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पंजाब में प्रदेश प्रधान के बाद अब मंत्रियों के फेरबदल की तैयारी
सुरिंदर पाल/अमर उजाला, जालंधर
Updated Sun, 10 Apr 2016 10:29 AM IST
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विजय सांपला
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पंजाब भाजपा प्रधान पद की कुर्सी पर केंद्रीय राज्यमंत्री विजय सांपला को बैठाने के बाद अब दिल्ली में पंजाब के मंत्रियों में फेरबदल को लेकर मंथन शुरू हो गया है। सांपला अपने थिंक टैंक के साथ दिल्ली पहुंच गए हैं और प्रदेश की राजनीति की बिसात बिछानी शुरू कर दी है। पंजाब में विधायक दल के नेता भगत चुन्नी लाल दलित समुदाय से हैं और प्रदेश भाजपा प्रधान भी दलित नियुक्त हो गया है।
ऐसे में अब भाजपा जातिवाद पर भी संतुलन बनाकर चलने की तैयारी कर रही है। पहले प्रदेश भाजपा प्रधान कमल शर्मा ब्राह्मण थे। ऐसे में भाजपा विधायक दल का नेता बदल कर किसी अन्य को लगाया जा सकता है ताकि भाजपा का ब्राह्मण का वोट बैंक जुड़ा रहे। ऐसे में विधायक दल का नेता अगर बदला जाता है तो निश्चित तौर पर मंत्रियों में भी फेरबदल तय है। भाजपा को इससे दो फायदे होते दिखाई दे रहे हैं।
एक तो भाजपा के मौजूदा मंत्रियों व सीपीएस के खिलाफ लोगों में काफी गुस्सा है। शहरों की हालत खस्ता है और व्यापारी वर्ग का हाल बुरा है। इसका जिम्मेदार व्यापारी भाजपा को ठहरा रहे हैं। स्वर्णकार 40 दिन से हड़ताल पर हैं और वैट रिफंड को लेकर हाहाकार मचा रहे हैं। ऐसे में भाजपा का विरोध हो रहा है। शहरी वर्ग में भाजपा की जमीन जबरदस्त ढंग से खिसक चुकी है। इसी फैक्टर में फंसकर भाजपा के दिग्गज अरुण जेटली तक अमृतसर से लोकसभा चुनाव हार चुके हैं।
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भाजपा के कई मंत्रियों की छुट्टी कर नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है। इससे भाजपा के वर्करों में नया उत्साह व जोश पैदा हो सकता है। भाजपा के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में भाजपा हाईकमान का फोकस पंजाब है। यहां संगठन में फेरबदल के बाद पूर्व सांसद नवजोत सिंह सिद्धू को भी एडजस्ट करने की तैयारी चल रही है। इस पर भी गहराई से मंथन जारी है कि सिद्धू को केंद्रीय मंत्रिमंडल में एडजस्ट किया जाए या पार्टी के संगठन में। भाजपा में आने वाले दिनों में जबरदस्त धमाकों से इंतजार नहीं किया जा सकता।
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ऐसे में अब भाजपा जातिवाद पर भी संतुलन बनाकर चलने की तैयारी कर रही है। पहले प्रदेश भाजपा प्रधान कमल शर्मा ब्राह्मण थे। ऐसे में भाजपा विधायक दल का नेता बदल कर किसी अन्य को लगाया जा सकता है ताकि भाजपा का ब्राह्मण का वोट बैंक जुड़ा रहे। ऐसे में विधायक दल का नेता अगर बदला जाता है तो निश्चित तौर पर मंत्रियों में भी फेरबदल तय है। भाजपा को इससे दो फायदे होते दिखाई दे रहे हैं।
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एक तो भाजपा के मौजूदा मंत्रियों व सीपीएस के खिलाफ लोगों में काफी गुस्सा है। शहरों की हालत खस्ता है और व्यापारी वर्ग का हाल बुरा है। इसका जिम्मेदार व्यापारी भाजपा को ठहरा रहे हैं। स्वर्णकार 40 दिन से हड़ताल पर हैं और वैट रिफंड को लेकर हाहाकार मचा रहे हैं। ऐसे में भाजपा का विरोध हो रहा है। शहरी वर्ग में भाजपा की जमीन जबरदस्त ढंग से खिसक चुकी है। इसी फैक्टर में फंसकर भाजपा के दिग्गज अरुण जेटली तक अमृतसर से लोकसभा चुनाव हार चुके हैं।
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भाजपा के कई मंत्रियों की छुट्टी कर नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है। इससे भाजपा के वर्करों में नया उत्साह व जोश पैदा हो सकता है। भाजपा के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में भाजपा हाईकमान का फोकस पंजाब है। यहां संगठन में फेरबदल के बाद पूर्व सांसद नवजोत सिंह सिद्धू को भी एडजस्ट करने की तैयारी चल रही है। इस पर भी गहराई से मंथन जारी है कि सिद्धू को केंद्रीय मंत्रिमंडल में एडजस्ट किया जाए या पार्टी के संगठन में। भाजपा में आने वाले दिनों में जबरदस्त धमाकों से इंतजार नहीं किया जा सकता।