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पाकिस्तान- चीन की बढ़ सकती है टेंशन, अंबाला में राफेल की तैनाती का रास्ता हुआ साफ

Fri, 04 Jan 2019 09:23 AM IST
खुशबू गोयल रमिंद्र सिंह, अमर उजाला, अंबाला कैंट (हरियाणा)
रमिंद्र सिंह, अमर उजाला, अंबाला कैंट (हरियाणा) Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 04 Jan 2019 09:23 AM IST
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Rafael fighter plane's wiill deployment in Ambala airBase
राफेल विमान

चीन और पाकिस्तान की टेंशन बढ़ सकती हैं क्योंकि अंबाला एयरफोर्स स्टेशन में राफेल विमान की तैनाती का रास्ता साफ हो चुका है। देश के सबसे महत्वपूर्ण अंबाला एयरफोर्स स्टेशन में चौथी प्लस पीढ़ी के आधुनिक लड़ाकू विमान राफेल तैनात होंगे। इंडियन एयरफोर्स द्वारा राफेल के आगमन से पहले अंबाला में सन 1997 से तैनात मिग-21 बाइसन श्रेणी के विमानों की नंबर तीन कोबरा स्क्वाड्रन को अंबाला से राजस्थान के नाल एयरबेस में शिफ्ट कर दिया गया है। 

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शिफ्टिंग का कार्य लगभग पूरा हो चुका है और अंबाला के आकाश में मिग-21 विमान उड़ान भरते नहीं दिखेंगे। जल्द ही नए राफेल विमान इनका स्थान लेंगे। उधर, एयरफोर्स ने मिग-21 स्क्वाड्रन के ऑपरेशनल कारणों से शिफ्ट होने की पुष्टि की है। बता दें कि 36 राफेल विमानों की खरीद के बाद इनकी दो स्क्वाड्रन में से एक को अंबाला में तैनात करने की योजना है।  
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स्क्वाड्रन ने दो दशक तक संभाली सुरक्षा की जिम्मेदारी
करीब दो दशक तक अंबाला एयरफोर्स स्टेशन में तैनात रही एयरफोर्स की नंबर तीन कोबरा स्क्वाड्रन ने सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी संभाली। स्क्वाड्रन मिग-21 बाइसन श्रेणी के उन विमानों को इस समय उड़ा रही है, जिनको आगामी एक-दो वर्षों में एयरफोर्स के बेड़े से बाहर कर दिया जाएगा। स्क्वाड्रन ने एयर डिफेंस एवं टोही मिशनों को बखूबी अंजाम दिया। 

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Rafael fighter plane's wiill deployment in Ambala airBase
राफेल विमान (सांकेतिक चित्र)

कारगिल युद्ध एवं ऑपरेशन पराक्रम के दौरान स्क्वाड्रन ने बेहतर एवं उच्च किस्म की सैन्य कुशलता का भी प्रदर्शन किया। मार्च 1997 में आने से पहले स्क्वाड्रन पठानकोट एयरबेस पर 24 वर्षों से तैनात थी। उस समय मिग-21 बिस श्रेणी के विमानों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इसके बाद वर्ष 2002 में अंबाला एयरबेस पर ही स्क्वाड्रन को हिंदुस्तान एरोनॉटिकल लिमिटेड द्वारा अपग्रेड मिग-21 बाइसन श्रेणी के विमान प्रदान किए गए जो कि अब तक उड़ान भर रहे हैं।  
 

जब 73 वर्षीय रक्षा मंत्री फर्नांडिज ने स्क्वाड्रन का मिग-21 उड़ाया  

 मिग श्रेणी विमानों के लगातार हादसों को देखते हुए एक बार तत्कालीन एनडीए सरकार सकते में आ गई थी और इस दौरान मिग-21 विमानों को ‘फ्लाइंग कोफिन’ की संज्ञा दी गई थी। मगर, इस मिथ्य को तोड़ने के लिए अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर तत्कालीन रक्षा मंत्री 73 वर्षीय जार्ज फर्नांडिज पहुंचे। 

एक अगस्त 2003 में बादलों भरे आकाश के बीच उन्होंने कोबरा स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर विंग कमांडर एन हरीश के साथ 25 मिनट तक उड़ान भरी। उड़ान के बाद उन्होंने इन विमान की प्रशंसा की थी। उधर, एयरफोर्स की पहली महिला फाइटर पायलट भावना कांत वर्ष 2018 ने अंबाला एयरफोर्स स्टेशन में कोबरा स्क्वाड्रन के साथ मिग-21 विमान में उड़ान भरी।

राफेल के लिए 227 करोड़ से तैयार हो रहा ढांचा        
लड़ाकू विमान राफेल के लिए अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर 227 करोड़ रुपये की लागत से ढांचा तैयार किया जा रहा है। यहां नए हैंगर, पक्की सड़कें और प्रशिक्षण के लिए सिमुलेटर सहित अन्य ढांचों को उन्नत किया जा रहा है। फ्रांस की एक टीम पहले ही एयरफोर्स स्टेशन पर पहुंचकर इसका मुआयना कर चुकी है। सूत्रों के अनुसार यहां कम से कम 14 नए शेल्टर्स, नए हैंगरों, नए संचालन स्थलों, एक डी-ब्रीफिंग कक्ष और सिमुलेटर प्रशिक्षण का निर्माण किया जाएगा। 

Rafael fighter plane's wiill deployment in Ambala airBase
राफेल

सूत्र बताते हैं कि यहां गोल्डन ऐरोज की नंबर 17 स्क्वाड्रन तैनात होगी जिसको शुरुआती चरण में चार राफेल सितंबर 2019 तक मिलेंगे। 2022 तक इनकी संख्या बढ़कर 18 हो जाएगी। वेस्टर्न एयरकमांड के तहत आने वाला अंबाला एयरफोर्स स्टेशन देश की राजधानी दिल्ली के लिए सुरक्षा की अंतिम दीवार है। 

पाकिस्तानी सीमा से यह केवल 270 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अंबाला में जगुआर लड़ाकू विमानों की अभी दो स्क्वाड्रन हैं जो कि दुश्मन क्षेत्र में दाखिल होकर हमला करने में सक्षम हैं। मगर, राफेल के आने से एयर डिफेंस को और मजबूती मिलेगी। बता दें कि भारत और फ्रांस के बीच 36 राफेल लड़ाकू विमानों के लिए 8.7 अरब डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।  

अंबाला एयरफोर्स स्टेशन से नंबर-3 कोबरा स्क्वाड्रन को राजस्थान के नाल एयरफोर्स स्टेशन पर शिफ्ट किया गया है। एयरफोर्स की ऑपरेशनल गतिविधियों के तहत इसे शिफ्ट किया गया है।  -एआर गिरी, विंग कमांडर, प्रवक्ता एयरफोर्स हेडक्वार्टर।

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