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‘अरबद नरबद धुन्धकारा’ में देखने को मिला दो शैलियों का अनोखा संगम
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 24 Sep 2016 09:15 PM IST
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पंजाब कला भवन में पंजाबी नाटक का मंचन
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब कला भवन चंडीगढ़ में शनिवार को पंजाबी नाटक ‘अरबद नरबद धुन्धकारा’ का मंचन थिएटर फॉर थिएटर के कलाकारों ने किया। अजमेर सिंह औलख के लिखे नाटक का निर्देशन वीना धीर ने किया। नाटक की कहानी छह प्रसिद्ध नायकों फरहाद, मजनू, रांझा, मिर्जा, पुन्नू और इन्द्र बानिया के इर्द-गिर्द घूमती है। ये सभी दोबारा जन्म लेकर आते हैं और अपने हक के लिए लड़ते हैं।
नाटक को दो भागों में दिखाया गया है। पहले भाग में दिखाया गया कि जब सभी नायक आधुनिक युग में इकट्ठे होते हैं और अपने हक की लड़ाई लड़ते हैं, क्योंकि पिछले जन्म में उनमें अपने हक, अपने अधिकारों के प्रति चेतना नहीं होती। इसके चलते वे हाकिमों द्वारा कुचले जाते हैं। लेकिन दूसरे जन्म में सभी नायक मिल कर जालिमों को खत्म कर देते हैं।
वहीं दूसरे भाग में इन नायकों की जरूरतों के बारे में बताया गया और सवाल उठाए गए कि अगर पहले ही सभी नायक अपने हक के लिए लड़े होते तो उन्हें न ही घुट घुटकर, पागल होकर जहर खाकर मरने की जरूरत होती और न ही दोबारा जन्म लेने की। नाटक के छोटा से छोटा संवाद भी बेहद भावपूर्ण और अर्थपूर्ण था।
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इन कलाकारों ने लिया भाग
सभी कलाकारों ने अपने दमदार अभिनय से हर एक किरदार को जीवंत किया। इस नाटक में गुरप्रीत बैंस, अनुराज, नवजीत, नवदीप, भरत, तमन्ना, तान्या, हरप्रीत आदि कलाकार शामिल रहे।
नाटक में दो शैलियों को प्रयोग
अरबद नरबद धुन्धकारा में निर्देशक वीना धीर ने दो शैलियों का प्रयोग किया है। नाटक की शुरुआत में भांड शैली पंजाबी फोक थिएटर से ली गई। इसके साथ ही आज की एक्सपेरिमेंटल शैली का प्रयोग किया गया। इसके तहत अलग-अलग युगों, अलग समय को मंच पर दर्शाया गया।
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नाटक को दो भागों में दिखाया गया है। पहले भाग में दिखाया गया कि जब सभी नायक आधुनिक युग में इकट्ठे होते हैं और अपने हक की लड़ाई लड़ते हैं, क्योंकि पिछले जन्म में उनमें अपने हक, अपने अधिकारों के प्रति चेतना नहीं होती। इसके चलते वे हाकिमों द्वारा कुचले जाते हैं। लेकिन दूसरे जन्म में सभी नायक मिल कर जालिमों को खत्म कर देते हैं।
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वहीं दूसरे भाग में इन नायकों की जरूरतों के बारे में बताया गया और सवाल उठाए गए कि अगर पहले ही सभी नायक अपने हक के लिए लड़े होते तो उन्हें न ही घुट घुटकर, पागल होकर जहर खाकर मरने की जरूरत होती और न ही दोबारा जन्म लेने की। नाटक के छोटा से छोटा संवाद भी बेहद भावपूर्ण और अर्थपूर्ण था।
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इन कलाकारों ने लिया भाग
सभी कलाकारों ने अपने दमदार अभिनय से हर एक किरदार को जीवंत किया। इस नाटक में गुरप्रीत बैंस, अनुराज, नवजीत, नवदीप, भरत, तमन्ना, तान्या, हरप्रीत आदि कलाकार शामिल रहे।
नाटक में दो शैलियों को प्रयोग
अरबद नरबद धुन्धकारा में निर्देशक वीना धीर ने दो शैलियों का प्रयोग किया है। नाटक की शुरुआत में भांड शैली पंजाबी फोक थिएटर से ली गई। इसके साथ ही आज की एक्सपेरिमेंटल शैली का प्रयोग किया गया। इसके तहत अलग-अलग युगों, अलग समय को मंच पर दर्शाया गया।