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Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjabi folk singer Dolly Guleria Interview on The Nightingale of Punjab Surinder Kaur

90वीं सालगिरह पर पंजाब 'कोकिला' सुरिंद्र कौर की कहानी, बेटी डॉली गुलेरिया की जुबानी, पढ़ें...

Wed, 20 Nov 2019 12:12 PM IST
खुशबू गोयल रूबी सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रूबी सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 20 Nov 2019 12:12 PM IST
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Punjabi folk singer Dolly Guleria Interview on The Nightingale of Punjab Surinder Kaur
डॉली गुलेरिया - फोटो : अमर उजाला
उनके संगीत की धुन, उनका घुंघरू हो या उनके हाथ का बना सरसों का साग, या फिर तंदूर में बना लजीज नान। मां की हर बात निराली थी। सुबह चार बजे उठकर वे पाठ किया करती थीं। हम तीनों बहनों के लिए मां हमारी जिंदगी की पहली गुरू थीं। उन्होंने हमें गृहस्थी से लेकर जिंदगी के कई अहम पहलुओं के मूलमंत्र दिए।
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मां के लिए हार-जीत कभी मायने नहीं रखती थी। वो तो हमेशा दिल की बातें करती थीं। उनके गीतों ने तो रिश्तों को पिरोया है। उनका शेड्यूल बहुत व्यस्त था। पंजाब के अलावा दुनिया भर में वे परफार्मेंस करती थीं। दुनियाभर में उन्होंने फैंस बनाए। आज मैं खुद 70 साल की हो गई हूं। प्रशंसक मुझे डॉली नहीं, मां की परछाई के रूप में ही देखते हैं।
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कितनी ही बार स्टेज पर मैं यह कमेंट सुन चुकी हूं कि ‘आप ही हमारी सुरिंद्र कौर हो। ये शब्द शहद की तरह मेरी रूह में उतर जाते हैं। मेरे लिए वह सब कुछ थीं। मां, सहेली औैर गुरू भी। मेरे आंगन का जर्रा जर्रा मां की यादों को समेटे हुए है।
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लाहौर में 25 नवंबर 1929 को पंजाब कोकिला सुरिंद्र कौर का जन्म हुआ था। 25 नवंबर को उनकी 90 सालगिरह मनाई जा रही है। इस खास आयोजन को हमारा परिवार दुनिया भर में बसे उनके फैंस के साथ सेलिब्रेट करेंगे। 25 नवंबर को शाम छह बजे पंजाब कला भवन सेक्टर-16 में उनकी याद पर एक लाइव शो कर रही हूं, जिसमें अपनी बेटी एवं नातिन के साथ मंच पर परफॉर्म करूंगी।

पनी मां के गीतों से ही यह शाम सजाऊंगी। कार्यक्रम पंजाब आर्ट काउंसिल के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इस मौके पर मां पर तैयार की गई डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई जाएगी, जिसमें उनकी जिंदगी के तमाम रंग होंगे। इसकी तैयारी पूरी हो चुकी है।

जब पंजाब की स्वर कोकिला ने चीन की सरहद पर छेड़ी थी तान

बात 1953 की है। मां को पंडित जवाहर लाल नेहरू का फोन आया। उन्होंने गुजारिश की कि आपको चीन की सरहद एक लाइव परफार्मेंस देनी है। एक प्रतिनिधिमंडल के साथ उन्हें जाना था। नेहरू जी चाहते थे कि अपने गीत के जरिये वह हिंदी चीनी भाई भाई के संदेश को मजबूती दें। मां पहली ऐसी भारतीय लोक गायिका थीं, जिन्होंने चीन की सरहद पर ‘हिंदी चीनी भाई भाई’ का नारा मंच पर लगाया था। लेकिन असली चुनौती इसके बाद आई। जब चीन युद्ध से देश उबर रहा था।

1964 में नेहरू जी ने लेह-लद्दाख में डटे जवानों का हौसला बढ़ाने के लिए देश भक्ति गीत गाने की फरमाइश की। मां नर्वस हो गईं। उन्होंने लोक गीत तो खूब गाए थे लेकिन कभी देशभक्ति गीत नहीं गाया था। यही उनकी परेशानी का कारण था। ऐसे समय में मेरे पिता जी ने उनकी परेशानी को दूर किया और कहा कि जैसा प्रधानमंत्री जी चाहते हैं, तुम्हें करना चाहिए। पिता जी ने रातोंरात गीत लिखा और मां ने वही गीत जवानों का हौसला बढ़ाने के लिए गाया।

बोल कुछ यूं थे- ‘साथी हो, साथी हो, चला चल, होर अगाहां, न पासां मोड़ पीछावां’ इसका अर्थ था कि जो कुछ हुआ है, उसे भूलकर आगे बढ़ने का समय है। यह मुसीबतें आपके हौसलों को डिगा नहीं सकतीं। पंडित नेहरू समेत फौज के जवानों को यह गीत खूब पसंद आया। उनके जीवन की यह बड़ी उपलब्धि थी। मां इसका जिक्र हमेशा हमसे किया करती थीं।

13 साल की उम्र में मां के साथ दी थी लाइव परफार्मेंस

संगीत के प्रति मां में गजब की दीवानगी थी। कोई भी सुर कम लगता तो सबके सामने डांटने लगतीं। एकदम पेशेवर थीं। मंच पर मुझमें या दूसरे कलाकारों में कोई भेद नहीं करती थीं। मैं 13 साल की थी जब पहली बार उनके साथ मंच पर लाइव परफार्मेंस दी थी। मैं बहुत नर्वस थी। उन्होंने हौसला बढ़ाया। यह 1962 में पहले चंडीगढ़ और फिर दिल्ली में पहली बार उनके साथ मंच शेयर किया था। इसके बाद तो न जाने कितनी ही बार उनके साथ गीत गाए लेकिन पहला अनुभव शब्दों में बयां करना मुश्किल है।

डाक्यूमेंट्री में मां की जिंदगी का हर लम्हा...
अपने सुरीले गीतों के कारण मां की पहचान पंजाब कोकिला के नाम से होने लगी थी। मां ने लाहौर से लेकर अमेरिका, कनाडा, लंदन समेत कई देशों में लाइव परफार्मेंस दीं और लोगों के दिलों में जगह बनाई। हमने एक डॉक्यूमेंट्री तैयार की है, जिसमें उनकी जिंदगी के तमाम रंगों को पिरोया है। इसमें लाहौर का वह घर भी दिखेगा, जिसमें उनका जन्म हुआ था। इसकी जानकारी हमने सोशल मीडिया के जरिये उनके फैंस को भी दी थी। 25 नवंबर को यह डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शित की जाएगी।

फैंस की शादी पर जरूर जाती थीं...
मां अपने फैंस के बेहद करीब रहती थीं। यदि कोई फैंस उन्हें अपनी शादी में निमंत्रण देता तो वह समय निकालकर जरूर जाती थीं। उन्हें खाना बनाने का भी बहुत शौक था। उनके हाथों से बने खाने का स्वाद फिर कभी नहीं मिला।

मेरे हाथ का केक पसंद था..
मां को मेरे हाथ का बना केक बहुत पसंद था। वह घर का खाना ही खाती थीं। मेरी बेटी की शादी में वह खुद तंदूर से नान बनाने लगी थीं।

मुझे गर्व है कि मैं उनकी बेटी हूं
मैंने अभी तक 48 एलबम निकाली हैं। एक सफल कैरियर है। लेकिन जब स्टेज पर आती हूं तो लोग मुझे मां के गीतों की फरमाइश करते हैं तो उत्साह दोगुना हो जाता है। मां ने मुझे सिखाया था, जितना हो सके लोगों के दिलों में जगह बनाना। बस इस मंत्र पर आज तक चल रही हूं।
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