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Chandigarh News: पंजाबी लोक नृत्य कार्यशाला शुरू, 10 जून तक लेंगे प्रतिभागी प्रशिक्षण
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चंडीगढ़। सेक्टर-38 के रानी लक्ष्मी बाई महिला भवन में पंजाबी लोक नृत्य कार्यशाला शुरू हो गया है। गुरप्रीत प्लाहा कार्यशाला में प्रशिक्षण दे रहे हैं। यह कार्यशाला चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी की ओर से हो रहा है। यह 10 जून तक चलेगा। इसके समापन पर कार्यशाला में शामिल प्रतिभागी अपनी प्रस्तुति भी देंगे।
गुरप्रीत प्लाहा ने बताया कि सौ लोगों ने इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। इसमें सात वर्ष से लेकर बड़ी उम्र तक के महिला-पुरुष शामिल हैं। कार्यशाला में डंडास और शमी नृत्य सिखाया जा रहा है। डंडास नृत्य गुजरात की डांडिया की तरह है। यह नृत्य महिला और पुरुष दोनों करते हैं।
महिलाओं के लिए शमी नृत्य
प्लाहा ने बताया कि शमी नृत्य महिलाओं के लिए है। इस नृत्य में महिलाएं अपने पति को याद करती हैं। उनके साथी जो बाहर काम के लिए गए हैं, उनसे अलग होने की कहानी गीत के माध्यम से नृत्य करते हुए सखियों को बताती है। यह नृत्य सास-ससुर के सामने नहीं होता था। अपने साथी की अच्छाइयां, उनके साथ गुजारे पल को गीत के माध्यम से नृत्य के जरिए बताती है। यह प्राचीन सभ्यता है। प्लाहा ने कहा कि अभी कुछ दिन इन नृत्यों की बेसिक के बारे में जानकारी दी जा रही है। यह कि पैरों को किस प्रकार आगे बढ़ाना है। कंधा का मूवमेंट और होठों से आवाज की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसमें मुस्कुराहट बहुत जरूरी है।
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गुरप्रीत प्लाहा ने बताया कि सौ लोगों ने इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। इसमें सात वर्ष से लेकर बड़ी उम्र तक के महिला-पुरुष शामिल हैं। कार्यशाला में डंडास और शमी नृत्य सिखाया जा रहा है। डंडास नृत्य गुजरात की डांडिया की तरह है। यह नृत्य महिला और पुरुष दोनों करते हैं।
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महिलाओं के लिए शमी नृत्य
प्लाहा ने बताया कि शमी नृत्य महिलाओं के लिए है। इस नृत्य में महिलाएं अपने पति को याद करती हैं। उनके साथी जो बाहर काम के लिए गए हैं, उनसे अलग होने की कहानी गीत के माध्यम से नृत्य करते हुए सखियों को बताती है। यह नृत्य सास-ससुर के सामने नहीं होता था। अपने साथी की अच्छाइयां, उनके साथ गुजारे पल को गीत के माध्यम से नृत्य के जरिए बताती है। यह प्राचीन सभ्यता है। प्लाहा ने कहा कि अभी कुछ दिन इन नृत्यों की बेसिक के बारे में जानकारी दी जा रही है। यह कि पैरों को किस प्रकार आगे बढ़ाना है। कंधा का मूवमेंट और होठों से आवाज की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसमें मुस्कुराहट बहुत जरूरी है।
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