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Chandigarh News: मौसम की हर करवट पर रडार की नजर, खतरे से पहले मिलेगा अलर्ट

Wed, 30 Sep 2026 02:49 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 30 Sep 2026 02:49 AM IST
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Radar keeps a close watch on every shift in the weather; alerts will be issued before danger strikes.
चंडीगढ़। बादलों की स्थिति देखकर बारिश का अनुमान लगाने से आगे अब मौसम विभाग का जोर इस बात पर है कि खराब मौसम और आपदा का खतरा समय रहते पता चल जाए। इससे प्रशासन को तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिलेगा और जरूरत पड़ने पर लोगों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सकेगा। इसी दिशा में पंजाब-हरियाणा में मौसम की निगरानी का नेटवर्क मजबूत किया जा रहा है। चंडीगढ़ मौसम केंद्र के निदेशक सुरेंद्र पॉल के मुताबिक पटियाला में पहले से डॉप्लर मौसम रडार काम कर रहा है। अब अमृतसर के नाग कलां और हिसार में नए सी-बैंड डॉप्लर रडार लगाए जा रहे हैं। ये रडार करीब 300 किलोमीटर तक मौसम प्रणालियों पर नजर रख सकेंगे।
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उन्होंने बताया कि नए रडार से बारिश, आंधी और पश्चिमी विक्षोभ जैसी मौसम प्रणालियों की निगरानी और मजबूत होगी। इसका बड़ा फायदा यह होगा कि मौसम में तेजी से हो रहे बदलाव की जानकारी ज्यादा स्थानीय स्तर पर मिल सकेगी। चंडीगढ़ मौसम केंद्र पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के लिए मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी जारी करता है। पटियाला में मौजूद रडार का इस्तेमाल भारी बारिश और तेज हवाओं के लिए कम समय में स्थान और समय आधारित चेतावनी देने में किया जाता है। नए रडार जुड़ने से क्षेत्र में मौसम की निगरानी का दायरा और आंकड़ों की उपलब्धता बढ़ेगी।
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रडार के साथ दूसरे उपकरण भी बढ़ेंगे
सुरेंद्र पॉल के अनुसार मौसम को बेहतर तरीके से समझने के लिए अलग-अलग तरह के निगरानी उपकरण भी जोड़े जा रहे हैं। रेडियोमीटर जैसे उपकरणों से वातावरण की जानकारी जुटाने में मदद मिलेगी। अलग-अलग स्थानों से मिलने वाले आंकड़ों को मिलाकर मौसम की स्थिति का विश्लेषण करने और चेतावनी व्यवस्था को मजबूत करने पर काम किया जा रहा है। देश में मिशन मौसम के तहत 53 डॉप्लर मौसम रडार, 60 रेडियोसॉन्ड/रेडियोविंड स्टेशन, 100 डिस्ड्रोमीटर, 10 विंड प्रोफाइलर और 25 माइक्रोवेव रेडियोमीटर स्थापित करने की योजना है।
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मोबाइल अलर्ट से आगे, जनता भी देगी मौसम की जानकारी
मौसम विभाग मोबाइल संदेशों के जरिये लोगों को मौसम संबंधी चेतावनी भेज रहा है। अब क्लाउड सोर्सिंग के जरिये आम लोगों से मिलने वाली स्थानीय जानकारी को भी मौसम निगरानी में ज्यादा व्यवस्थित तरीके से शामिल करने पर काम किया जा रहा है। इससे किसी इलाके में अचानक तेज बारिश, आंधी या मौसम में दूसरे बदलाव की स्थानीय सूचना भी समय रहते सिस्टम तक पहुंच सकेगी।

जान और संपत्ति के नुकसान को कम करने में मिलेगी मदद
सुरेंद्र पॉल के मुताबिक लक्ष्य ऐसी अर्ली वार्निंग व्यवस्था को मजबूत करना है, जिसमें केवल मौसम की जानकारी देने के बजाय लोगों और प्रशासन को खतरे से निपटने के लिए पहले से समय मिल सके। इससे जान और संपत्ति के नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है। चंडीगढ़ मौसम केंद्र पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के मौसम की निगरानी करता है। ऐसे में पंजाब और आसपास के क्षेत्रों में रडार व अन्य निगरानी साधन बढ़ने से केंद्र के पास मौसम की बदलती स्थिति को समझने के लिए ज्यादा स्थानीय और विस्तृत आंकड़े उपलब्ध होंगे।
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