Sidhu Moose Wala: गले की फांस बन सकता है खास शख्सियतों की सुरक्षा घटाने का फैसला, पुलिस की समीक्षा पर उठे सवाल
सिद्धू मूसेवाला की सुरक्षा में पहले 10 गनमैन तैनात थे, जिन्हें बाद में घटाकर चार कर दिया गया और शनिवार को इनमें से भी दो गनमैन और वापस बुला लिए गए। ऐसी ही कटौती कई अन्य सियासी, धार्मिक गुरुओं और पूर्व व वर्तमान पुलिस अधिकारियों के मामले में भी की गई और इन सबसे नाम भी सार्वजनिक कर दिए गए हैं।
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प्रसिद्ध गायक सिद्धू मूसेवाला की सुरक्षा घटाए जाने पर तो सवाल उठ ही रहे हैं, राज्य पुलिस द्वारा समय-समय पर वीआईपी की सुरक्षा की समीक्षा करने के तौर-तरीके पर भी अंगुली उठने लगी है। अब यह फैसला गले की फांस बन सकता है। पंजाब पुलिस ने समीक्षा के आधार पर शनिवार को सिद्धू मूसेवाला समेत 424 गण्यमान्य व्यक्तियों की सुरक्षा में कटौती कर दी थी। इसके तहत मूसेवाला की सुरक्षा में तैनात चार गनमैन में से दो वापस बुला लिए गए थे और अगले ही दिन मूसेवाला की हत्या हो गई। इसके साथ ही यह सवाल भी उठने लगा है कि सुरक्षा घटाने की जानकारी सार्वजनिक क्यों की गई। इससे उन लोगों को खतरा और बढ़ गया है, जिन्हें सुरक्षा प्रदान की गई थी और नई समीक्षा के आधार पर सुरक्षा कवर हटा लिए गए हैं।
पंजाब में आतंकवाद के दौर में गण्यमान्य व्यक्तियों को आतंकियों से खतरे का अवलोकन करते हुए उन्हें सुरक्षा प्रदान करने का चलन तेजी से बढ़ा था। इसके बाद गैंगस्टर और अन्य अपराधियों से मिलने वाली धमकियों के आधार पर भी लोगों को सुरक्षा प्रदान की जाने लगी। उस समय सुरक्षा प्रदान करने का आधार धमकी भरे पत्रों को बनाया जाता था और रिकॉर्डेड फोन कॉल के आधार पर राज्य पुलिस द्वारा प्रभावित लोगों को सुरक्षा प्रदान की जाती है लेकिन विशेष बात यह भी है कि राज्य पुलिस द्वारा प्रदान की गई सुरक्षा की समीक्षा भी की जाती है। इसमें इंटेलिजेंस ब्यूरो, सीआईडी, स्थानीय पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर फैसला लिया जाता है। सिद्धू मूसेवाला की सुरक्षा के मामले में अब विपक्षी दलों की ओर से यही सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर किस रिपोर्ट के आधार पर सुरक्षा घटाने का फैसला लिया गया?
उल्लेखनीय है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार बनने से पहले भी वीआईपी को सुरक्षा प्रदान करने और उसकी समय-समय पर समीक्षा करने की प्रक्रिया जारी रहती थी लेकिन आप सरकार ने सुरक्षा कवर हटाने या सुरक्षाकर्मियों की संख्या कम करने की जानकारी सार्वजनिक करना शुरू कर दिया। अब तक आप सरकार चार बार वीआईपी लोगों की सुरक्षा में कटौती करते हुए एक हजार से ज्यादा गनमैन और वाहन वापस बुला चुकी है।
सिद्धू मूसेवाला की सुरक्षा में पहले 10 गनमैन तैनात थे, जिन्हें बाद में घटाकर चार कर दिया गया और शनिवार को इनमें से भी दो गनमैन और वापस बुला लिए गए। ऐसी ही कटौती कई अन्य सियासी, धार्मिक गुरुओं और पूर्व व वर्तमान पुलिस अधिकारियों के मामले में भी की गई और इन सबसे नाम भी सार्वजनिक कर दिए गए हैं।
घल्लूघारा कार्यक्रम के लिए वापस बुलाए पुलिसकर्मी
सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद भगवंत मान सरकार बैकफुट पर आ गई है। सरकार की ओर से ‘पुलिस समीक्षा’ की प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा जा रहा है कि आगामी घल्लूघारा कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए वीआईपी लोगों की सुरक्षा से कुछ मुलाजिमों को वापस बुलाया गया है ताकि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को सुचारु रखा जा सके। हालांकि विवाद बढ़ता देख राज्य सरकार ने श्री अकाल तख्त के जत्थेदार की घटाई गई सुरक्षा का फैसला रद्द करते हुए उनके सुरक्षा कवर को फिर से पहले की तरह रखने का आदेश दिया है लेकिन जत्थेदार ने अब सुरक्षा लेने से इनकार कर दिया है।