दुश्मनों के मंसूबे होंगे फेल, आज अंबाला आ रहा गेमचेंजर राफेल, घातक होगी सुखोई की जुगलबंदी
- 29 जुलाई को अंबाला एयर फोर्स स्टेशन पर लैंड करेंगे राफेल
- कारगिल युद्ध के बाद से थी एयरफोर्स को एक और घातक विमान की दरकार
- सुखोई-30 एमकेआई के बाद अब राफेल बढ़ाएगा एयरफोर्स की संहारक क्षमता
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दुश्मनों के मंसूबे नेस्तनाबूद करने के लिए पांच लड़ाकू विमान राफेल फ्रांस से 7,364 किमी का सफर तय करके बुधवार को अंबाला पहुंचेंगे। वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया इन विमानों की अगवानी करेंगे। अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर राफेल के आगमन को लेकर एहतियातन वायुसेना के ग्लोबमास्टर, चिनूक, हरक्युलिस, एएन-32 विमानों और हेलिकॉप्टरों की गतिविधियां बढ़ा दी गई हैं।
राफेल के लिए अत्याधुनिक हैंगर और हथियारों को रखने के लिए भंडारगृह तैयार हो चुके हैं। तीन किमी के दायरे में नजर आते ही ड्रोन को मार गिराने के आदेश हैं। धारा 144 लगा दी गई है।
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27 जुलाई को फ्रांस से चले इन विमानों को प्रशिक्षित पायलट ला रहे हैं। इन विमानों में हवा में ही ईंधन भरा गया। फ्रांस से उड़ान भरने के करीब सात घंटे बाद ये विमान संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अलदाफ्रा एयरबेस पर उतारे गए। यहीं से अंबाला के लिए रवानगी होनी है।
अंबाला में तैयार हो सकते हैं कलपुर्जे...राफेल के कल-पुर्जे भविष्य में अंबाला में तैयार हो सकते हैं। अंबाला की वैशेषिका इकाई कई दशकों से रक्षा उपकरण तैयार करती रही है। राफेल बनाने वाली फ्रांसिसी कंपनी दसॉल्ट ने विमान के कलपुर्जे बनाने के लिए भारत की जिन 72 कंपनियों को चिह्नित किया है, उनके लिए अंबाला की साइंस इंडस्ट्री खासकर वैशेषिका सैन्य उपकरण सप्लाई करती है।
इंडियन एयरफोर्स को था बेसब्री से इंतजार
वैसे तो राफेल डील के बाद इन लड़ाकू विमानों के भारत में आने को लेकर कई तरह की पेंचीदगियां सामने आती रहीं। सही मायनों में इंडियन एयरफोर्स को कारगिल युद्ध के बाद से ही एक और घातक लड़ाकू विमान का बेसब्री से इंतजार था। मगर यह इंतजार अब करीब 20 साल बाद खत्म होने वाला है।
इंडियन एयरफोर्स के एक अधिकारी का मानना है कि अब यह कमी राफेल पूरी करेगा। सूत्रों के अनुसार इंडियन एयरफोर्स के कई लड़ाकू विमान कुछ वर्षों में रिटायर होकर बेड़े से बाहर हो चुके हैं। इसी के चलते कुछ स्क्वाड्रन को भी कम किया गया है। ऐसे में इंडियन एयरफोर्स की ऑपरेशनल क्षमता को बढ़ाने के लिए राफेल की बड़ी दरकार थी। ताकि दुश्मन की एयरफोर्स ताकत का जवाब इंडियन एयरफोर्स भी मजबूती से दे सकें।
दुश्मन पर भारी पड़ेगी सुखोई के साथ जुगलबंदी
इंडियन एयरफोर्स के पास अभी तक सबसे खतरनाक लड़ाकू विमानों में सुखोई-30 एमकेआई मौजूद है। सूत्रों ने बताया कि भारतीय वायुसेना के बेड़े में अभी 272 सुखोई विमान इन-सर्विस हैं। यह विमान रूस का है और सुपरसोनिक ब्रह्मोस एयर लोडेड क्रूज मिसाइल को ले जाने में भी सक्षम हैं। हाल ही में सुखोई को इस क्रूज मिसाइल कैरी करने के लिए मॉडिफाई किया गया है। पुलवामा अटैक के बाद इंडियन एयरफोर्स के एयर स्ट्राइक में सुखोई ने ही अहम रोल अदा किया था। अब चूंकि राफेल भी वायुसेना के बेड़े में शामिल हो रहे हैं। तो ऐसे में सुखोई और राफेल की जुगलबंदी निसंदेह दुश्मन पर भारी पड़ेगी।
ग्लोबमास्टर, चिनूक, हरक्यूलिस विमानों की गतिविधियां अंबाला में बढ़ी
राफेल के आगमन को लेकर अंबाला एयरफोर्स स्टेशन में वायुसेना के ग्लोबमास्टर, चिनूक, हरक्यूलिस, एएन-32 समेत अन्य हेलीकॉप्टरों की गतिविधियां भी फिलहाल बढ़ा दी गई हैं। राफेल के लिए अत्याधुनिक हैंगर और हथियारों को रखने के लिए वेपन स्टोरेज तैयार हो चुके हैं। सुरक्षा के लिहाज से इस इलाके को पहले ही नो ड्रोन जोन घोषित किया जा चुका है।
एयरफोर्स स्टेशन के 3 किलोमीटर के दायरे में जहां भी ड्रोन दिखाई दिया, उसे उड़ा दिया जाएगा। इसके अलावा एयरफोर्स स्टेशन की रिहायशी इलाकों में भी पिछले 7 दिनों से एयरफ़ोर्स पुलिस का सर्च अभियान चल रहा है। जो स्थानीय लोगों से इस बात की जानकारी जुटा रहा हैं कि पिछले दिनों में उनके इलाके में कोई नया या संदिग्ध व्यक्ति तो नहीं देखा गया।
यह सारी एक्सरसाइज राफेल की सुरक्षा के मद्देनजर की जा रही है, क्योंकि राफेल की सुरक्षा भी इंडियन एयरफोर्स के लिए बड़ी चुनौती है। राफेल के वेलकम के लिए एयरफोर्स स्टेशन को तिरंगानुमा फ्लैग्स से सजाया गया है। इंडक्शन सेरेमनी फिलहाल टाल दी गई है। मगर राफेल का वाटर कैनन वेलकम हो सकता है। औपचारिक वेलकम के बाद राफेल अपने आगामी ऑपरेशन में लग जाएंगे।