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पंजाब पुलिस के बुरे हालात सोशल मीडिया पर हुए वायरल, आनन-फानन में जागी सरकार

Fri, 26 Oct 2018 09:17 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 26 Oct 2018 09:17 AM IST
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Punjab police article viral in social media
punjab police

सोशल मीडिया पर पंजाब के पुलिस थानों और पुलिसकर्मियों की हालत के बारे में बुधवार को एक लेख वायरल हुआ। इसके बाद गुरुवार को मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से सूबे के डीजीपी को सरकार की नीतियों और नियमों के तहत तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं। लेख में पंजाब पुलिसकर्मियों के अत्यंत खराब माहौल में ड्यूटी करने और पुलिस थानों और वाहनों के लिए पेट्रोल-डीजल के पैसे भी अपनी जेब से खर्च किए जाने की मजबूरी का उल्लेख किया गया है। 

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देर शाम तक यह वायरल लेख मुख्यमंत्री कार्यालय भी पहुंच गया। इसके बाद सीएमओ ने डीजीपी को ई-मेल किया। इसमें इस लेख को अटैच करते हुए कहा गया है कि मामले पर नियमानुसार तुरंत कार्रवाई करें। साथ ही, जो भी कार्रवाई करें, उसकी सूचना मुख्यमंत्री कार्यालय को दें। इस संबंध में जब पंजाब पुलिस मुख्यालय में अधिकारियों से संपर्क किया गया तो उन्होंने इस विषय पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
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सोशल मीडिया पर वायरल हुआ लेख 
इस लेख में लिखा है कि पंजाब पुलिस अपनी जेब से पैसा खर्च करके थानों को चला रही है। खर्च किए पैसों की वसूली के चक्कर में पूरी प्रणाली भ्रष्टाचार में बुरी तरह उलझ चुकी है। इस कारण लोगों को मन से पुलिस का सम्मान और प्रभाव घटता जा रहा है। परदे के पीछ छुपा सच देखकर यह लगता है कि सरकार अप्रत्यक्ष तौर पर पुलिस को भ्रष्टाचार करने की मंजूरी दे चुकी है। 

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Punjab police article viral in social media
सांकेतिक तस्वीर

थानों में कागज-पत्रों की कार्रवाई के दौरान आने वाला स्टेशनरी का खर्च, कंप्यूटर का खर्च, टोनर रिफिलिंग, थाने की इमारत की मरम्मत और रंग-रोगन का खर्च, पुलिसकर्मियों के लिए रसोई का खर्च और अन्य जरूरी खर्च पुलिस को निजी तौर पर करने पड़ते हैं। इनकी पूर्ति बाद में जनता की जेब से सीधे या टेढ़े तरीके से की जाती है। पुलिस की ओर से दर्ज मुकदमों को अदालत में पेश करने पर 2 से 8 हजार रुपये तक खर्च आता है, जिसकी अदायगी भी पुलिसवाले अपनी जेब से करते हैं। 

हवलदार को आज भी सरकार आने-जाने की सुविधा के तौर पर सिर्फ 400 रुपये प्रति माह एफटीए भत्ता देती है। वहीं डीएसपी और थाना प्रमुख को दी गई सरकारी गाड़ी को एक महीने के लिए 200 लीटर तेल मंजूर है। वर्दी का खर्च एक हजार रुपये और थाना भत्ता 150 रुपये प्रति माह दिया जाता है। थाना प्रमुख की सरकारी गाड़ी, एक सरकारी मोटरसाइकिल की मरम्मत और टायर-ट्यूबों का खर्च भी कर्मचारियों को जेब से करना पड़ता है। 

थाने में एएसआई और एसआई समेत बाकी कर्मचारियों को वाहन की सुविधा नहीं है, इसलिए सरकारी ड्यूटी के दौरान मौके पर पहुंचने के लिए उन्हें अपने वाहन निजी खर्च पर उपयोग करने पड़ते हैं। ऐसी हालत में अपनी जेब से निकले पैसे पूरे करने के लिए पुलिसवालों लोगों की जेबों से पैसे निकालने को मजबूर हैं।

पुलिस वाले करने लगे हैं नशा 
लेख में कहा गया है कि लंबी ड्यूटियों के कारण पुलिस कर्मचारी मानसिक और शारीरिक तौर पर बीमार होते जा रहे हैं। उनके खाने-सोने का कोई समय नहीं रह गया। ऐसे हालात में थकान मिटाने के लिए पुलिस का बड़ा वर्ग नशे का इस्तेमाल करने लगा है।

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