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पंजाब का दर्द बयां करेगी ‘47 टू 84’
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 02 Nov 2013 12:25 PM IST
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पाकिस्तान की सुखमणि सिर्फ नौ साल की थी जब भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हुआ था। बंटवारे से लेकर 1984 तक के दंगों को अपनी आंखों से देखा और एक किताब भी लिखी।
इसी किताब की कहानी है फिल्म ‘47 टू 84’। यह फिल्म शेमारू फिल्म्स की होम प्रोडक्शन होगी और पंजाबी और अंग्रेजी भाषा का मिश्रण। सेक्टर-17 के होटल शिवालिक व्यू में फिल्म का पोस्टर लांच हुआ।
फिल्म को डायरेक्ट कर रहे हैं राजीव शर्मा। उन्होंने हाल ही में पंजाबी फिल्म ‘नाबर’ बनाई और नेशनल अवार्ड जीता। इस मौके पर उनके साथ फिल्म के प्रोड्यूसर बबली सिंह भी मौजूद रहे।
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फिल्म की कहानी लाली गिल ने लिखी है। स्क्रीन प्ले और डायलॉग लाली गिल और रवि शर्मा ने लिखे हैं। डायरेक्टर राजीव ने बताया कि वे फिल्म में सभी नए चेहरे लेंगे।
फिल्म का बजट ढाई करोड़ रुपये है। शूटिंग के लिए मलेर कोटला, नाभा, चंडीगढ़, दिल्ली और आसपास के इलाकों को चुना गया है। प्रोड्यूसर बबली सिंह ने कहा कि 1947 और 1984 के हालात पर्दे पर दिखाना आसान नहीं होगा।
स्क्रिप्ट, कास्टिंग, शूटिंग, मार्केटिंग सब कुछ चैलेंज से भरा है। फिल्म अगले साल फरवरी में रिलीज की जाएगी।
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इसी किताब की कहानी है फिल्म ‘47 टू 84’। यह फिल्म शेमारू फिल्म्स की होम प्रोडक्शन होगी और पंजाबी और अंग्रेजी भाषा का मिश्रण। सेक्टर-17 के होटल शिवालिक व्यू में फिल्म का पोस्टर लांच हुआ।
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फिल्म को डायरेक्ट कर रहे हैं राजीव शर्मा। उन्होंने हाल ही में पंजाबी फिल्म ‘नाबर’ बनाई और नेशनल अवार्ड जीता। इस मौके पर उनके साथ फिल्म के प्रोड्यूसर बबली सिंह भी मौजूद रहे।
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फिल्म की कहानी लाली गिल ने लिखी है। स्क्रीन प्ले और डायलॉग लाली गिल और रवि शर्मा ने लिखे हैं। डायरेक्टर राजीव ने बताया कि वे फिल्म में सभी नए चेहरे लेंगे।
फिल्म का बजट ढाई करोड़ रुपये है। शूटिंग के लिए मलेर कोटला, नाभा, चंडीगढ़, दिल्ली और आसपास के इलाकों को चुना गया है। प्रोड्यूसर बबली सिंह ने कहा कि 1947 और 1984 के हालात पर्दे पर दिखाना आसान नहीं होगा।
स्क्रिप्ट, कास्टिंग, शूटिंग, मार्केटिंग सब कुछ चैलेंज से भरा है। फिल्म अगले साल फरवरी में रिलीज की जाएगी।