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सख्तीः पाकिस्तान से लौटते ही कबड्डी खिलाड़ियों की होगी कड़ी जांच, इंटेलिजेंस विंग जुटा रही डाटा
Wed, 12 Feb 2020 11:06 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 12 Feb 2020 11:06 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
पाकिस्तान में कबड्डी विश्व कप टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए 60 खिलाड़ियों का जो दल वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान गया है, उसकी अब पंजाब पुलिस की इंटेलिजेंस शाखा को इंतजार है।
इस दल को पाकिस्तान जाने की इजाजत कैसे मिली और दल में खिलाड़ी के तौर पर शामिल लोगों की पृष्ठभूमि क्या है, इसकी छानबीन शुरु हो गई है। पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ द्वारा इस पूरे मामले को साजिश करार दिए जाने के बाद राज्य पुलिस का ध्यान भी इस ओर गया है, क्योंकि पंजाब से इतने लोगों को पाक जाने के बारे में राज्य सरकार को भी कोई सूचना नहीं दी गई है।
यह मामला तब उजागर हुआ जब केंद्रीय गृह मंत्रालय और खेल मंत्रालय ने भी कहा कि उन्होंने किसी दल को पाकिस्तान जाने की इजाजत नहीं दी। इधर, पंजाब सरकार और पंजाब पुलिस के इंटेलिजेंस विभाग ने भी इस बारे में कोई जानकारी होने से इनकार किया गया।
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अब यह बात सामने आ रही है कि इन खिलाड़ियों को पंजाब कबड्डी एसोसिएशन ने अपने स्तर पर पाकिस्तान में कबड्डी विश्व कप में हिस्सा लेने भेज दिया है। इन खिलाड़ियों के वीजा का प्रबंध भी पंजाब की एसोसिएशन के लैटरहेड पर जारी आवेदन के जरिये हुआ है, जिसके बारे में राज्य एसोसिएशन ने पंजाब खेल विभाग को भी कोई सूचना नहीं दी।
दूसरी ओर, पाकिस्तान एमेच्योर सर्किल कबड्डी फेडरेशन के महासचिव मोहम्मद सरवर बट्ट का यह बयान कि पाकिस्तान सरकार द्वारा कबड्डी विश्व कप के लिए किसी देश को न्योता ही नहीं भेजा गया, के चलते नया विवाद खड़ा हो गया है कि पंजाब की एसोसिएशन ने बिना न्योते के खिलाड़ियों को भेजने की तैयारी कैसे कर ली। यह सारा काम भारत और पंजाब की सरकारों से छुपा कर क्यों किया गया।
उल्लेखनीय है कि खिलाड़ियों के विदेश जाने के बारे में फैसला विदेश मंत्रालय और खेल मंत्रालय का विषय है, जिन्हें केंद्रीय एजेंसियां संबंधित खिलाड़ी की पृष्ठभूमि की पूरी जानकारी उपलब्ध कराती हैं और उसके आधार पर ही दूसरे देश से वीजा दिलाया जाता है।
पंजाब कबड्डी एसोसिएशन के अध्यक्ष और सीनियर अकाली नेता सिकंदर सिंह मलूका द्वारा इस संबंध में केवल यही कहा गया है कि उनकी एसोसिएशन ने पाकिस्तान के टूर्नामेंट का न्योता स्वीकार करने के बाद खिलाड़ियों को भेजने का फैसला लिया था। इस बीच, इंटेलिजेंस विभाग के एक उच्चाधिकारी ने कहा कि वाघा बार्डर के रास्ते उक्त 60 खिलाड़ियों के लौटने पर उनकी जांच की जाएगी। फिलहाल इस दल में शामिल लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
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इस दल को पाकिस्तान जाने की इजाजत कैसे मिली और दल में खिलाड़ी के तौर पर शामिल लोगों की पृष्ठभूमि क्या है, इसकी छानबीन शुरु हो गई है। पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ द्वारा इस पूरे मामले को साजिश करार दिए जाने के बाद राज्य पुलिस का ध्यान भी इस ओर गया है, क्योंकि पंजाब से इतने लोगों को पाक जाने के बारे में राज्य सरकार को भी कोई सूचना नहीं दी गई है।
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यह मामला तब उजागर हुआ जब केंद्रीय गृह मंत्रालय और खेल मंत्रालय ने भी कहा कि उन्होंने किसी दल को पाकिस्तान जाने की इजाजत नहीं दी। इधर, पंजाब सरकार और पंजाब पुलिस के इंटेलिजेंस विभाग ने भी इस बारे में कोई जानकारी होने से इनकार किया गया।
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अब यह बात सामने आ रही है कि इन खिलाड़ियों को पंजाब कबड्डी एसोसिएशन ने अपने स्तर पर पाकिस्तान में कबड्डी विश्व कप में हिस्सा लेने भेज दिया है। इन खिलाड़ियों के वीजा का प्रबंध भी पंजाब की एसोसिएशन के लैटरहेड पर जारी आवेदन के जरिये हुआ है, जिसके बारे में राज्य एसोसिएशन ने पंजाब खेल विभाग को भी कोई सूचना नहीं दी।
दूसरी ओर, पाकिस्तान एमेच्योर सर्किल कबड्डी फेडरेशन के महासचिव मोहम्मद सरवर बट्ट का यह बयान कि पाकिस्तान सरकार द्वारा कबड्डी विश्व कप के लिए किसी देश को न्योता ही नहीं भेजा गया, के चलते नया विवाद खड़ा हो गया है कि पंजाब की एसोसिएशन ने बिना न्योते के खिलाड़ियों को भेजने की तैयारी कैसे कर ली। यह सारा काम भारत और पंजाब की सरकारों से छुपा कर क्यों किया गया।
उल्लेखनीय है कि खिलाड़ियों के विदेश जाने के बारे में फैसला विदेश मंत्रालय और खेल मंत्रालय का विषय है, जिन्हें केंद्रीय एजेंसियां संबंधित खिलाड़ी की पृष्ठभूमि की पूरी जानकारी उपलब्ध कराती हैं और उसके आधार पर ही दूसरे देश से वीजा दिलाया जाता है।
पंजाब कबड्डी एसोसिएशन के अध्यक्ष और सीनियर अकाली नेता सिकंदर सिंह मलूका द्वारा इस संबंध में केवल यही कहा गया है कि उनकी एसोसिएशन ने पाकिस्तान के टूर्नामेंट का न्योता स्वीकार करने के बाद खिलाड़ियों को भेजने का फैसला लिया था। इस बीच, इंटेलिजेंस विभाग के एक उच्चाधिकारी ने कहा कि वाघा बार्डर के रास्ते उक्त 60 खिलाड़ियों के लौटने पर उनकी जांच की जाएगी। फिलहाल इस दल में शामिल लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।