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Hindi News ›   Chandigarh ›   Rajeev spread happiness in the lives of five people

Chandigarh News: पांच लोगों की जिंदगी में खुशियां बिखेर गए राजीव 

Wed, 21 Dec 2022 09:00 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Wed, 21 Dec 2022 09:00 AM IST
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Rajeev spread happiness in the lives of five people
चंडीगढ़। हरियाणा के जिला कुरुक्षेत्र के पिहोवा तहसील के गांव उरनई के रहने वाले 18 वर्षीय राजीव कुमार दुनिया से जाते-जाते पांच लोगों की जिंदगी में खुशियां बिखेर गए। पीजीआई में भर्ती राजीव कुमार के ब्रेनडेड होने पर परिजनों की अनुमति के बाद अंगदान किया गया। उनकी किडनी और लीवर से तीन गंभीर मरीजों की जान बचाई गई जबकि कॉर्निया दो नेत्रहीन लोगों में प्रत्यारोपित किया गया।
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पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल ने अंगदाता परिवार के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि मुझे लगता है कि बिना शर्त अपने दर्द के बीच मानवता और करुणा के कारण अंगदान का निर्णय लेना अनुकरणीय संदेश देता है। 13 दिसंबर को राजीव अचानक दुर्घटना का शिकार हो गए। गंभीर रूप से घायल राजीव को पिहोवा के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां से उन्हें पीजीआई रेफर कर दिया गया। उसी दिन राजीव को पीजीआई में भर्ती कराया गया, जहां 16 दिसंबर की शाम को उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। राजीव की मां कमलेश से जब उनका अंगदान करने का अनुरोध किया गया तो उन्होंने अपने धैर्य का परिचय देते हुए अपने बेटे के अंगदान के लिए हामी भर दी। उन्होंने कहा कि वह उसकी मुस्कान और सकारात्मक ऊजा को कभी नहीं भूल सकतीं। दुनिया से जाते हुए अंगदान से दूसरों के जीवन में खुशियों का संचार करने का काम किया है।
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ऐसा लगता है भगवान खुद डोनर के रूप में आए
राजीव के लीवर को एक 24 वर्षीय युवक को प्रत्यारोपित किया गया। युवक के पिता ने राजीव के परिजनों का आभार जताते हुए कहा कि उनके बेटे की जिंदगी बचाने का एकमात्र विकल्प लीवर ही था। ऐसा लगता है कि भगवान खुद डोनर के रूप में आए और जीने का दूसरा मौका दे दिया है। वहीं किडनी प्राप्त कर्ताओं ने भी ऐसी ही भावना व्यक्त की। उनका कहना है कि अजनबियों के फैसले जो केवल दूसरों की मदद करना चाहते थे, ने हमें जीवन का एक नया अवसर प्रदान किया है। हमें अपने किस्मत पर विश्वास नहीं हो रहा है। उधर, पीजीआई रोटो के नोडल अधिकारी प्रो. विपिन कौशल ने बताया कि अंगदान के जरिए किसी को नया जीवन प्रदान किया जा सकता है। जन जागरूकता के माध्यम से अंगदान की सफलता दर में बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
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