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पंजाब यूनिवर्सिटी में 'पुटा' चुनाव, तीसरी बार प्रो. राजेश गिल बनीं अध्यक्ष, जयंती दत्ता से थी टक्कर

Wed, 21 Aug 2019 09:29 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 21 Aug 2019 09:29 AM IST
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Punjab University Teachers Association, PUTA Elections 2019
पुटा चुनाव में प्रो. राजेश गिल ग्रुप का तीसरी बार दबदबा - फोटो : अमर उजाला
पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (पुटा) के चुनाव में तीसरी बार भी प्रो. राजेश गिल ग्रुप का कब्जा रहा। प्रमुख पदों पर सभी उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। प्रो. राजेश गिल अध्यक्ष, मृत्युंजय कुमार उपाध्यक्ष, प्रो. जेके गोस्वामी सचिव, सुपिंदर कौर ज्वाइंट सेक्रेटरी और अमनदीप सिंह ट्रेजरर बने। बुधवार की सुबह साढ़े आठ बजे से पुटा का चुनाव लॉ ऑडिटोरियम में शुरू हुआ।
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दोपहर डेढ़ बजे तक चुनाव चला। 589 लोगों ने वोट डाला। अलग-अलग पदों के इनवेलिड वोट देंगे तो उनकी संख्या भी 200 पहुंच गई। इस दौरान राजनीतिक माहौल गर्म रहा। उम्मीदवार अपने-अपने पक्ष में वोट मांग रहे थे। ठीक ढाई बजे वोटों की गिनती शुरू हुई। एक घंटे बाद ही सामने बैठे उम्मीदवारों को गिनती का रुझान समझ आने लगा। वह खुशी की मुद्रा में थे।
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फाइनल परिणाम पांच बजे आया। उसमें प्रो. राजेश गिल ग्रुप को जीत हासिल हुई। प्रो. गिल ग्रुप ने तीसरी बार यह चुनाव लड़ा था। मालूम हो कि शिक्षकों का समुदाय पढ़ा-लिखा होता है, लेकिन बड़ी संख्या में वोट इनवैलिड होने से सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारों का कहना है कि जो शिक्षक किसी को वोट नहीं देना चाहते हैं, वे निशान गलत जगह लगा देते हैं और वोट इनवैलिड हो जाता है।
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ऐसे मिले वोट

प्रेसिडेंट
प्रो. राजेश गिल   : 323
डॉ. जयंती दत्ता   : 248
इनवैलिड         : 18

उपाध्यक्ष
मृत्युंजय कुमार   : 355
सुखबीर कौर     : 212
इनवैलिड         :   22

सचिव
जेके गोस्वामी    : 360
अशोक कुमार    : 212
इनवैलिड         : 17

ज्वाइंट सेक्रेटरी
सुपिंदर कौर      : 305
शिवानी शर्मा     : 256
इनवैलिड         :   28

ट्रेजरर
अमनदीप सिंह    : 311
नरेश कुमार        : 254
इनवैलिड          :   24

ग्रुप वन
सुमन              : 359
नवरीत कौर        : 317
नितिन अरोड़ा      : 312
उपनीत कौर        :  285

ग्रुप टू
गुलदीप सिंह      : 325
विजेता  चड्डा    : 298
अमरजीत सिंह    : 286
सर्वनरिंदर कौर       : 273

ग्रुप थ्री
अमृतपाल कौर    :  311
अनिल कुमार      :  310
जगत सिंह         : 275
नीरज अग्रवाल     : 266

ग्रुप फोर
मुहम्मद खालिद     : 297
सिमरन कौर         : 269
इनवैलिड            :  22

सीनेटर नवदीप गोयल और प्रो. केशव ने लगाई थी ताकत

प्रो. राजेश गिल ग्रुप के लिए सीनेटर डॉ. नवदीप गोयल व प्रो. केशव मल्होत्रा ग्रुप ने पूरी ताकत लगा दी थी। सूत्रों का कहना है कि इन ग्रुपों का पीयू में दबदबा लंबे समय से चलता आ रहा है। अधिकांश शिक्षक इनके पास हैं। इसके अलावा लाइब्रेरियन, प्रोग्रामर व स्पोर्ट्स विभाग से जुड़े लोग भी पुटा में वोट डालते हैं। इनकी संख्या 100 के करीब है। यदि यह वोटर नहीं होते तो रिजल्ट अलग होता, लेकिन चुनावी गणित उसी तरह से तैयार किया गया था कि मात न मिले और इनका पूरा ग्रुप जीत गया।

सीनेट के पांच नए सदस्य आने से पड़ा प्रभाव
पुटा चुनाव से ठीक पहले सीनेट में पांच नए सदस्यों की तैनाती चांसलर वेंकैया नायडू की ओर से की गई थी। बताया जाता है कि यह सभी सदस्य भाजपा से आते हैं। ऐसे में सीनेट में वीसी ग्रुप का दबदबा हो जाएगा। सूत्रों का कहना है कि इस कारण तमाम शिक्षकों ने डॉ. जयंती ग्रुप का साथ न देकर प्रो. गिल के पक्ष में वोट दिए।

डेंटल कॉलेज आता तो बन सकती थी बात
पुटा में इस बार जीत की रणनीति ऐसे बनाई गई थी कि उसे कोई भेद न पाए। यही कारण रहा कि डेंटल कॉलेज के नाराज शिक्षकों को नहीं मनाया गया और लगभग 55 वोट अलग हो गए। यदि डॉ. जयंती ग्रुप इन शिक्षकों को मनाकर पुटा में शामिल करवा देता तो यह वोट उन्हीं के खाते में जाते। इतने वोट मिलने से जीत-हार अधिक नहीं होती। टक्कर और कांटे की हो जाती। प्रमोशन पॉलिसी लागू नहीं होने के कारण डेंटल कॉलेज शिक्षक नाराज थे। उनकी नाराजगी विपक्ष के वोट बढ़ा देती।

जिन ग्रुपों से थी उम्मीद वह भी नहीं रहे साथ

डॉ. जयंती ग्रुप के साथ जो ग्रुप पहले दिख रहे थे, उसमें से दो या तीन ही चुनाव तक दिखे। पुटा के पदाधिकारियों का विरोध दर्ज करा रहे ग्रुप के सदस्य भी पूरी तरह डॉ. जयंती के साथ नहीं आ पाए। शुरू में पांच से छह ग्रुप साथ आए लेकिन बाद में माहौल बदल गया। चुनाव जीतने वाले पदाधिकारियों ने इस बात को पूरी तरह शिक्षकों के बीच फैला दिया कि डॉ. जयंती ग्रुप वीसी फेवर का है। वहीं, डॉ. जयंती ग्रुप पुटा के दो साल के कार्यकाल को शिक्षकों के बीच ले जाने में असफल रहा। हालांकि, डॉ. जयंती का ग्रुप नया था और चुनाव भी अच्छा लड़ा।

पुटा चुनाव विश्वविद्यालय के शिक्षकों का एक एग्जाम था, जो रुझान आए हैं उससे साफ है कि तमाम लोग एक ही जगह सत्ता चाहते हैं। पावर एक जगह रहेगी तो उन्हें ही लाभ मिलता रहेगा। सीनेटर जीतने वाले ग्रुप को चुनाव लड़ा रहे थे। यही कारण है कि पूरा ग्रुप एक ही पक्ष का जीता है। गरीबों के साथ कोई खड़ा नहीं होना चाहता।
- डॉ. जयंती दत्ता, डिप्टी डायरेक्टर, एचआरडीसी
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