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Hindi News ›   Chandigarh ›   Question of Chandigarh electricity department privatisation reached to Parliament 

चंडीगढ़ : संसद में गूंजा बिजली विभाग के निजीकरण का मुद्दा, चंडीगढ़ प्रशासन ने साधी चुप्पी 

Wed, 24 Mar 2021 11:41 AM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 24 Mar 2021 11:41 AM IST
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Question of Chandigarh electricity department privatisation reached to Parliament 
चंडीगढ़ बिजली विभाग के निजीकरण का मुद्दा पहुंचा संसद। - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

चंडीगढ़ प्रशासन के बिजली विभाग के निजीकरण का मुद्दा अब सिर्फ शहर तक सीमित नहीं रहा बल्कि संसद तक पहुंच गया है। लाभ में चल रहे विभाग को निजी कंपनी को सौंपने के इस फैसले को लेकर संसद में कई सवाल पूछे गए हैं, जो प्रशासन के पास पहुंच गए हैं। प्रशासन को इन सवालों का जवाब देना मुश्किल हो रहा है। 

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संसद में बजट सत्र का दूसरा चरण चल रहा है। इस दौरान किसान प्रदर्शन और निजीकरण का मुद्दा कई सांसदों की ओर से उठाया जा चुका है। इस बीच चंडीगढ़ प्रशासन के पास संसद से एक पत्र आया है, जिसमें चंडीगढ़ बिजली विभाग के निजीकरण से जुड़े कुल 6 सवाल पूछे गए हैं। छह सवालों में निजीकरण के कारण व राजस्व समेत अन्य शामिल है। एक प्रश्न यह भी है कि जब बिजली विभाग लाभ में है, तो क्यों इसका निजीकरण किया जा रहा है। अब प्रशासन के अधिकारी असमंजस में हैं कि उनकी तरफ से क्या जवाब दिया जाए।
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सूत्रों के अनुसार पत्र में इस बात का जिक्र नहीं है कि किस सांसद ने चंडीगढ़ के बिजली विभाग को लेकर संसद में सरकार से सवाल पूछे हैं। हालांकि. यह जरूर कहा गया है कि बजट सत्र के खत्म होने से पहले इन सवालों के जवाब केंद्रीय ऊर्जा मंत्री की ओर से संसद में दिया जाना है, इसलिए जल्द इनके जवाब केंद्र को भेजे जाएं। प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस पत्र की पुष्टि की है। हालांकि, संसद से मामला जुड़ा होने के चलते उन्होंने आधिकारिक तौर पर कुछ बोलने से मना कर दिया।

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ये हैं 6 सवाल...
1. क्या यूटी प्रशासन अपने बिजली विभाग को निजी हाथों में दे रहा है?
2. क्या विभाग लाभ में है? राजस्व की जानकारी दी जाए।
3. पिछले तीन साल में खर्च व कमाई की जानकारी मुहैया कराएं।
4. एग्रीगेट तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान की जानकारी दी जाए।
5. ट्रांसमिशन व डिस्ट्रीब्यूशन लॉस की जानकारी मुहैया कराई जाए।
6. अगर विभाग फायदे में चल रहा है तो इसका निजीकरण क्यों किया जा रहा है? ये भी बताएं।

दौड़ में अडानी समेत सात कंपनियां
बिजली विभाग को खरीदने के लिए जिन सात कंपनियों ने बोली जमा कराई है, उनमें अडानी ट्रांसमिशन लिमिटेड, टाटा पावर, टोरेंट पावर, स्टेरेलाइट पावर, रिन्यू विंड एनर्जी, एमीनेंट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड और एनटीपीसी इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी लिमिटेड हैं। सोमवार को कंपनियों की ओर से जमाई कराई तकनीकी बोली को खोला गया है। अब मूल्यांकन समिति की ओर से आवेदनों की जांच की जाएगी, जिसके बाद वित्तीय बोली खोली जाएगी। इसमें जिसकी बोली सबसे ज्यादा होगी, उसे मंजूरी के लिए प्रशासन केंद्र सरकार के पास भेजेगा।

सरकार की ओर से जिस भी कंपनी को नियुक्त किया जाएगा, उसके पास शहर में बिजली वितरण और रिटेल सप्लाई की जिम्मेदारी होगी। पहले कुल 20 कंपनियों ने बिजली विभाग को खरीदने की इच्छा जताई थी, लेकिन बोली में सिर्फ सात कंपनियां ही शामिल हुई थीं। हालांकि, पिछले कई महीनों से विभाग के कर्मचारियों की ओर से निजीकरण का विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।

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