पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कहा- प्रदूषण के लिए दिल्ली खुद जिम्मेदार, रिपोर्ट में हो चुका खुलासा
- पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने खारिज किया दावा, कहा- तो फिर पंजाब की हवा क्यों नहीं दूषित
- दावा: पराली सीजन में दिल्ली से हमेशा कम रहता है पंजाब का वायु गुणवत्ता सूचकांक
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दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण के लिए पंजाब नहीं दिल्ली खुद जिम्मेदार है। ऐसा दावा पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) ने किया है। बोर्ड के सदस्य सचिव करुणेश गर्ग ने भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रिसर्च में पराली सीजन में दिल्ली के वायु गुणवत्ता सूचकांक से पंजाब का सूचकांक स्तर हमेशा कम रहता है। ऐसे में पंजाब पर दिल्ली को प्रदूषित करने का आरोप लगाना न्यायोचित नहीं है।
भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 2018-19 की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में वायु प्रदूषण के लिए उत्तर प्रदेश और स्थानीय तौर पर स्वयं दिल्ली द्वारा पैदा किया गया प्रदूषण जिम्मेदार है। आईआईएसईआर के रिसर्च पेपर में पंजाब के साल 2018 और 2019 के वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) दिल्ली की तुलना में बेहतर थे।
आईआईएसईआर के शोध में सामने आया था कि साल 2018 और 2019 में दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक 179 था और इसमें 2.5 फीसदी पार्टिकुलेट मैटर शामिल था, जबकि पंजाब के लुधियाना, जालंधर और अमृतसर का वायु गुणवत्ता सूचकांक क्रमश: 161, 156 और 159 था।
9217 पंचायतें पराली के खिलाफ
किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए पंजाब सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। राज्य की विभिन्न पंचायतों को पराली नहीं जलाने को लेकर प्रस्ताव पास करने के लिए अधिकृत किया है। इसके बाद अब तक राज्य की 9,217 पंचायतें पराली जलाने के खिलाफ प्रस्ताव पास कर चुकी हैं। हालांकि पिछले साल के मुकाबले पराली जलाने की घटनाएं इस साल काफी बढ़ चुकी हैं।
मशीनों पर 80 प्रतिशत तक सब्सिडी
पराली प्रबंधन के लिए इस साल पंजाब सरकार की तरफ से फसल अवशेष प्रबंधन वाली 23500 मशीनों की खरीद पर 50 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। इसके अलावा कंबाइनों पर यह सिस्टम लगवाने पर 50 फीसदी सब्सिडी दी जा रही है। सुपर एसएमएस की व्यवस्था की गई है। यदि कोई भी कंबाइन स्वामी बिना एसएमएस के मशीन संचालित करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
पराली जलाने के मामलों में दिल्ली व अन्य राज्यों द्वारा पंजाब को बदनाम किया जा रहा है, जबकि दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण के लिए स्वयं दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा जिम्मेदार हैं। यहां तक कि पाकिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्रों में जलाई जाने वाली पराली का धुआं भी दिल्ली में पहुंच रहा है। - करुणेश गर्ग, सदस्य सचिव, पीपीसीबी।