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राम सबके, राम भक्ति पर सिर्फ भाजपा का कॉपीराइट नहीं : पवन बंसल

Fri, 12 Jan 2024 01:55 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 12 Jan 2024 01:55 AM IST
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Ram is everyone's, not just BJP's copyright on Ram Bhakti: Pawan Bansal
चंडीगढ़। राम सबके हैं। राम भक्ति पर भाजपा का काॅपीराइट नहीं है। यह बात पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन कुमार बंसल ने कही। बंसल ने कहा कि वह भी हिंदू हैं। अयोध्या राम मंदिर जाउंगा लेकिन भाजपा के कार्यक्रम में मूक दर्शक बनने के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि रामभक्त के रूप में सैकड़ों साथियों के साथ अयोध्या राम मंदिर जाउंगा।बंसल ने कहा कि चार शंकराचार्यों ने राम मंदिर के उद्घाटन का निमंत्रण ठुकरा दिया है। यह इस सत्य को उजागर करता है कि मंदिर का इस तरह उद्घाटन राम के लिए नहीं बल्कि चुनाव के लिए हो रहा है। यह आरएसएस और भाजपा का एक राजनीतिक कार्यक्रम है। भगवान राम और उनके करोड़ों भक्तों की भावनाओं से जुड़ा नहीं है। भगवान राम और उनके आदर्शों से भाजपा को दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं। बस 2024 के चुनाव में वोट के लिए यह सब किया जा रहा है। बंसल ने कहा कि हर चीज को बांटने में माहिर भाजपा ने आखिर भगवान को भी बांट दिया। हिंदू धर्म भाजपा की जागीर नहीं। राम मंदिर कोई भाजपा की कामयाबी नहीं है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों से बना है।
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1993 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने भी सुप्रीम कोर्ट जैसा ही प्लान तैयार किया था, जिसको विश्व हिंदू परिषद ने उस वक्त नकार दिया था, जिसमें विवादित स्थल पर आलीशान राम मंदिर व पास ही में मस्जिद के निर्माण की बात कही थी, लेकिन वीएचपी ने 18 किलोमीटर के दायरे में कोई और धार्मिक स्थल न बनने की बात कहकर उसका विरोध किया था। यहां तक कि 1988 में राजीव गांधी ने ही राम मंदिर का शिलान्यास किया था, जबकि खुद भाजपा के पूर्व केंद्रीय मंत्री रह चुके शाहनवाज हुसैन ने संसद में ये बयान दिया था कि रामलला की स्थापना भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने की थी।
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यहां सिर्फ और सिर्फ राजनीति की जा रही है। आधे-अधूरे मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा अपने हित और वोट बैंक के लिए किया जा रहा है। विरोध में हो जाए वही इनका दुश्मन हो जाए, चाहे वो शंकराचार्य हो या कोई और इनको किसी से फर्क नही पड़ता, सत्ता के लिए ये कुछ भी करेंगे। इसलिए सोनिया गांधी, राहुल व शंकराचार्य भी मोदी के भाजपा की महिमा सुनने नहीं जा रहे हैं। चुनाव तक पीएम मोदी मंदिरों के विकास पर जोर देंगे, क्योंकि उनके पास 10 साल का हिसाब देने से बचने के लिए सिर्फ यही एक रास्ता बचा है।
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