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मनोरंजन जगत पर संकट: पंजाबी सिनेमा से जुड़े कलाकारों की मांग, हमारे लिए भी पॉलिसी बनाए सरकार 

Wed, 07 Jul 2021 10:18 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 07 Jul 2021 10:18 AM IST
सार

लॉकडाउन के कारण थिएटर आदि बंद है। इससे कलाकारों पर आर्थिक संकट आ गया है। शो आदि न होने से उनकी आय तो बंद है ही ऊपर से सरकार से भी उन्हें कोई मदद नहीं मिल रही। इससे कलाकार हताश हैं।

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Punjabi Cinema Artists Demand Government to Make Policy for them
कोरोना के कारण बंद हैं थिएटर। - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

पंजाबी सिनेमा ने कुछ सालों में अपने बलबूते मनोरंजन क्षेत्र में काफी आयाम हासिल किए हैं। सरकार की तरफ से कभी कोई मदद नहीं मिली। महामारी में कलाकारों ने जो संकट झेला है, उसे देखते हुए हम पंजाब सरकार से कलाकारों के लिए पॉलिसी बनाने पर चर्चा कर रहे हैं। उम्मीद है कुछ कामयाबी जरूर मिलेगी। यह कहना है नॉर्थ जोन फिल्म और टीवी आर्टिस्ट एसोसिएशन के महासचिव मलकीत रौनी का। उन्होंने कहा, डेढ़ साल में महामारी के कारण लगे लॉकडाउन ने कला जगत से जुडे़ कलाकारों की कमर तोड़ दी है।

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इस मुश्किल समय में एसोसिएशन ने कलाकारों, स्पॉट ब्वाय, बैकस्टेज कर्मियों को राशन के पैकेट और जरूरत की दवाइयां मुहैया कराईं। इसमें वरिष्ठ कलाकारों ने भी काफी मदद की। वरिष्ठ कलाकारों से राय के बाद एसोसिएशन ने पंजाब के सांस्कृतिक मंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिह से भी बात की। सांस्कृतिक मंत्रालय से जवाब मिला कि पॉलिसी के लिए ड्राफ्ट तैयार करके भेजें। इसके बाद हमने जो ड्राफ्ट तैयार किया है, उसमें महामारी जैसे समय के लिए कलाकारों की आर्थिक सहायता, पेंशन स्कीम, सेहत बीमा आदि को शामिल किया है।
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इसके अलावा वर्ष में एक बार सिनेमा फेस्टिवल आयोजित किए जाने की बात भी शामिल की गई है। इसमें सरकार की ओर से अदाकारों के अलावा मनोरंजन जगत से जुड़े लोगों को उनके काम के लिए सम्मानित किया जाए ताकि उनकी हौसला अफजाई हो सके। बकौल रौनी, पंजाबी फिल्म उद्योग आज जिस मुकाम पर है, वहां तक पहुंचने के लिए लंबा संघर्ष छिपा है। आज पंजाबी कलाकारों की पूरी दुनिया में पहुंच है। हमें इसे और ऊंचाइयों पर लेकर जाना है।

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अब तो सिर्फ खर्चा ही हो रहा, कमाई कुछ नहीं

कलाकारों ने मिलकर प्रशासन के संस्कृति विभाग, सांस्कृतिक मंत्रालय तक अपनी परेशानियों को पहुंचाया है, लेकिन हमें एक ही जवाब मिल रहा है कि बिना परफॉर्मेंस के किसी भी तरह की आर्थिक मदद का कोई प्रावधान नहीं है। मैं 30 साल से रंगमंच से जुड़ा हूं। शुरुआत में हालात ठीक थे, लेकिन अब हमें भी आर्थिक तंगी आने लगी है। सिर्फ खर्च हो रहा है, कमाई नहीं है। - डॉ. साहब सिंह, वरिष्ठ रंगकर्मी

अभिनय के साथ दूसरे काम भी करें कलाकार
मैं पिछले 25-30 वर्ष से रंगमंच से जुड़ा हूं। इसलिए हमें हकीकत का अंदाजा है। कभी भी किसी भी सरकार की तरफ से कला से जुड़े लोगों को कोई आर्थिक सहायता नहीं दी गई है। हमारे पास जो भी थिएटर सीखने आता है और उसे सलाह दी जाती है कि नाटक के साथ कुछ और भी करो। -शब्दीश, वरिष्ठ रंगकर्मी

पॉलिसी की मांग उठी, नहीं मिला सकारात्मक जवाब
कोरोना महामारी के समय में आर्थिक संकट में कलाकारों ने मिलकर ही एक-दूसरे की मदद की है। कलाकारों ने मिलकर कला से जुड़े लोगों के लिए पॉलिसी बनाने की भी मांग रखी थी, लेकिन सरकार और विभागों की तरफ से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है, इसलिए सबको यही सलाह है कि थिएटर के साथ अन्य काम भी जरूर करें। -संजीवन सिंह, वरिष्ठ रंगकर्मी

सरकार को मनोरंजन के समय ही याद आते हैं कलाकार
रंगमंच और पंजाबी फिल्मों से जुड़े छोटे और बड़े सभी कलाकारों के हालात महामारी में खराब हो गए हैं। सरकार को मनोरंजन के समय ही कलाकार और फिल्में याद आती है। हम लोगों की तरफ से कई बार अपनी मांगें रखी गई हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिलता। जब शराब के ठेके खुल रहे हैं तो सिनेमा हॉल और थिएटर भी खुलने चाहिए। फिल्मों से भी सरकार को टैक्स मिलता है, लेकिन आर्थिक सहायता के समय मौन है। -गुरप्रीत भंगू, अदाकारा और वरिष्ठ रंगकर्मी

महामारी के समय खुद ही की एक-दूसरे की मदद  
कोरोना महामारी के समय में कलाकारों ने ही एक-दूसरे की मदद की है। थिएटर बंद होने पर कुछ कलाकार अपने पैतृक घर भी लौट गए हैं। हमने चंडीगढ़ प्रशासन के सामने भी कई बार अपनी मांग रखी, पर सकारात्मक जवाब नहीं मिला। कलाकार किसी के आगे हाथ नहीं फैला सकता, इसलिए उनका काम फिर से शुरू कराया जाना चाहिए। हमारी समस्या को जायज समझते हुए अब चंडीगढ़ प्रशासन को तुरंत थिएटर खोल देने चाहिए। -सुदेश शर्मा, टीएफटी, अध्यक्ष
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