राहुल से बोले पंजाब के विधायक, हमारा नेता कौन?
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पंजाब के अधिकतर कांग्रेस विधायकों ने पार्टी हाईकमान को स्पष्ट कर दिया है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में उनका नेता कौन होना चाहिए। विधायकों ने एक सुर में माना कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ही पंजाब में पार्टी का चेहरा होने चाहिए।
मौजूदा प्रदेश प्रधान प्रताप बाजवा की अगुवाई से नुकसान हो सकता है। दिल्ली में हुई बैठक के दौरान पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पहली बार पूरा समय देकर एक-एक विधायक की बात सुनी, लेकिन यह संकेत नहीं दिया कि उनके मन में क्या है।
दलितों और माझा-दोआबा के विधायकों के साथ दो बैठकें
राहुल ने पंजाब के बारे में फीडबैक लेने को सोमवार को दलित विधायकों और दोआबा-माझा के विधायकों के साथ दो अलग-अलग बैठकें कीं। दलितों के साथ पहली बैठक दोपहर ढाई बजे शुरू हुई और दो घंटे चली। बैठक में मौजूद दस विधायकों से राहुल ने पंजाब की मौजूदा समस्याओं के बारे में पूछा। विधानसभा चुनाव के मुद्दों के बारे में जानकारी ली।
साथ ही यह भी पूछा कि परंपरागत दलित व हिंदू वोट बैंक को मजबूती के साथ कैसे जोड़ने को क्या किया जा सकता है। इस बैठक में कई विधायकों ने कहा कि मौजूदा नेतृत्व सबको साथ लेकर चलने में असमर्थ रहा है। चुनाव के समय कैप्टन ही पार्टी का चेहरा होना चाहिए। उन्होंने राहुल को संकेत दिए कि कैप्टन को कैंपेन कमेटी का चेयरमैन बनाया जाए।
साथ ही दलितों को भी सीएलपी लीडर जैसा पद दिया जाए। दूसरी बैठक में माझा और दोआबा के दस विधायक मौजूद थे। इसमें भी राहुल ने उन्हीं मुद्दों पर विधायकों की राय ली। साथ ही भूमि अधिग्रहण एक्ट के खिलाफ आंदोलन पर भी चर्चा की। बाजवा की पत्नी चरनजीत कौर बाजवा की मौजूदगी में विधायकों ने कैप्टन को आगे लाने की हिमायत की।
सबकी सुनते रहे बात, नहीं दिए कोई संकेत
सूत्रों के मुताबिक, दो विधायकों ने तो यहां तक कहा कि बाजवा पांच साल सांसद रहे, यह बताएं कि उनके हलकों में कितनी ग्रांट खर्च की।
उन्होंने कहा कि बाजवा विधानसभा चुनाव में जीत नहीं दिला सकते। सूत्रों के मुताबिक, चरनजीत कौर बाजवा ने कहा कि कैप्टन से लोग मिल नहीं सकते, उन्हें कोई पसंद नहीं करता।
यहां गौरतलब है कि ज्यादातर विधायक शुरू से ही कैप्टन के साथ हैं, इसलिए राहुल की मीटिंग में भी उनका कैप्टन के हक में बोलना भी तय था। मंगलवार को मालवा के विधायकों से मीटिंग के बाद ही हाईकमान का रुख साफ होने के आसार हैं।