्वाद लेने जाते रहते हैं, चुनाव के समय भी और चुनाव के बाद भी। राजनीतिक पंडित दावा करते हैं कि डेरा सच्चा सौदा का समर्थन मिलने के कारण ही हरियाणा में भाजपा की सरकार बनी।
पंजाब के करीब 75 लाख समर्थक मालवा क्षेत्र की करीब 69 विधानसभा सीटों पर अच्छा खासा प्रभाव रखते हैं। इसी तरह हरियाणा में 25 लाख से अधिक समर्थक प्रदेश के 9 जिलों की करीब 36 विधानसभा सीटों पर प्रभाव रखते हैं। यही वजह है कि राजनीतिक दल हर चुनाव में डेरा सच्चा सौदा के समर्थन की उम्मीद करते हैं। लगभग सभी सियासी दल डेरा से समर्थन मांगते हैं, लेकिन डेरा अपना नफा-नुकसान सोचने के बाद मतदान से 3-4 दिन पहले किसी एक दल को समर्थन देने का एलान करता है।
यह सिलसिला पिछले कई सालों से चलता आ रहा है। हरियाणा में साल 2014 में हुए विधानसभा चुनाव से पहले डेरा सच्चा सौदा कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) को समर्थन देता रहा है। लेकिन इस बार के चुनाव में भाजपा को अपना आशीर्वाद दिया है। इसकी नींव साल 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डेरा के सामाजिक कार्यों की सराहना करके कर दी थी। इसके बाद डेरे से समर्थन लेने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज मिलने गए।
डेरा मुखी ने विधानसभा चुनाव के मतदान से तीन दिन पहले भाजपा को समर्थन देने का एलान किया। इसके बावजूद अलग अलग दलों के नेता डेरा में शीश झुकाने और आशीर्वाद लेने जाते रहते हैं, चुनाव के समय भी और चुनाव के बाद भी। राजनीतिक पंडित दावा करते हैं कि डेरा सच्चा सौदा का समर्थन मिलने के कारण ही हरियाणा में भाजपा की सरकार बनी।
भाजपा को मिलीं 12 सीटें
राम रहीम को साध्वी रेप केस में सजा
ऐसा कहा जाता है कि डेरे के समर्थन के कारण हरियाणा में भाजपा करीब 12 सीटें जीतने में कामयाब रही। इन सीटों में उचना कलां, टोहाना, अंबाला सिटी, हिसार, नारनौंद, बवानीखेड़ा, भिवानी, शाहबाद, थानेसर, लाडवा, मुलाना, पिहोवा आदि शामिल हैं। यह भी माना जाता है कि हरियाणा के 9 जिलों की 36 विधानसभा सीटों पर डेरे के प्रभाव ने कार्य किया। ऐसे में डेरे के गलत कार्यों के प्रति भाजपा सरकार का रवैया स्वाभाविक ही कहा जाएगा। सियासी आशीर्वाद देने वाले गुरु को संकट में कोई शिष्य संकट में नहीं देखना चाहता है।
लेकिन पंजाब में नहीं हुआ डेरे का असर
साल 2014 के विधानसभा चुनाव में डेरा सच्चा सौदा ने हरियाणा में भाजपा को समर्थन दिया तो पंजाब में साल 2017 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल और भाजपा को समर्थन दिया। माना जाता है कि पंजाब की मालवा की 69 सीटों पर 75 लाख से अधिक डेरा समर्थकों का दबदबा है। लेकिन इस बार डेरा समर्थक अकाली-भाजपा प्रत्याशियों को जिताने में सफल नहीं हो पाए।
मालवा की 69 विधानसभा सीटों में से अकाली दल को 8 और भाजपा को केवल एक सीट मिली। जबकि कांग्रेस को 40 सीटें मिलीं। 18 सीटें आम आदमी पार्टी और 2 सीटें लोक इंसाफ पार्टी जीतने में सफल रही। लेकिन पंजाब में साल 2007 के विधानसभा चुनाव में और साल 2009 के लोकसभा चुनाव में डेरे ने कांग्रेस को समर्थन दिया था। तब मालवा की डेरा समर्थकों की प्रभाव वाली करीब 65 सीटों में से कांग्रेस को 37 और अकाली दल को 19 सीटें मिलीं थीं।
हरियाणा और केंद्र के मंत्रियों ने डेरे को दिया लाखों का अनुदान
हरियाणा के शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने इसी साल 15 अगस्त को गुरमीत राम रहीम के जन्मदिन पर सिरसा डेरे में जाकर डेरामुखी को 51 लाख रुपये का अनुदान दिया। यह अनुदान ऐसे समय में दिया गया जब डेरा मुखी के खिलाफ 25 अगस्त को सीबीआई अदालत में फैसला सुनाया जाना था। इससे पहले रुमाल प्रतियोगिता को बढ़ावा देने के नाम पर खेल मंत्री अनिल विज ने डेरा को 50 लाख रुपये का अनुदान दिया। सहकारिता मंत्री एवं रोहतक शहर से विधायक मनीष ग्रोवर ने खेल लीग के दौरान 11 लाख रुपये का अनुदान दिया था। केंद्रीय खेल मंत्री विजय गोयल ने स्टेडियम बनाने के लिए डेरा को 30 लाख रुपये का अनुदान दिया है।
लेकिन पंजाब में नहीं हुआ डेरे का असर
साल 2014 के विधानसभा चुनाव में डेरा सच्चा सौदा ने हरियाणा में भाजपा को समर्थन दिया तो पंजाब में साल 2017 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल और भाजपा को समर्थन दिया। माना जाता है कि पंजाब की मालवा की 69 सीटों पर 75 लाख से अधिक डेरा समर्थकों का दबदबा है। लेकिन इस बार डेरा समर्थक अकाली-भाजपा प्रत्याशियों को जिताने में सफल नहीं हो पाए।
मालवा की 69 विधानसभा सीटों में से अकाली दल को 8 और भाजपा को केवल एक सीट मिली। जबकि कांग्रेस को 40 सीटें मिलीं। 18 सीटें आम आदमी पार्टी और 2 सीटें लोक इंसाफ पार्टी जीतने में सफल रही। लेकिन पंजाब में साल 2007 के विधानसभा चुनाव में और साल 2009 के लोकसभा चुनाव में डेरे ने कांग्रेस को समर्थन दिया था। तब मालवा की डेरा समर्थकों की प्रभाव वाली करीब 65 सीटों में से कांग्रेस को 37 और अकाली दल को 19 सीटें मिलीं थीं।
हरियाणा और केंद्र के मंत्रियों ने डेरे को दिया लाखों का अनुदान
हरियाणा के शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने इसी साल 15 अगस्त को गुरमीत राम रहीम के जन्मदिन पर सिरसा डेरे में जाकर डेरामुखी को 51 लाख रुपये का अनुदान दिया। यह अनुदान ऐसे समय में दिया गया जब डेरा मुखी के खिलाफ 25 अगस्त को सीबीआई अदालत में फैसला सुनाया जाना था। इससे पहले रुमाल प्रतियोगिता को बढ़ावा देने के नाम पर खेल मंत्री अनिल विज ने डेरा को 50 लाख रुपये का अनुदान दिया। सहकारिता मंत्री एवं रोहतक शहर से विधायक मनीष ग्रोवर ने खेल लीग के दौरान 11 लाख रुपये का अनुदान दिया था। केंद्रीय खेल मंत्री विजय गोयल ने स्टेडियम बनाने के लिए डेरा को 30 लाख रुपये का अनुदान दिया है।