{"_id":"5b73230342c79220bf695cf1","slug":"raja-nahar-singh-drama-play-in-haryana-raj-bhavan","type":"story","status":"publish","title_hn":"छोटी सी सेना के बल पर राजा नाहर सिंह अंग्रेजों के दांत कर दिए थे खट्टे, इस जगह दी गई थी फांसी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छोटी सी सेना के बल पर राजा नाहर सिंह अंग्रेजों के दांत कर दिए थे खट्टे, इस जगह दी गई थी फांसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 15 Aug 2018 08:14 AM IST
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नाटक का मंचन करते कलाकार
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हरियाणा कला परिषद द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर वीर राजा नाहर सिंह का मंचन किया गया। यह आयोजन हरियाणा राज भवन के मल्टीरपज हाल में किया गया। इसमें हरियाणा के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी मुख्य अतिथि थे। इस नाटक के लेखक थे अशोक लाल और इसके निर्देशक सुदेश शर्मा थे। नाटक की प्रस्तुति थियेटर फॉर थियेटर ग्रुप द्वारा किया गया।
1857 में भारत के कई राज्यों से कई विद्रोह हुए। इनमें से एक विद्रोह था बल्लभगढ़ के राजा नाहर सिंह का। इन्होंने अंग्रेजों को सोचने और कड़े कदम उठाने पर मजबूर कर दिया था। यह नाटक राजा नाहर सिंह के जीवन उदय और हरियाणा राज्य का भारतीय स्वतंत्रता की लड़ाई में महत्व को दर्शाता है। वर्ष 1857 के भारतीय विद्रोह के दौरान भारत के सभी रियासतों में संबंध बहुत संतुलित नहीं थे, लेकिन राजा नाहर सिंह और उनकी छोटी सी सेना ने अकेले ही ब्रिटिश शासन को जड़ से उखाड़ने का निश्चय कर लिया था।
प्रस्तुत नाटक में एक नाटक से जुड़े सभी आवश्यक तत्व के साथ हरियाणवी लोक गीतों और स्क्रीन पर शक्तिशाली एवं सटीक प्रस्तुतियों के उपयोग से नाटक अधिक आकर्षक और प्रभावशाली प्रतीत होता है। यह नाटक बहुत हद तक वास्तविकता से जोड़ता है और उस समय वापस ले जाता है जब 1820 के दशक में बल्लभगढ़ के लोग अंग्रेजों के अधीन थे और राजा नाहर सिंह के ऐतिहासिक विद्रोह का आगाज हुआ।
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इस विद्रोह से घबरा कर ब्रिटिश राज्य ने राजा नाहर सिंह के विद्रोह को दबाने और उन्हें खत्म करने के लिए ब्रिटिश ऑफिसर को नियुक्त किया। इन दोनों ब्रिटिश नेता ने 1957 में राजा नाहर सिंह को पलवल के खजाने की डकैती के आरोप में गिरफ्तार कर उन पर मुकद्दमा चलाया और राजा नाहर सिंह को 9 जनवरी, 1858 को दिल्ली के कोटली, चंडी चौक पर फंसी पे लटका दिया गया।
और हो गई शहीद की वापसी
थियेटर आर्ट्स चंडीगढ़ के कलाकारों ने चंडीगढ़ टैगोर थियेटर के मिनी आडिटोरियम में नाटक ‘शहीद की वापसी’ का मंचन किया। यह नाटक राष्ट्रीय एकता और अखंडता पर आधारित रहा। इसका लेखन राजीव मेहता और लेखन सीएस सिंदरा ने किया। इस नाटक के दौरान उन महान शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी गई जिन्होंने अपने देश और देशवासियों के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
नाटक के आरंभ में भारत के विभिन्न प्रांत के लोग सभा में महान शहीद ऊधम सिंह को श्रद्धांजलि देने के लिए एक सामूहिक सभा में इकट्ठे होते हैं। भारत के महान इतिहास का प्रतीक गुरुदेव हमारे देश के महान शहीदों जैसे भगत सिंह, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, वीर सावरकर, लाला लाजपतराय, चंद्रशेखर आजाद, बाल गंगाधर तिलक जैसे अमर शहीदों के महान बलिदान के बारे में अवगत कराया जाता है। सभी को सचेत किया जाता है कि यह आजादी जिनका हम आज आनंद मना रहे हैं, यह हमें सस्ते में हासिल नहीं हुई।
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1857 में भारत के कई राज्यों से कई विद्रोह हुए। इनमें से एक विद्रोह था बल्लभगढ़ के राजा नाहर सिंह का। इन्होंने अंग्रेजों को सोचने और कड़े कदम उठाने पर मजबूर कर दिया था। यह नाटक राजा नाहर सिंह के जीवन उदय और हरियाणा राज्य का भारतीय स्वतंत्रता की लड़ाई में महत्व को दर्शाता है। वर्ष 1857 के भारतीय विद्रोह के दौरान भारत के सभी रियासतों में संबंध बहुत संतुलित नहीं थे, लेकिन राजा नाहर सिंह और उनकी छोटी सी सेना ने अकेले ही ब्रिटिश शासन को जड़ से उखाड़ने का निश्चय कर लिया था।
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प्रस्तुत नाटक में एक नाटक से जुड़े सभी आवश्यक तत्व के साथ हरियाणवी लोक गीतों और स्क्रीन पर शक्तिशाली एवं सटीक प्रस्तुतियों के उपयोग से नाटक अधिक आकर्षक और प्रभावशाली प्रतीत होता है। यह नाटक बहुत हद तक वास्तविकता से जोड़ता है और उस समय वापस ले जाता है जब 1820 के दशक में बल्लभगढ़ के लोग अंग्रेजों के अधीन थे और राजा नाहर सिंह के ऐतिहासिक विद्रोह का आगाज हुआ।
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इस विद्रोह से घबरा कर ब्रिटिश राज्य ने राजा नाहर सिंह के विद्रोह को दबाने और उन्हें खत्म करने के लिए ब्रिटिश ऑफिसर को नियुक्त किया। इन दोनों ब्रिटिश नेता ने 1957 में राजा नाहर सिंह को पलवल के खजाने की डकैती के आरोप में गिरफ्तार कर उन पर मुकद्दमा चलाया और राजा नाहर सिंह को 9 जनवरी, 1858 को दिल्ली के कोटली, चंडी चौक पर फंसी पे लटका दिया गया।
और हो गई शहीद की वापसी
थियेटर आर्ट्स चंडीगढ़ के कलाकारों ने चंडीगढ़ टैगोर थियेटर के मिनी आडिटोरियम में नाटक ‘शहीद की वापसी’ का मंचन किया। यह नाटक राष्ट्रीय एकता और अखंडता पर आधारित रहा। इसका लेखन राजीव मेहता और लेखन सीएस सिंदरा ने किया। इस नाटक के दौरान उन महान शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी गई जिन्होंने अपने देश और देशवासियों के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
नाटक के आरंभ में भारत के विभिन्न प्रांत के लोग सभा में महान शहीद ऊधम सिंह को श्रद्धांजलि देने के लिए एक सामूहिक सभा में इकट्ठे होते हैं। भारत के महान इतिहास का प्रतीक गुरुदेव हमारे देश के महान शहीदों जैसे भगत सिंह, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, वीर सावरकर, लाला लाजपतराय, चंद्रशेखर आजाद, बाल गंगाधर तिलक जैसे अमर शहीदों के महान बलिदान के बारे में अवगत कराया जाता है। सभी को सचेत किया जाता है कि यह आजादी जिनका हम आज आनंद मना रहे हैं, यह हमें सस्ते में हासिल नहीं हुई।