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पंजाब यूनिवर्सिटी में 'पुटा' चुनाव में शुरू हुई 'रैग-बैग' की डर्टी पॉलिटिक्स, शिक्षकों में आक्रोश
Tue, 13 Aug 2019 02:48 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Tue, 13 Aug 2019 02:48 PM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़
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पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन के चुनाव में विवादित शब्दों का प्रयोग तेजी से किया जा रहा है। प्रो. राजेश गिल ग्रुप की ओर से जारी घोषणा पत्र में विपक्षियों को ‘रैग-बैग’ लिखने से आक्रोश पैदा हो गया है। रैग-बैग का अर्थ बताया जा रहा है फटे कपड़ों का थैला, जो ऑथराइज्ड नहीं है। डॉ. जयंती दत्ता वाले प्रो टीचर्स ग्रुप ने इसे हथियार बनाकर अन्य शिक्षकों के सामने पेश कर दिया। दूसरे शिक्षक भी इससे हैरत में हैं। शिक्षकों का कहना है कि चुनाव तो एक प्रक्रिया है, लेकिन सभी शिक्षक हैं।
चुनाव के लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग नहीं होना चाहिए। प्रो टीचर्स ग्रुप ने साफ कर दिया कि ऐसे शब्दों का प्रयोग करने वालों को जवाब दिया जाएगा। रविवार को दोनों पक्षों ने घोषणा पत्र जारी किए थे। डॉ. जयंती दत्ता पक्ष ने पूरा घोषणा पत्र शिक्षकों व कैंपस की समस्याओं के निवारण करने को लेकर था। वहीं डॉ. राजेश गिल ग्रुप ने फीयरलेस पुटा की बात की, लेकिन विरोधियों को उन्होंने रैग-बैग संबोधित कर दिया। जब यह बात सोमवार को प्रो. टीचर्स ग्रुप को पता लगी तो उन्होंने नाराजगी जताई।
अन्य सीनियर व जूनियर शिक्षकों तक यह बात पहुंचाई। शिक्षकों ने कहा कि वह तो फर्श से अर्श तक पहुंचे हैं। दूसरे ग्रुप के लोग तो सीधे सत्ता हासिल करने के लिए आए हैं। कुछ सीनियर शिक्षकों ने बैठक कर कहा है कि रैग-बैग शब्द का प्रयोग किसी हाल में नहीं किया जाना चाहिए था। जब शिक्षक ही ऐसे शब्दों का प्रयोग अपने शिक्षकों के लिए करेंगे तो छात्र फिर हमसे क्या सीखेंगे। अन्य चुनाव में व शिक्षकों के इस चुनाव में क्या अंतर रह जाएगा।
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चुनाव एक प्रक्रिया है, जो भी जीतेगा वही शिक्षकों के लिए काम करेगा। लेकिन ऐसा कहना शोभा नहीं देता है। इस संबंध में पुटा अध्यक्ष प्रो. राजेश गिल से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
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चुनाव के लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग नहीं होना चाहिए। प्रो टीचर्स ग्रुप ने साफ कर दिया कि ऐसे शब्दों का प्रयोग करने वालों को जवाब दिया जाएगा। रविवार को दोनों पक्षों ने घोषणा पत्र जारी किए थे। डॉ. जयंती दत्ता पक्ष ने पूरा घोषणा पत्र शिक्षकों व कैंपस की समस्याओं के निवारण करने को लेकर था। वहीं डॉ. राजेश गिल ग्रुप ने फीयरलेस पुटा की बात की, लेकिन विरोधियों को उन्होंने रैग-बैग संबोधित कर दिया। जब यह बात सोमवार को प्रो. टीचर्स ग्रुप को पता लगी तो उन्होंने नाराजगी जताई।
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अन्य सीनियर व जूनियर शिक्षकों तक यह बात पहुंचाई। शिक्षकों ने कहा कि वह तो फर्श से अर्श तक पहुंचे हैं। दूसरे ग्रुप के लोग तो सीधे सत्ता हासिल करने के लिए आए हैं। कुछ सीनियर शिक्षकों ने बैठक कर कहा है कि रैग-बैग शब्द का प्रयोग किसी हाल में नहीं किया जाना चाहिए था। जब शिक्षक ही ऐसे शब्दों का प्रयोग अपने शिक्षकों के लिए करेंगे तो छात्र फिर हमसे क्या सीखेंगे। अन्य चुनाव में व शिक्षकों के इस चुनाव में क्या अंतर रह जाएगा।
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चुनाव एक प्रक्रिया है, जो भी जीतेगा वही शिक्षकों के लिए काम करेगा। लेकिन ऐसा कहना शोभा नहीं देता है। इस संबंध में पुटा अध्यक्ष प्रो. राजेश गिल से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।