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हजारों करोड़ की नशा तस्करी का मामला: CM मान ने AIG राजजीत सिंह को किया बर्खास्त, संपत्ति जांच का दिया आदेश

Mon, 17 Apr 2023 10:13 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 17 Apr 2023 10:13 PM IST
सार

सीएम भगवंत मान ने ट्वीट किया-नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा.. सीलबंद लिफाफों की रिपोर्ट की जांच के बाद, राजजीत सिंह पीपीएस को मादक पदार्थों की तस्करी के मामले में नामित किया गया है और विजिलेंस की मनी लॉन्ड्रिंग कार्रवाई की जांच के लिए तुरंत नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है।

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Punjab Rajjit Singh PPS named in drug trafficking case dismissed with immediate effect
राजजीत सिंह - फोटो : फाइल

विस्तार

पंजाब में करोड़ों रुपये के नशा तस्करी केस में सीलबंद रिपोर्ट खुलने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोमवार को पीपीएस अधिकारी व सहायक पुलिस महानिरीक्षक (एआईजी) राजजीत सिंह हुंदल को बर्खास्त कर दिया। सीएम ने विजिलेंस ब्यूरो को नशा तस्करी केस में राजजीत को नामजद करने के साथ चिट्टे की तस्करी से कमाई संपत्ति की जांच का भी आदेश दिया।

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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सूबे में नशा तस्करी की जांच के लिए 2017 में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। एसआईटी ने जांच करने के बाद चार सीलबंद रिपोर्ट हाईकोर्ट में दाखिल की। इनमें से तीन रिपोर्ट को हाईकोर्ट ने खोलकर पंजाब सरकार को कार्रवाई के लिए भेजी थी। इन्हीं रिपोर्ट के आधार पर एआईजी राजजीत सिंह हुंदल के खिलाफ कार्रवाई की गई है। हालांकि पंजाब सरकार ने अब तक तीनों रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया है लेकिन एसआईटी के सदस्यों के करीबी सूत्रों के हवाले से यह बात सामने आई है कि रिपोर्ट में एआईजी राजजीत द्वारा नशा तस्करी के जरिये अर्जित की गई आय से अधिक संपत्ति का विवरण साफ तौर पर दिया गया है। रिपोर्ट में तीन अन्य पुलिस अधिकारियों के नाम भी बताए जा रहे हैं। उनके खिलाफ भी जल्द कार्रवाई हो सकती है।
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अपने ही जाल में फंसा राजजीत
एसटीएफ के तत्कालीन प्रमुख एडीजीपी हरप्रीत सिंह सिद्धू की अगुवाई में टीम ने तत्कालीन इंस्पेक्टर (इस समय जेल में) इंद्रजीत सिंह को छह किलो हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया था। इस मामले की जांच आगे बढ़ी तो पुलिस अधिकारी राजजीत सिंह सवालों के घेरे में आ गए। बचाव के लिए उसने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की कि उनके खिलाफ सिद्धू का नकारात्मक व पक्षपाती रवैया रहा है। उसे झूठा फंसाया जा रहा है। जिस पर हाईकोर्ट ने पूर्व डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय के नेतृत्व में एक एसआईटी गठित की और एसआईटी को जांच के लिए दो पहलू दिए। पहला- क्या एडीजीपी हरप्रीत सिंह सिद्धू याचिकाकर्ता के खिलाफ पक्षपाती थे? दूसरा, क्या पंजाब में राजजीत सिंह और ड्रग तस्करों के साथ इंद्रजीत की सांठगांठ थी? एसआईटी ने इन पहलुओं पर जांच आगे बढ़ाई और दूसरे पहलू पर पाया कि नशा तस्करों और चार पुलिस अधिकारियों के साथ इंद्रजीत की सांठगांठ थी। इनमें तीन पंजाब पुलिस सेवा अधिकारी (पीपीएस) और एक पंजाब कैडर का आईपीएस अधिकारी है। दूसरे पहलू में तस्वीर साफ होते ही यह मामला भी सुलझ गया कि हरप्रीत सिद्धू के खिलाफ राजजीत द्वारा याचिका में लगाए गए आरोप झूठे निकले।
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बरी करवाने के लिए हेड कांस्टेबल से लिखवाते थे एफआईआर
एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पंजाब पुलिस के चार अधिकारियों ने एसएसपी के रूप में पोस्टिंग के दौरान हेड कांस्टेबल इंदरजीत सिंह को एनडीपीएस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी थी, जबकि नियमानुसार ऐसी एफआईआर एएसआई रैंक से नीचे का कोई अधिकारी दर्ज नहीं कर सकता। हेड कांस्टेबल के तौर पर एफआईआर होते ही तस्करों के खिलाफ मामला टिकता नहीं था और वह अदालत से आसानी से बरी हो जाते थे। खास बात यह भी रही कि उक्त चारों एसएसपी के अधिकार क्षेत्र वाले इलाकों में ही नशीले पदार्थों की सबसे ज्यादा रिकवरी भी देखी गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह विश्वास नहीं होता कि उक्त सीनियर पुलिस अधिकारियों को यह जानकारी नहीं थी कि एनडीपीएस एक्ट के तहत नियमित एएसआई के निचले रैंक का अधिकारी ड्रग्स के मामले में एफआईआर दर्ज नहीं कर सकता।

साथी ने भी आरोपों की पुष्टि की थी
राजजीत के खिलाफ एसआईटी के निष्कर्षों की पुष्टि डीएसपी (रिटायर्ड) जसवंत सिंह के उस बयान से भी हुई, जो उन्होंने मोहाली की अदालत में दिया था। जसवंत सिंह तरनतारन में इंद्रजीत के साथ ही काम करते थे। जसवंत सिंह ने अदालत में दर्ज कराए बयान में कहा कि यह बात अच्छी तरह से जानते हुए कि इंद्रजीत का रैंक हेड कांस्टेबल का है, इसके बावजूद एसएसपी राजजीत ने उसे एनडीपीएस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी। इसने आखिरकार कई नशा तस्करों को मुकदमे के दौरान बरी होने में आसानी हो गई। यह बात अपनी जांच रिपोर्ट में एसटीएफ प्रमुख हरप्रीत सिद्धू ने भी कही।
 

नशा तस्करी में शामिल किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। सीलबंद लिफाफों की रिपोर्टों को खंगालने के बाद पीपीएस राजजीत सिंह को ड्रग तस्करी केस में नामजद करके तुरंत नौकरी से बर्खास्त किया जाता है। विजिलेंस को चिट्टे की तस्करी से कमाई हुई राजजीत की संपत्ति की जांच करने को भी कहा गया है। जल्द और जानकारी देंगे। भगवंत मान, पंजाब के मुख्यमंत्री।

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