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Chandigarh News: शिक्षक भर्ती में ओवरएज हो चुके आवेदकों को शामिल करने पर निर्णय ले पंजाब
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-2017 में सरकार ने नहीं करवाई शिक्षक पात्रता परीक्षा, आवेदकों की इसमें क्या गलती: हाईकोर्ट
-पंजाब सरकार को दो सप्ताह के भीतर इन आवेदकों के दावे पर लेना होगा निर्णय
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। ईटीटी व मास्टर के पदों की भर्तियों में अधिकतम आयु सीमा पार कर चुके आवेदकों को शामिल करने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को दो सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ आवेदकों की अपील मंजूर करते हुए यह आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए आवेदकों ने बताया कि पंजाब सरकार शिक्षक पात्रता परीक्षा करवाती है, लेकिन 2017 में ऐसा नहीं किया गया। 2018 में यह परीक्षा आयोजित की गई और याचिकाकर्ताओं ने उसे पास भी किया। याची ने बताया कि एक साल की देरी के चलते ईटीटी व मास्टरों की भर्ती के लिए वह अयोग्य हो गए क्योंकि वह अधिकतम आयु सीमा पार कर चुके थे। पंजाब में अधिकतम आयु सीमा 37 वर्ष है और इसे बढ़ाया जाना चाहिए।
पंजाब सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि भर्ती की शर्तें नीतिगत निर्णय है और इसमें अदालत को दखल नहीं देना चाहिए। हाईकोर्ट ने इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि अदालत का कार्य नीतिगत निर्णय में दखल का नहीं है, लेकिन अधिकतम आयु सीमा को लेकर नियमों की व्याख्या करना कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में है। इस मामले में पात्रता परीक्षा न करवाना सरकार की गलती थी और आवेदकों को इसका परिणाम भुगतने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता है। ऐसे में अब पंजाब सरकार दो सप्ताह के भीतर आदेश के अनुसार अधिकतम आयु सीमा पार कर चुके आवेदकों के दावे पर निर्णय ले।
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-पंजाब सरकार को दो सप्ताह के भीतर इन आवेदकों के दावे पर लेना होगा निर्णय
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। ईटीटी व मास्टर के पदों की भर्तियों में अधिकतम आयु सीमा पार कर चुके आवेदकों को शामिल करने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को दो सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ आवेदकों की अपील मंजूर करते हुए यह आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए आवेदकों ने बताया कि पंजाब सरकार शिक्षक पात्रता परीक्षा करवाती है, लेकिन 2017 में ऐसा नहीं किया गया। 2018 में यह परीक्षा आयोजित की गई और याचिकाकर्ताओं ने उसे पास भी किया। याची ने बताया कि एक साल की देरी के चलते ईटीटी व मास्टरों की भर्ती के लिए वह अयोग्य हो गए क्योंकि वह अधिकतम आयु सीमा पार कर चुके थे। पंजाब में अधिकतम आयु सीमा 37 वर्ष है और इसे बढ़ाया जाना चाहिए।
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पंजाब सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि भर्ती की शर्तें नीतिगत निर्णय है और इसमें अदालत को दखल नहीं देना चाहिए। हाईकोर्ट ने इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि अदालत का कार्य नीतिगत निर्णय में दखल का नहीं है, लेकिन अधिकतम आयु सीमा को लेकर नियमों की व्याख्या करना कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में है। इस मामले में पात्रता परीक्षा न करवाना सरकार की गलती थी और आवेदकों को इसका परिणाम भुगतने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता है। ऐसे में अब पंजाब सरकार दो सप्ताह के भीतर आदेश के अनुसार अधिकतम आयु सीमा पार कर चुके आवेदकों के दावे पर निर्णय ले।
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