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Chandigarh News: पंजाब पुलिस ने दरकिनार की थी ईडी की सिफारिश

Mon, 05 Oct 2026 10:18 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 05 Oct 2026 10:18 PM IST
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Punjab Police had sidelined the ED's recommendation.
तबादलों-पोस्टिंग और सरकारी मंजूरियों में कथित भ्रष्टाचार की जांच के लिए एफआईआर की मांग, पुलिस ने नहीं की कार्रवाई
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गमाडा-पूडा से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में सीएमओ से जुड़े लोगों के नाम सामने आने का दावा
एफआईआर न होने पर हाईकोर्ट पहुंचे वकील निखिल सराफ
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब में सरकारी तबादलों-पोस्टिंग, टेंडर, नीतिगत फैसलों और अन्य सरकारी मंजूरियों में कथित भ्रष्टाचार की जांच को लेकर ईडी और पंजाब पुलिस के बीच खींचतान सामने आई। ईडी ने पंजाब के डीजीपी गौरव यादव को पत्र भेजकर जांच के बाद एफआईआर दर्ज करने का आग्रह किया था, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। इसके बाद वकील निखिल सराफ हाईकोर्ट पहुंच गए और अदालत के आदेश के बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई।

गमाडा-पूडा केस से जुड़ी जांच
सूत्रों के अनुसार मामला ईडी की मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़ा है, जिसमें मोहाली के रियल एस्टेट प्रोजेक्टों और जमीन के इस्तेमाल में कथित अनियमितताओं की जांच की जा रही थी। आरोप है कि कुछ जमीन मालिकों के कथित फर्जी सहमति पत्रों के आधार पर गमाडा से चेंज ऑफ लैंड यूज (सीएलयू) मंजूर कराए गए। इसी जांच के दौरान ईडी ने मई में अजय सहगल, नितिन गोहल, सुरेश कुमार बजाज और अन्य से जुड़े परिसरों पर तलाशी ली थी। तलाशी के दौरान नकदी से भरे बैग बालकनी से नीचे फेंके जाने की बात भी सामने आई थी। ईडी ने डिजिटल सामग्री और दस्तावेज बरामद किए थे।
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चैट में तबादलों की बातचीत
सूत्रों के मुताबिक नितिन गोहल से मिले डिजिटल रिकॉर्ड और व्हाट्सएप चैट में सरकारी अधिकारियों के तबादलों-पोस्टिंग से संबंधित बातचीत मिली। इनमें आधिकारिक सूची जारी होने से पहले उसके ड्राफ्ट में बदलाव के संकेत मिलने का दावा किया गया। ईडी ने इसी सामग्री को कथित भ्रष्टाचार की जांच का आधार बनाया। ईडी का आरोप था कि नितिन गोहल ने मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मन के बीच कथित मध्यस्थ की भूमिका निभाई और तबादलों-पोस्टिंग, गोपनीय दस्तावेजों, हथियार लाइसेंस, टेंडर और अन्य सरकारी मंजूरियों को प्रभावित करने का नेटवर्क चलाया। कथित तौर पर इसके बदले नकदी, जमीन और अन्य लाभ के जरिए करोड़ों रुपये के अपराध से अर्जित लाभ की बात कही गई।
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रिमाइंडर भी किए अनदेखे
ईडी ने कार्रवाई के लिए पंजाब पुलिस को रिमाइंडर भेजे। 31 अगस्त को ईडी ने पंजाब ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन को दोबारा पत्र भेजकर एफआईआर दर्ज करने का आग्रह किया। पुलिस ने ईडी से दस्तावेजों की स्पष्ट प्रतियां, मूल इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और चेन ऑफ कस्टडी जैसी जानकारी मांगी थी। ईडी ने पीएमएलए की धारा 66(2) का हवाला देते हुए कहा कि सूचना संबंधित एजेंसी को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी जाती है और एफआईआर से पहले पूरी सामग्री उपलब्ध कराने की शर्त उचित नहीं है। सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका जताते हुए ईडी ने तत्काल एफआईआर की मांग की थी।

सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी : चीमा
हाईकोर्ट के फैसले के बाद वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब सरकार आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। सरकार का तर्क है कि राज्य पुलिस को प्रारंभिक जांच पूरी करने का अधिकार था और पंजाब में सीबीआई जांच के लिए सामान्य सहमति पहले की कांग्रेस सरकार वापस ले चुकी है। आप प्रवक्ता बलतेज पन्नू ने इसे चुनाव से पहले भाजपा का पुराना पैटर्न बताया।


विपक्ष ने साधा निशाना
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने आरोप लगाया कि राज्य तंत्र ने अपने लोगों को बचाने की कोशिश की और ईडी की तीन चेतावनियों के बाद अदालत को हस्तक्षेप करना पड़ा। नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने उम्मीद जताई कि सीबीआई निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच करेगी।
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