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ये हाथों से बना देते हैं सौ से ज्यादा जानवरों के शैडो
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 28 Feb 2014 04:12 PM IST
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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन हों या शेक्सपीयर, ड्रिव कोल्बी के हाथों की अंगुलियां जैसे ही चलती हैं वैसे ही परछाइयां जीवंत हो उठती हैं।
चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर में आयोजित इंटरनेशलन पपेट शो के दौरान प्रस्तुति देने आए यूके के ड्रिव कोल्बी सौ से ज्यादा जानवरों और पर्सनेलिटी की शैडो पलक झपकते ही बना डालते हैं।
टैगोर थिएटर में खास बातचीत में ड्रिव ने कहा कि उन्होंने यह कला बचपन में ही सीख ली थी। वह छह साल के थे तो हाथों का उपयोग कर परछाइयां बनाते थे।
पहले अजीब परछाइयां बनती थी, लेकिन धीरे-धीरे जानवरों की परछाई भी पर्दे पर उतारने लगे। भेड़िया, डॉग, चिंपेंजी, पेंग्विन, बंदर आदि के शैडो बना देते हैं।
ड्रिव कोल्बी ने जब वह 20 साल के थे तो यूके में शो शुरू किए। इसके बाद उनके शो का ऐसा रंग जमा कि दुनियाभर से उन्हें इनविटेशन आने लगे। उन्होंने बताया कि अब्राहम लिंकन, शेक्सपीयर, बराक ओबामा की पर्सनेलिटी की शैडो भी उनकी अंगुलियों पर हैं।
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ड्रिव कोल्बी का पपेट शो दो बक्सों में कैद होता है। वह बताते हैं कि स्क्रीन भी उनकी खुद की होती है और प्रोजेक्टर को भी खुद ही चलाते हैं। प्रकृति को चित्रित करने में उनका कोई जवाब नहीं। यूके में उनके सर्कस पेयर, स्माल फैबल्स काफी प्रसिद्ध हैं।
एक्टिंग का कोर्स, विज्ञापन में काम
ड्रिव कोल्बी ने बताया कि यूके से पहले उन्होंने एक्टिंग का कोर्स किया, लेकिन फिल्मों में काम करने की इच्छा नहीं थी। इसलिए इस प्रोफेशन में आ गए। वह यू ट्यूब पर निंटेनडोर, फार्मा कंपनी लोडोट्रा, बीएंडक्यू और ब्रिटिश टीवी के लिए काम कर चुके हैं।
टैगोर में दिखाया पीटर एंड वुल्फ
माउथ आर्गन से निकलती सुरीली आवाज... 60 इंच की व्हाईट स्क्रीन पर उभरते भेड़िये और पीटर की शैडो। यह है यूके के पपेट शो पीटर एंड वूल्फ का सीन। ड्रिव कोल्बी की यह कलाकारी देखने के लिए लंबी लाइन लगी रही।
चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से आयोजित इस पपेट शो में ड्रिव कोल्बी ने 35 मिनट के इस शो में सबको हतप्रभ कर उनका दिल जीत लिया। उन्होंने हाथों की शैडो से सबको दीवाना बना दिया।
इसमें दिखाया गया कि किस तरह से सूर्योदय के संग ही पीटर वांडर्स नामक एक व्यक्ति एडवेंचर की खोज में निकल पड़ता है। वह एक मछली पकड़ता है, लेकिन इससे वह संतुष्ट नहीं होता।
फिर एक शार्क को पकड़ता है। पीटर के दादाजी को मालूम पड़ता है कि वह बिना पूछे घर के बाहर चला गया। वह उसको घर के भीतर भेज देते हैं।
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चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर में आयोजित इंटरनेशलन पपेट शो के दौरान प्रस्तुति देने आए यूके के ड्रिव कोल्बी सौ से ज्यादा जानवरों और पर्सनेलिटी की शैडो पलक झपकते ही बना डालते हैं।
टैगोर थिएटर में खास बातचीत में ड्रिव ने कहा कि उन्होंने यह कला बचपन में ही सीख ली थी। वह छह साल के थे तो हाथों का उपयोग कर परछाइयां बनाते थे।
पहले अजीब परछाइयां बनती थी, लेकिन धीरे-धीरे जानवरों की परछाई भी पर्दे पर उतारने लगे। भेड़िया, डॉग, चिंपेंजी, पेंग्विन, बंदर आदि के शैडो बना देते हैं।
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ड्रिव कोल्बी ने जब वह 20 साल के थे तो यूके में शो शुरू किए। इसके बाद उनके शो का ऐसा रंग जमा कि दुनियाभर से उन्हें इनविटेशन आने लगे। उन्होंने बताया कि अब्राहम लिंकन, शेक्सपीयर, बराक ओबामा की पर्सनेलिटी की शैडो भी उनकी अंगुलियों पर हैं।
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ड्रिव कोल्बी का पपेट शो दो बक्सों में कैद होता है। वह बताते हैं कि स्क्रीन भी उनकी खुद की होती है और प्रोजेक्टर को भी खुद ही चलाते हैं। प्रकृति को चित्रित करने में उनका कोई जवाब नहीं। यूके में उनके सर्कस पेयर, स्माल फैबल्स काफी प्रसिद्ध हैं।
एक्टिंग का कोर्स, विज्ञापन में काम
ड्रिव कोल्बी ने बताया कि यूके से पहले उन्होंने एक्टिंग का कोर्स किया, लेकिन फिल्मों में काम करने की इच्छा नहीं थी। इसलिए इस प्रोफेशन में आ गए। वह यू ट्यूब पर निंटेनडोर, फार्मा कंपनी लोडोट्रा, बीएंडक्यू और ब्रिटिश टीवी के लिए काम कर चुके हैं।
टैगोर में दिखाया पीटर एंड वुल्फ
माउथ आर्गन से निकलती सुरीली आवाज... 60 इंच की व्हाईट स्क्रीन पर उभरते भेड़िये और पीटर की शैडो। यह है यूके के पपेट शो पीटर एंड वूल्फ का सीन। ड्रिव कोल्बी की यह कलाकारी देखने के लिए लंबी लाइन लगी रही।
चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से आयोजित इस पपेट शो में ड्रिव कोल्बी ने 35 मिनट के इस शो में सबको हतप्रभ कर उनका दिल जीत लिया। उन्होंने हाथों की शैडो से सबको दीवाना बना दिया।
इसमें दिखाया गया कि किस तरह से सूर्योदय के संग ही पीटर वांडर्स नामक एक व्यक्ति एडवेंचर की खोज में निकल पड़ता है। वह एक मछली पकड़ता है, लेकिन इससे वह संतुष्ट नहीं होता।
फिर एक शार्क को पकड़ता है। पीटर के दादाजी को मालूम पड़ता है कि वह बिना पूछे घर के बाहर चला गया। वह उसको घर के भीतर भेज देते हैं।