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राम रहीम को कैसे भगाना था, पंचकूला में हिंसा कैसे कराई गई, सच आया सामने
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
Updated Fri, 06 Oct 2017 09:06 AM IST
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Ram Rahim Verdict
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25 अगस्त को पंचकूला में हिंसा और राम रहीम को भगाने की साजिश के मामले में कई नए सच सामने आए हैं, जिन्होंने केस को और मजबूती दे दी है। पंचकूला में हुई हिंसा की साजिश सिरसा के डेरे में एक सप्ताह पहले रच ली गई थी। इस दिन डेरा में गुरमीत राम रहीम के करीबियों की एक बैठक हुई थी, जिसमें हनीप्रीम समेत बेहद नजदीकियों को ही शामिल किया गया था।
25 अगस्त को पंचकूला में हुईं हिंसा और आगजनी के मामले में गिरफ़्तार डेरा प्रमुख के दो करीबियों ने पूछताछ में इसका खुलासा किया। 25 अगस्त की हिंसा से ठीक एक हफ्ते पहले डेरे में हुई इस बैठक में तय हुआ था कि यदि डेरा प्रमुख को दोषी करार दिया गया तो किस तरह दंगा फैलाना है। इसी साजिश के तहत ही दोषी ठहराए जाने के 10 मिनट बाद ही पंचकूला में उपद्रवियों ने आतंक मचा दिया।
असल में उनकी प्लानिंग यह थी कि पुलिस दंगा काबू करने में लग जाएगी और उनके सुरक्षा गार्ड डेरा प्रमुख को फरार करा लेंगे। लेकिन ऐसा हो नहीं सका। 22 अगस्त से ही पंचकूला में डेरा समर्थक योजना के तहत झुंड बनाकर पहुंचने लगे थे। 25 अगस्त को हुई हिंसा में 35 लोगों की मौत भी हुई।
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हिंसा के संबंध में राज जानने को हनीप्रीत का रिमांड लिया
पुलिस कमिश्नर एएस चावला ने बताया कि हिंसा की साजिश के संबंध में पूछताछ के लिए हनीप्रीत को रिमांड पर लिया गया है। इस दौरान इस मामले में कुछ और अहम खुलासे होने की उम्मीद है। 17 अगस्त को सिरसा में एक बैठक हुई थी, जिसमें कई पहलुओं पर विचार विमर्श किया गया था। इससे जुड़े तमाम पहलुओं को पुलिस खंगाल रही है।
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25 अगस्त को पंचकूला में हुईं हिंसा और आगजनी के मामले में गिरफ़्तार डेरा प्रमुख के दो करीबियों ने पूछताछ में इसका खुलासा किया। 25 अगस्त की हिंसा से ठीक एक हफ्ते पहले डेरे में हुई इस बैठक में तय हुआ था कि यदि डेरा प्रमुख को दोषी करार दिया गया तो किस तरह दंगा फैलाना है। इसी साजिश के तहत ही दोषी ठहराए जाने के 10 मिनट बाद ही पंचकूला में उपद्रवियों ने आतंक मचा दिया।
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असल में उनकी प्लानिंग यह थी कि पुलिस दंगा काबू करने में लग जाएगी और उनके सुरक्षा गार्ड डेरा प्रमुख को फरार करा लेंगे। लेकिन ऐसा हो नहीं सका। 22 अगस्त से ही पंचकूला में डेरा समर्थक योजना के तहत झुंड बनाकर पहुंचने लगे थे। 25 अगस्त को हुई हिंसा में 35 लोगों की मौत भी हुई।
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हिंसा के संबंध में राज जानने को हनीप्रीत का रिमांड लिया
पुलिस कमिश्नर एएस चावला ने बताया कि हिंसा की साजिश के संबंध में पूछताछ के लिए हनीप्रीत को रिमांड पर लिया गया है। इस दौरान इस मामले में कुछ और अहम खुलासे होने की उम्मीद है। 17 अगस्त को सिरसा में एक बैठक हुई थी, जिसमें कई पहलुओं पर विचार विमर्श किया गया था। इससे जुड़े तमाम पहलुओं को पुलिस खंगाल रही है।
रास्ता बदलते ही डेरा प्रमुख को फरार कराने की साजिश नाकाम
राम रहीम के साथ हनीप्रीत (फाइल फोटो)
जब डेरा प्रमुख को 25 अगस्त को दोषी करार दिया गया तो इससे पहले ही अंबाला को जाने वाले रास्ते और वाहनों में असलहे सहित सभी सुरक्षा कर्मियों ने तैयारियां पूरी कर ली थी। उन्हें उम्मीद थी कि दोषी करार देने के बाद डेरा प्रमुख को सड़क मार्ग से अंबाला जेल ले जाया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अचानक सुनारिया जेल में जेल जाने का निर्णय हुआ और हेलीकॉप्टर से डेरा प्रमुख को ले जाया गया, जिससे साजिश को अंजाम तक नहीं पहुंचाया जा सका।
आरोपियों ने भी किया साजिश का खुलासा
डेरा प्रमुख को फरार कराने की साजिश में निजी सुरक्षा गार्ड प्रीतम और निजी सहायक राकेश भी 25 अगस्त को घटना के दिन पंचकूला में डेरा प्रमुख की सुरक्षा में तैनात थे। दोनों आरोपियों ने पूछताछ में पुलिस को कई अहम खुलासा किए हैं, जिससे जुड़े तमाम आरोपियों पर पुलिस की पैनी निगाहें टिकी हुई हैं। काले रंग की मर्सडीज भी थी, जिसे पुलिस सिरसा से बरामद कर लिया है।
वॉकी टॉकी को बनाया साजिश का जरिया
डेरा प्रमुख को फरार कराने की साजिश का हिस्सा में आधुनिक ड्रोन, हथियार, वाहनों के काफिले में मौजूद सुरक्षा कर्मियों की तैनाती के अलावा फायर ब्रिगेड की गाड़ी में पेट्रोल जैसे खतरनाक मंसूबे थे। ड्रोन के जरिये पंचकूला के अलग अलग हिस्सों पर नजर रखी जा रही थी तो दूसरी तरफ वॉकी टॉकी को आरोपियों ने संचार का माध्यम बना लिया था। इस कारण ही हिंसा की साजिश रचने वाले एक दूसरे के संपर्क में बने हुए थे।
आरोपियों ने भी किया साजिश का खुलासा
डेरा प्रमुख को फरार कराने की साजिश में निजी सुरक्षा गार्ड प्रीतम और निजी सहायक राकेश भी 25 अगस्त को घटना के दिन पंचकूला में डेरा प्रमुख की सुरक्षा में तैनात थे। दोनों आरोपियों ने पूछताछ में पुलिस को कई अहम खुलासा किए हैं, जिससे जुड़े तमाम आरोपियों पर पुलिस की पैनी निगाहें टिकी हुई हैं। काले रंग की मर्सडीज भी थी, जिसे पुलिस सिरसा से बरामद कर लिया है।
वॉकी टॉकी को बनाया साजिश का जरिया
डेरा प्रमुख को फरार कराने की साजिश का हिस्सा में आधुनिक ड्रोन, हथियार, वाहनों के काफिले में मौजूद सुरक्षा कर्मियों की तैनाती के अलावा फायर ब्रिगेड की गाड़ी में पेट्रोल जैसे खतरनाक मंसूबे थे। ड्रोन के जरिये पंचकूला के अलग अलग हिस्सों पर नजर रखी जा रही थी तो दूसरी तरफ वॉकी टॉकी को आरोपियों ने संचार का माध्यम बना लिया था। इस कारण ही हिंसा की साजिश रचने वाले एक दूसरे के संपर्क में बने हुए थे।
हर जिले के लिए एक करोड़, अंबाला के लिए पांच करोड़ रुपये
Ram Rahim
पंचकूला में जुटी भीड़, फैसला आने और उसकेबाद की मैनेजमेंट के लिए फंडिंग हनीप्रीत के माध्यम से हुई थी। हनीप्रीत ने डेरा की मैनेजमेंट में बड़े ओहदेदार डॉ. पीआर नैन को पैसे दिए थे। हर जिले के लिए एक करोड़ और अंबाला के लिए पांच करोड़ रुपये जारी किए गए थे। पुलिस जांच में यह पता चला है कि डॉ. नैन ने हनीप्रीत से पैसा मिलने केबाद सभी जिला प्रभारियों को रकम पहुंचाई।
इस बात को भी हनीप्रीत के रिमांड का आधार बनाया गया
पंचकूला के इंचार्ज चमकौर सिंह और डॉ. नैन की डिसक्लोजर में भी इस बात का जिक्र किया गया था। अब पुलिस हनीप्रीत से यह उगलवाने में लगी है कि मेनेजमेंट केलिए जो पैसा दिया था, वह किस तरह से इस्तेमाल किया जाना था? पैसे की खर्च की मैनेजमेंट में भीड़ जुटाना, गाड़ियों का काफिला तैयार करना और किस तरह के खर्च इस पैसे से किए जाने थे। डॉ. नैन और चमकोर सिंह की डिस्कलोजर केबाद हनीप्रीत से भी इस बारे में पूछताछ हुई और उसका रिमांड लेने में भी इसे आधार बनाया गया।
खर्च का ब्योरा, केस की मजबूती
पुलिस इस खर्च के ब्यौरे को जुटाकर एक मजबूत केस तैयार करना चाहती है। क्योंकि हर जिले केलिए एक करोड़ और सबसे ज्यादा पांच करोड़ रुपये अंबाला के लिए देने का मतलब है कि 25 से 30 करोड़ मैनेजमेंट केलिए जारी हुआ। पुलिस सूत्रों ने यह भी बताया कि अंबाला के लिए ज्यादा पैसा इसलिए खर्च हुआ कि वहां डेरे केसमर्थक भी ज्यादा हैं और उस क्षेत्र में डेरे की प्रॉपर्टी भी ज्यादा है।
इस बात को भी हनीप्रीत के रिमांड का आधार बनाया गया
पंचकूला के इंचार्ज चमकौर सिंह और डॉ. नैन की डिसक्लोजर में भी इस बात का जिक्र किया गया था। अब पुलिस हनीप्रीत से यह उगलवाने में लगी है कि मेनेजमेंट केलिए जो पैसा दिया था, वह किस तरह से इस्तेमाल किया जाना था? पैसे की खर्च की मैनेजमेंट में भीड़ जुटाना, गाड़ियों का काफिला तैयार करना और किस तरह के खर्च इस पैसे से किए जाने थे। डॉ. नैन और चमकोर सिंह की डिस्कलोजर केबाद हनीप्रीत से भी इस बारे में पूछताछ हुई और उसका रिमांड लेने में भी इसे आधार बनाया गया।
खर्च का ब्योरा, केस की मजबूती
पुलिस इस खर्च के ब्यौरे को जुटाकर एक मजबूत केस तैयार करना चाहती है। क्योंकि हर जिले केलिए एक करोड़ और सबसे ज्यादा पांच करोड़ रुपये अंबाला के लिए देने का मतलब है कि 25 से 30 करोड़ मैनेजमेंट केलिए जारी हुआ। पुलिस सूत्रों ने यह भी बताया कि अंबाला के लिए ज्यादा पैसा इसलिए खर्च हुआ कि वहां डेरे केसमर्थक भी ज्यादा हैं और उस क्षेत्र में डेरे की प्रॉपर्टी भी ज्यादा है।