चंडीगढ़: पुटा चुनाव के लिए प्रशासन से मिली अनुमति, 28 अक्तूबर को मतदान, कोविड गाइडलाइन का करना होगा पालन

अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Sun, 24 Oct 2021 02:18 AM IST

सार

चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी के लिए पुटा चुनाव को प्रशासन से अनुमति मिल गई है। चुनाव के लिए 28 अक्तूबर को मतदान होगा। खास बात यह रहेगी कि कोविड गाइडलाइन का पालन करना होगा। पहले प्रत्याशियों को लग रहा था कि चुनाव नहीं होगा। लेकिन अब अनुमति मिल गई है।
पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस
पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार

पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (पुटा) के चुनाव के लिए चंडीगढ़ प्रशासन से अनुमति मिल गई है। 28 अक्तूबर को मतदान होगा। चुनाव में कोविड गाइडलाइन का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। अनुमति मिलते ही प्रत्याशियों ने प्रचार तेज कर दिया है। पुटा चुनाव के लिए पिछले साल बामुश्किल अनुमति मिली थी। कारण कोरोना बना था। दो से तीन बार चंडीगढ़ प्रशासन को पुटा के चुनाव अधिकारी ने पत्र लिखा था। दो बार तिथियां भी इसकी स्थगित की गई थीं। हालांकि चुनाव हुए थे। इस बार अनुमति के लिए पत्र लिखा गया था। चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से जवाब नहीं मिल पाया था।
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प्रचारकों को लग रहा था कहीं मेहनत खराब न हो जाए
प्रत्याशियों को लग रहा था कि कहीं अनुमति नहीं मिली, तो मेहनत खराब न हो जाए, लेकिन शनिवार को अनुमति मिल गई। मनु ग्रुप ने कहा कि खुली बैठक के प्रस्ताव को मृत्युंजय ग्रुप ने नहीं स्वीकारा। मनु-कश्मीर ग्रुप का कहना है कि खुली बहस के लिए मृत्युंजय ग्रुप को आमंत्रित किया था, लेकिन उन्होंने इस रास्ते को नहीं चुना। कहा कि शिक्षकों के सवालों का जवाब देने के लिए उन्हें आगे आना चाहिए था। ऐसा माना जाता है कि इस तरह की बहस अकादमिक और बौद्धिक भावना को बहाल कर सकती है, जिसे चुनाव और शिक्षक समूह के नेतृत्व में शामिल किया जाना चाहिए।

आपस में ग्रुपों में तनातनी
मगर मृत्युंजय ग्रुप ने चुनौती नहीं स्वीकारी। मृत्युंजय-नौरा ग्रुप का कहना है कि वह अपना संदेश शिक्षकों तक पहुंचा रहे हैं। शिक्षक बखूबी जानते हैं और हम खुद उनसे मिल रहे हैं। अपनी बात पहुंचा रहे हैं। बहस के लिए समय नहीं है, जिनके पास है, वह करें। हमें अपने कार्य में आनंद आ रहा है। शिक्षक समाज हमारे साथ है। हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

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ये उठाए सवाल
  • सातवें वेतनमान हल निकला नहीं और धरना खत्म कर दिया।
  • चार साल से पुटा में होने के बाद भी डेंटल कॉलेज के शिक्षकों की पदोन्नति नीति लागू नहीं करवा पाए।
  • केंद्रीय वित्त पोषण के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए।
  • एफ व जी टाइप के आवासों का आवंटन नहीं हो पाया। इसके लिए कोई प्रयास नहीं किए गए।

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