फैसला: पंजाब में अब नहीं होंगे ग्रामीण चिकित्सा अधिकारी, सरकार ने आधिकारिक तौर पर डाइंग कैडर किया घोषित
स्वास्थ्य विभाग में ग्रामीण चिकित्सा अधिकारियों के लिए पदोन्नति नियम नहीं हैं। ऐसे में तैनात चिकित्सकों ने इस्तीफा देना शुरू कर दिया है।
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पंजाब में अब ग्रामीण चिकित्सा अधिकारी (आरएमओ) नहीं होंगे। सरकार ने आरएमओ को आधिकारिक तौर पर डाइंग कैडर में घोषित कर दिया है। सूबे की ग्रामीण सुविधाओं को बेहतर करने के लिए सरकार ने 1186 औषधालय खोले थे, लेकिन पदोन्नति नियम न होने के कारण अब तक 626 आरएमओ इस्तीफा दे चुके हैं।
स्थिति यह है कि राज्य सरकार पिछले कई वर्षों से लगातार ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं से अपने हाथ पीछे खींच रही है। पूर्व में ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए सरकार ने ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग को 1186 औषधालय दिए थे। इनमें सरकार की ओर से ग्रामीण चिकित्सा अधिकारियों की तैनाती की। लेकिन स्वास्थ्य विभाग में इनके लिए पदोन्नति नियम नहीं होने के कारण यहां तैनात चिकित्सकों ने इस्तीफा देना शुरू कर दिया। सरकार भी इन खाली पदों को नहीं भर पाई। नतीजा यह हुआ है कि अब विभाग में सिर्फ 560 चिकित्सक ही बचे हैं। सरकार ने इन पदों को भरने के बजाय हाल ही में ग्रामीण चिकित्सा अधिकारियों को डाइंग कैडर में घोषित कर दिया है।
कोरोना: गांवों में हुई ज्यादा मौतें
कोरोना की पहली और दूसरी लहर में ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे अधिक मृत्यु दर थी। शहरों के मुकाबले गांवों में 60 प्रतिशत अधिक संक्रमितों की मौत हुई हैं। इसके बाद भी सरकार गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं के बढ़ाने के बजाय उन्हें कम कर रही है। ग्रामीण चिकित्सा अधिकारी संघ के अध्यक्ष डॉ. दीपेंदर भसीन ने कहा कि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा को खत्म करने के बजाय, सरकार को और चिकित्सकों की प्रतिनियुक्ति करनी चाहिए। साथ ही रिक्त पद भरने चाहिए।
सरकार लगातार गांव में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने का प्रयास कर रही है। सरकार के इस फैसले के बाद अब जो भी पद रिक्त होगा उसे स्वास्थ्य विभाग में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। -संजीव गर्ग, ग्रामीण विकास उप निदेशक, पंजाब