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Chandigarh News: बूथों की रिपेयर अधूरी रहते 34.56 लाख के भुगतान की प्रक्रिया पर उठे सवाल
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चंडीगढ़। सेक्टर-26 के छह बूथों के कॉमन पैसेज, छत और बेसमेंट की मरम्मत का कार्य पूरा होने से पहले ही ठेकेदार को 34 लाख 56 हजार रुपये के भुगतान की प्रक्रिया शुरू करने का मामला तूल पकड़ गया है। इस संबंध में शुक्रवार को प्रकाशित खबर के बाद पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी प्रशासक कार्यालय ने चीफ इंजीनियर सी.बी. ओझा से जवाब तलब किया है। वहीं, 39.43 लाख रुपये का कार्य कोटेशन के आधार पर आवंटित किए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार मेंटेनेंस डिवीजन-1 के एसडीओ ने 6 जुलाई को ठेकेदार को 34.56 लाख रुपये का भुगतान करने के लिए अकाउंट्स शाखा को पत्र भेज दिया था। भुगतान सूची पर एसडीओ और ठेकेदार के हस्ताक्षर भी हैं। आरोप है कि नगर निगम के पानी के उपयोग की दो प्रतिशत कटौती भी नहीं की गई। साथ ही नियमानुसार भुगतान का प्रस्ताव एक्सईएन के माध्यम से भेजे जाने के बजाय एसडीओ ने सीधे अकाउंट्स शाखा को भेज दिया। इस मामले में ज्योति इलेक्ट्रिकल कंपनी के प्रोपराइटर एस.के. गुप्ता ने चीफ इंजीनियर से शिकायत कर सीवीसी नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
10 जून को बूथों की मरम्मत का 39.43 लाख रुपये का कार्य मैसर्स इन ऑडनाहक कंस्ट्रक्शन को कोटेशन के आधार पर आवंटित किया गया था। इंजीनियरिंग क्षेत्र के एक तकनीकी विशेषज्ञ ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि इतनी बड़ी राशि का कार्य इमरजेंसी रिपेयर के नाम पर कोटेशन से देना सीपीडब्ल्यूडी मैनुअल-2024 और सीवीसी की गाइडलाइन के विपरीत है। उनका कहना है कि ऐसे कार्य शॉर्ट टेंडर या ई-टेंडरिंग के जरिए कराए जाने चाहिए।
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कोट
चीफ इंजीनियर सी.बी. ओझा ने कहा कि संबंधित भुगतान अभी जारी नहीं हुआ है। उनके अनुसार कोर्ट केस से जुड़े इमरजेंसी कार्य को कोटेशन के आधार पर कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह एस्टेट ऑफिस का काम है और इंजीनियरिंग विभाग केवल कार्यान्वयन एजेंसी है।
जानकारी के अनुसार मेंटेनेंस डिवीजन-1 के एसडीओ ने 6 जुलाई को ठेकेदार को 34.56 लाख रुपये का भुगतान करने के लिए अकाउंट्स शाखा को पत्र भेज दिया था। भुगतान सूची पर एसडीओ और ठेकेदार के हस्ताक्षर भी हैं। आरोप है कि नगर निगम के पानी के उपयोग की दो प्रतिशत कटौती भी नहीं की गई। साथ ही नियमानुसार भुगतान का प्रस्ताव एक्सईएन के माध्यम से भेजे जाने के बजाय एसडीओ ने सीधे अकाउंट्स शाखा को भेज दिया। इस मामले में ज्योति इलेक्ट्रिकल कंपनी के प्रोपराइटर एस.के. गुप्ता ने चीफ इंजीनियर से शिकायत कर सीवीसी नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
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10 जून को बूथों की मरम्मत का 39.43 लाख रुपये का कार्य मैसर्स इन ऑडनाहक कंस्ट्रक्शन को कोटेशन के आधार पर आवंटित किया गया था। इंजीनियरिंग क्षेत्र के एक तकनीकी विशेषज्ञ ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि इतनी बड़ी राशि का कार्य इमरजेंसी रिपेयर के नाम पर कोटेशन से देना सीपीडब्ल्यूडी मैनुअल-2024 और सीवीसी की गाइडलाइन के विपरीत है। उनका कहना है कि ऐसे कार्य शॉर्ट टेंडर या ई-टेंडरिंग के जरिए कराए जाने चाहिए।
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चीफ इंजीनियर सी.बी. ओझा ने कहा कि संबंधित भुगतान अभी जारी नहीं हुआ है। उनके अनुसार कोर्ट केस से जुड़े इमरजेंसी कार्य को कोटेशन के आधार पर कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह एस्टेट ऑफिस का काम है और इंजीनियरिंग विभाग केवल कार्यान्वयन एजेंसी है।