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Chandigarh News: चंडीगढ़ नहीं आईं पंजाब रोडवेज की बसें, दिनभर यात्री हुए परेशान
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चंडीगढ़/मोहाली। पंजाब रोडवेज और चंडीगढ़ परिवहन विभाग के बीच विवाद छिड़ने से बुधवार को पूरे दिन यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। दिनभर पंजाब रोडवेज की बसें आईएसबीटी-43 के अंदर नहीं आईं, जिसकी वजह से लोगों को इधर-उधर भटकना पड़ा। विरोध स्वरूप सीटीयू की बसों को भी मोहाली के फेज-6 में रोक लिया गया। अधिकारियों ने मामले में दखल दिया, उसके बाद देर शाम स्थिति सामान्य हुई और बसें आईएसबीटी-43 के अंदर आनी शुरू हुईं।
सारा विवाद आईएसबीटी-43 की समयसारिणी पर खड़ा हुआ। पंजाब रोडवेज के कच्चे कर्मचारियों की यूनियन का आरोप है कि चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (सीटीयू) मनमर्जी कर रहा है। 27 मार्च को हुई ज्वाइंट एक्शन कमेटी की बैठक में यूनियन ने अपनी मांगों के संबंध में चंडीगढ़ प्रशासन, सीटीयू प्रशासन और पंजाब सरकार को मांगपत्र भेजा था। इसमें कहा गया था कि 2008 में हुए समझौते के मुताबिक सीटीयू को पंजाब में 29,562 किमी के अंदर बसें चलानी थीं लेकिन सीटीयू ने ज्यादा बसें खरीद लीं और पंजाब में दोगुने दायरे में बसें चलाई जा रही हैं। इससे रोडवेज को घाटा हो रहा है।
साथ ही पार्किंग फीस बढ़ाने के भी आरोप लगाए गए, जिसके बाद कर्मचारियों ने खुद ही फैसला ले लिया कि वह बसें चंडीगढ़ नहीं ले जाएंगे। इसी के तहत बुधवार को पंजाब के विभिन्न जिलों से आने वाली बसें मोहाली बस स्टैंड तक ही आईं। इससे लोगों को परेशान होना पड़ा। विवाद सोमवार को शुरु हुआ और बुधवार शाम को यूनियन के पदाधिकारियों के साथ अधिकारियों की वार्ता के बाद मामले को सुलझाया गया।
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इससे पहले चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग की कुछ बसों को मोहाली के फेस-6 में रोका गया। विवाद को बढ़ने से रोकने के लिए सीटीयू ने उधर बसें भेजनी बंद कर दीं। इसकी वजह से सवारियों को भी परेशानी झेलनी पड़ी। हालांकि अधिकारियों के साथ चर्चा होने के बाद शाम को करीब 5:30 बजे सीटीयू की बसें सामान्य रूप से आने-जाने लगीं। इसके साथ ही पंजाब रोडवेज की बसें भी चंडीगढ़ में आईएसबीटी-43 के अंदर खड़ी होने लगीं। इसके बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली है।
महंगा किराया देकर ऑटो-कैब से जाना पड़ा चंडीगढ़
मोहाली। पंजाब रोडवेज की बसों के चंडीगढ़ नहीं जाने से यात्री गर्मी में दिनभर परेशान रहे। मोहाली फेज-6 में अक्सर खाली पड़े रहने वाले बाबा बंदा सिंह बहादुर आईएसबीटी में बसों और यात्रियों की भीड़ लग गई। यहां पंजाब की सारी बसें रुकीं और यात्रियों को उतार दिया। यात्रियों को यहां से कोई भी लोकल बस भी नहीं मिली। यही हाल जीरकपुर में भी रहा। इसकी वजह से मोहाली और जीरकपुर से ऑटो और कैब का महंगा सफर कर उन्हें चंडीगढ़ जाना पड़ा।
नवांशहर से आए गुरप्रीत सिंह ने फोटो न छापने की सूरत में बताया कि उनको अपने एक रिश्तेदार को लेकर सेक्टर-32 में जाना था लेकिन उनको फेज-6 में उतरना पड़ा। वहां से ऑटो वाले ने 300 रुपये लेकर उन्हें जीएमसीएच-32 चंडीगढ़ पहुंचाया। गुरदासपुर से अपने बेटे के साथ एक प्राइवेट कंपनी में इंटरव्यू दिलाने के लिए आए गुरदयाल सिंह ने बताया कि बसों के मोहाली तक ही चलने की वजह से काफी परेशानी हुई। बंगा के रहने वाले वीरेंद्र कुमार ने पंजाब रोडवेज की बस पर आए लेकिन उनको बस पर चढ़ने के बाद मालूम पड़ा कि यह बस सिर्फ फेज-6 मोहाली के बस स्टैंड तक ही जाएगी। वह सवेरे साढ़े पांच बजे बंगा से इलाज के लिए आए थे। उनको पीजीआई जाना था। उन्होंने कहा कि जब वह यहां उतरे तो उनको पीजीआई जाने के लिए कोई बस नहीं मिली। फिर वह ऑटो वाले को ढाई सौ रुपये देकर पीजीआई पहुंचे।
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सारा विवाद आईएसबीटी-43 की समयसारिणी पर खड़ा हुआ। पंजाब रोडवेज के कच्चे कर्मचारियों की यूनियन का आरोप है कि चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (सीटीयू) मनमर्जी कर रहा है। 27 मार्च को हुई ज्वाइंट एक्शन कमेटी की बैठक में यूनियन ने अपनी मांगों के संबंध में चंडीगढ़ प्रशासन, सीटीयू प्रशासन और पंजाब सरकार को मांगपत्र भेजा था। इसमें कहा गया था कि 2008 में हुए समझौते के मुताबिक सीटीयू को पंजाब में 29,562 किमी के अंदर बसें चलानी थीं लेकिन सीटीयू ने ज्यादा बसें खरीद लीं और पंजाब में दोगुने दायरे में बसें चलाई जा रही हैं। इससे रोडवेज को घाटा हो रहा है।
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साथ ही पार्किंग फीस बढ़ाने के भी आरोप लगाए गए, जिसके बाद कर्मचारियों ने खुद ही फैसला ले लिया कि वह बसें चंडीगढ़ नहीं ले जाएंगे। इसी के तहत बुधवार को पंजाब के विभिन्न जिलों से आने वाली बसें मोहाली बस स्टैंड तक ही आईं। इससे लोगों को परेशान होना पड़ा। विवाद सोमवार को शुरु हुआ और बुधवार शाम को यूनियन के पदाधिकारियों के साथ अधिकारियों की वार्ता के बाद मामले को सुलझाया गया।
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इससे पहले चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग की कुछ बसों को मोहाली के फेस-6 में रोका गया। विवाद को बढ़ने से रोकने के लिए सीटीयू ने उधर बसें भेजनी बंद कर दीं। इसकी वजह से सवारियों को भी परेशानी झेलनी पड़ी। हालांकि अधिकारियों के साथ चर्चा होने के बाद शाम को करीब 5:30 बजे सीटीयू की बसें सामान्य रूप से आने-जाने लगीं। इसके साथ ही पंजाब रोडवेज की बसें भी चंडीगढ़ में आईएसबीटी-43 के अंदर खड़ी होने लगीं। इसके बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली है।
महंगा किराया देकर ऑटो-कैब से जाना पड़ा चंडीगढ़
मोहाली। पंजाब रोडवेज की बसों के चंडीगढ़ नहीं जाने से यात्री गर्मी में दिनभर परेशान रहे। मोहाली फेज-6 में अक्सर खाली पड़े रहने वाले बाबा बंदा सिंह बहादुर आईएसबीटी में बसों और यात्रियों की भीड़ लग गई। यहां पंजाब की सारी बसें रुकीं और यात्रियों को उतार दिया। यात्रियों को यहां से कोई भी लोकल बस भी नहीं मिली। यही हाल जीरकपुर में भी रहा। इसकी वजह से मोहाली और जीरकपुर से ऑटो और कैब का महंगा सफर कर उन्हें चंडीगढ़ जाना पड़ा।
नवांशहर से आए गुरप्रीत सिंह ने फोटो न छापने की सूरत में बताया कि उनको अपने एक रिश्तेदार को लेकर सेक्टर-32 में जाना था लेकिन उनको फेज-6 में उतरना पड़ा। वहां से ऑटो वाले ने 300 रुपये लेकर उन्हें जीएमसीएच-32 चंडीगढ़ पहुंचाया। गुरदासपुर से अपने बेटे के साथ एक प्राइवेट कंपनी में इंटरव्यू दिलाने के लिए आए गुरदयाल सिंह ने बताया कि बसों के मोहाली तक ही चलने की वजह से काफी परेशानी हुई। बंगा के रहने वाले वीरेंद्र कुमार ने पंजाब रोडवेज की बस पर आए लेकिन उनको बस पर चढ़ने के बाद मालूम पड़ा कि यह बस सिर्फ फेज-6 मोहाली के बस स्टैंड तक ही जाएगी। वह सवेरे साढ़े पांच बजे बंगा से इलाज के लिए आए थे। उनको पीजीआई जाना था। उन्होंने कहा कि जब वह यहां उतरे तो उनको पीजीआई जाने के लिए कोई बस नहीं मिली। फिर वह ऑटो वाले को ढाई सौ रुपये देकर पीजीआई पहुंचे।