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पंजाबः अनुसूचित जाति की महिला से सामूहिक दुष्कर्म, सात साल बाद भी दर्ज नहीं हुई एफआईआर

Thu, 05 Mar 2020 10:50 AM IST
खुशबू गोयल हर्ष कुमार सलारिया, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 05 Mar 2020 10:50 AM IST
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Punjab Police Working Process in Scheduled Cast Related People Cases
पुलिस एफआईआर
अनुसूचित जाति के लोगों पर अत्याचार की घटनाओं को लेकर पंजाब पुलिस की संजीदगी का दावा कितना खोखला है, यह विधानसभा में पेश की गई रिपोर्ट में सामने आया। यह रिपोर्ट विधानसभा के स्पीकर द्वारा गठित अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व पिछड़ी श्रेणी कल्याण कमेटी ने पेश की। कमेटी ने लुधियाना जिले में 2013 में एक अनुसूचित जाति की महिला के अपहरण, अवैध रूप से हिरासत में रखने, सामूहिक दुष्कर्म और अमानवीय यातनाएं दिए जाने की एक घटना को राज्य सरकार और राज्य पुलिस के सामने उठाया गया।
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इतने साल बीत जाने के बाद भी न तो राज्य सरकार ने इसे गंभीरता से लिया और न ही पुलिस ने किसी आरोपी पर एफआईआर ही दर्ज की। कमेटी ने रिपोर्ट में कहा है कि गृह विभाग के अफसरों द्वारा 6 साल में पत्र और रिमाइंडरों का जवाब नहीं दिया गया जो सीधे तौर पर कमेटी की अवमानना है। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पीकर से मांग की है कि गृह विभाग द्वारा अवमानना किए जाने के इस मामले को विशेषाधिकार कमेटी के सुपुर्द किया जाए।
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कमेटी ने अनुसूचित जाति की महिला पर हुए अत्याचारों के लिए तत्कालीन थाना प्रभारी गुरविंदर सिंह बल, राजवीर सिंह, हरजीत सिंह व अन्य पर एफआईआर दर्ज करने संबंधी सिफारिश गृह विभाग से की थी। गृह विभाग ने 5 दिसंबर, 2013 को एसएसपी लुधियाना रूरल को निर्देश जारी किया, लेकिन उसके बाद भी आरोपियों पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई। कमेटी ने 18 फरवरी, 2014 को बैठक कर गृह विभाग के सचिव को पत्र लिखकर कार्रवाई करके 21 दिन में कमेटी को सूचित करने को कहा।
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कमेटी ने रिपोर्ट में लिखा कि 20 फरवरी, 2014 को गृह विभाग के सचिव को भेजे पत्र को 2019 में पांच साल बीत जाने के बाद भी विभाग ने कमेटी को कोई सूचना नहीं दी। 19 फरवरी, 2019 को आप की विधायक सर्वजीत कौर माणुके ने कमेटी को पत्र लिखकर मामले की याद दिलाई। तब कमेटी ने 24 नवंबर 2019, 15 जनवरी, 2020 और 6 फरवरी, 2020 को अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह विभाग व न्याय विभाग को रिमाइंडर भेजकर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी। बार-बार भेजे गए रिमाइंडरों पर गृह विभाग ने कमेटी को कोई सूचना नहीं दी।


अवमानना का मामला विशेषाधिकार कमेटी को सौंपने की सिफारिश
कमेटी ने माना है कि गृह विभाग और न्याय विभाग सीधे तौर पर कमेटी की अवमानना कर रहा है। कमेटी को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। कमेटी ने अवमानना का मामला विधानसभा की विशेषाधिकार कमेटी को सौंपने की सिफारिश स्पीकर से की है।
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