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पंजाब का पानी बना जहर, लैंब जांच में सनसनीखेज खुलासा

Tue, 23 Jun 2015 10:39 AM IST
सुशील कुमार/अमर उजाला, सुनाम (संगरूर)
सुशील कुमार/अमर उजाला, सुनाम (संगरूर) Updated Tue, 23 Jun 2015 10:39 AM IST
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punjab water polluted, horrible exposure in lab test report

सोना उगलने वाले पंजाब के मालवा की धरती के पानी को खतरनाक और विषैली धातुएं अपने आगोश में लेने लगी हैं। केंद्र सरकार द्वारा लिए पानी के नमूनों की जांच रिपोर्ट चौंकाने वाली है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मालवा के कई जिलों के ग्रामीण इलाकों का पानी जहर बनने लगा है।

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पानी में कई खतरनाक तत्वों की मात्रा, अधिकतम स्वीकार्य सीमा (मैक्सिमम परमिसिबल लिमिट) से कई गुणा अधिक पाई गई है। इन तत्वों की अधिक मात्रा कई गंभीर बीमारियों को दावत दे सकती है। केंद्र सरकार के वाटर सप्लाई और सेनिटेशन मंत्रालय ने राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना के तहत एक अप्रैल 2014 से 31 मार्च 2015 तक सभी जिलों के गांवों में पानी के नमूने लिए।
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इसकी रिपोर्ट हैरत में डालने वाली है। संगरूर, बरनाला, पटियाला, फतेहगढ़ साहिब आदि जिलों के गांवों से लिए नमूनों में हैवी मैटल्स और अन्य खतरनाक तत्वों की मात्रा बहुत ज्यादा पाई गई है। माना जा रहा है कि खेती के दौरान अत्यधिक खादों और कीटनाशकों के प्रयोग के चलते ऐसे हालात बने हैं। इसके अलावा गहरे तालाब और कुएं भी भूजल को दूषित कर रहे हैं।
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संगरूर के अनदाना, भवानीगढ़, धूरी, लहरागागा, सुनाम, मालेरकोटला ब्लॉक के गांवों के पानी में यूरेनियम, फ्लोराइड, नाइट्रेट, एल्युमीनियम, यूरेनियम और आर्सेनिक ज्यादा मात्रा में पाए गए हैं। सुनाम के गांव रत्तोके के पानी में यूरेनियम की मात्रा 230 मिलीग्राम प्रति लीटर और गांव सिंगपुरा के पानी में 204 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई है।

बरनाला के गांव दानगढ़, सेखां, विधाते में एल्युमीनियम और लैड, गांव अतरसिंह वाला और लोहगढ़ मौड़ में यूरेनियम पाया गया है। पटियाला के गांव मुंडखेड़ा, दयोगढ़, बख्शीवाला, बिशनगढ़, बिंजल, फरीदपुर, भूरे माजरा, छपराहर में एल्युमीनियम, सल्फेट और लैड की मात्रा कई गुणा ज्यादा मिली है।

हैवी मैटल्स को आरओ से किया जा सकता है दूर

punjab water polluted, horrible exposure in lab test report

पंजाब वाटर सप्लाई और सेनिटेशन के चीफ इंजीनियर बीएस भट्टी ने कहा कि हैवी मैटल्स की अत्यधिक मात्रा को आरओ सिस्टम से रिमूव किया जा सकता है। जिन गांवों के पानी के नमूनों की जांच रिपोर्ट में हैवी मैटल्स की मात्रा ज्यादा पाई गई है वहां आरओ सिस्टम लगाए जा रहे हैं।

पंजाब ने केंद्र सरकार को आरओ प्रोजेक्ट तैयार करके भेजा है। मंजूरी मिलते ही आरओ सिस्टम स्थापित किए जाएंगे। वहीं आरटीआई कार्यकर्ता जतिंदर जैन ने कहा कि वाटर सप्लाई और सेनिटेशन विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी व सेहत विभाग के डायरेक्टर से जानकारी ली जा रही है कि इस दिशा में क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

पानी में फ्लोराइड की मात्रा चार गुना अधिक
पानी में आर्सेनिक की अधिकतम स्वीकार्य सीमा .01 एमजी प्रति लीटर, फ्लोराइड 1 से 1.50, लैड .05 पीपीएम, एल्युमीनियम .05 और नाइट्रेट 10 से 50 एमजी है। नमूनों की जांच में आर्सेनिक .06, फ्लोराइड 4 से भी ज्यादा और एल्युमीनियम .33 पाए गए हैं।
मालवा के कई गांवों के पानी में बहुत ज्यादा मिली खतरनाक तत्वों की मात्रा

यूरेनियम, आर्सेनिक, एल्युमीनियम, नाइट्रेट, लैड की मात्रा तय सीमा से ज्यादा
पिछले वित्तीय वर्ष में 1800 आरओ सिस्टम प्रभावित गांवों में लगाए गए हैं। अगले दो साल में पंजाब के हर घर में स्वच्छ पानी और टायलेट बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। दोनों कार्यों पर करीब चार हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा अन्य वैकल्पिक सुविधा (नहरी पानी को साफ करके) प्रभावित गांवों को दी जाएगी।
- सुरजीत सिंह रखड़ा, जल सप्लाई मंत्री, पंजाब

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