हाई स्पीड ट्रेन: मोदी के ड्रीम को ट्रैक पर लाने की तैयारी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाई स्पीड ट्रेन के ड्रीम प्रोजेक्ट को पंख लगने वाले हैं। 200 किमी/प्रति घंटे की रफ्तार से हवा से बातें करने वाली ट्रेन को जमीन पर उतारने की तैयारी पूरी हो चुकी है।
रेलवे बोर्ड दिल्ली ने हाई स्पीड ट्रेन के कोच निर्माण का जिम्मा रेल कोच फैक्टरी कपूरथला को सौंपा है। आरसीएफ ने नमो के सपनों की स्पीड ट्रेन के कोच का डिजाइन तैयार कर लिया है।
वर्ष 2015-16 तक यह ट्रेन रेलवे के सुपुर्द कर दी जाएगी। रेल कोच फैक्टरी के महाप्रबंधक आलोक दवे ने बताया कि इस ट्रेन का डिजाइन अप्रूव्ल के लिए आरडीएसओ लखनऊ को भेजा जा चुका है।
आरडीएसओ से अनुमति मिलते ही कोच निर्माण का कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया जाएगा। इन कोचों में एलईडी, टीवी, वाई-फाई और यात्री सूचना प्रणाली की सुविधा मुहैया होगी।
उन्होंने बताया कि इनमें स्टील ब्रेक डिस्क और सिनटर्ड ब्रेक पैड का इस्तेमाल करते हुए अपग्रेडेड डिस्क ब्रेक सिस्टम का प्रावधान होगा। प्लग टाइप आटोमैटिक बॉडी साइड दरवाजे और वेस्टीबियूल क्षेत्र का संशोधित डिजाइन इंटर-कार गैंगवे का अनुसरण किया जाएगा।
हाई स्पीड ट्रेन के लिए सक्षम हैं ट्रैक
जीएम ने बताया कि भारतीय रेलवे ट्रैक इस हाई स्पीड ट्रेन के लिए सक्षम हैं। ट्रैक में सिग्नल से संबंधित जरूरी तकनीकी बदलाव भी किए जाएंगे। रफ्तार के अनुसार ट्रैक पर पत्थरों के साइज पर भी ध्यान दिया जाएगा, क्योंकि मौजूदा रेल ट्रैक पर मौजूद पत्थर सामान्य रेलगाड़ियों के चलने के लिए पर्याप्त हैं।
इन रेल डिब्बों में गैप नहीं होगा। यह एक-दूसरे से बिल्कुल सटे हुए होंगे और यह एक सिंगल ट्यूब की शेप में नजर आएंगे। इसके एक कोच की कीमत लगभग 3.5 करोड़ रुपये होगी। आरसीएफ में 13 बोगियों (डिब्बों) का एक रैक बनाया जाएगा। अगले वर्ष से रेल यात्री इस अत्याधुनिक सुविधाओं वाली ट्रेन में सफर का लुत्फ उठा सकेंगे।
बांग्लादेश से मिला है 376 करोड़ का आर्डर
आरसीएफ को बांग्लादेश के लिए 120 एलएचबी टाइप स्टेनलेस स्टील कोचों के निर्माण का आर्डर मिला है। यह भारतीय रेलवे की ओर से प्राप्त रोलिंग स्टाक का सबसे बड़ा निर्यात आर्डर है।
जीएम दवे ने बताया कि रक्षा मंत्रालय की ओर से 90 एसी-थ्री टियर कोच का भी आर्डर मिला है, जो रक्षा मंत्रालय का अब तक का सबसे बड़ा आपूर्ति आर्डर है।
बांग्लादेश को 40 कोच प्रतिवर्ष और रक्षा मंत्रालय को 30 कोच प्रतिवर्ष तैयार करके भेजे जाएंगे। बांग्लादेश से आरसीएफ को करीब 376 करोड़ रुपये का आर्डर मिला है।
160 किमी/प्रति घंटा दौड़ने वाले कोच बने हैं
भारतीय रेलवे की रेल नेटवर्क की गति को अपग्रेड करने के उद्देश्य से आरसीएफ ने शताब्दी रैक के 17 कोचों समेत 12 चेयर कार, 3 एग्जीक्यूटिव चेयरकार, 2 पावर कार और 160 किमी/प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने वाले कोच बनाए हैं।
इसके अलावा रेलवे ट्रैक की जांच, फेंसिंग, ओवरहेड बिजली उपकरणों, तीव्र गति रेल नेटवर्क के अनुसार ब्रिज और सिग्नल सिस्टम के लिए 160 किमी/प्रति घंटे की गति वाली आब्जर्वेशन कार का भी विकास किया है।
जीएम ने बताया कि रेलवे ट्रैक को मलमुक्त रखने के लिए एलएचबी कोचों में बायो-डाइजेस्टर्स लगाने शुरू किए हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय रेल ट्रैक पर दौड़ रही ट्रेनों में 50 प्रतिशत कोच आरसीएफ कपूरथला ने तैयार किए हैं।
यह हमारे लिए गर्व की बात है। इसी गुणवत्ता ने विदेशों को भी आकर्षित किया है। इसी का परिणाम है कि आरसीएफ ने विभिन्न एशिया और अफ्रीकी देशों को कोच निर्यात किए हैं।