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शराब के शौकीनों को पंचायतों का 'झटका'

Sat, 08 Nov 2014 04:19 PM IST
सुरजीत सिंह सत्ती/अमर उजाला, चंडीगढ़
सुरजीत सिंह सत्ती/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 08 Nov 2014 04:19 PM IST
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Punjab Panchayats Dont Want Wine Shops in Villages

पंजाब में पंचायतें अपने गांवों में ठेका नहीं खोलना चाहतीं, लेकिन पंजाब सरकार इस बारे में कोई फैसला नहीं लेती है। जब तक फैसला लिया जाता है, तब तक अगले वित्त वर्ष के लिए ठेकों की नीलामी हो चुकी होती है और पंचायतें कुछ भी नहीं कर पातीं।

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ऐसे गांवों में अगले वित्त वर्ष से ठेके नहीं खोलने पर फैसला लेने के लिए पंजाब सरकार को कानूनी नोटिस भेजा गया है। कानूनी नोटिस साइंटिफिक अवेयरनेस एंड सोशल वेल्फेयर फोरम के अध्यक्ष संगरूर निवासी डॉ. अमरजीत सिंह मान ने एडवोकेट एचसी अरोड़ा के माध्यम से भेजा है।
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मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव आबकारी व कराधान और एक्साइज कमिश्नर को सतर्क किया है कि यदि एक महीने में फैसला नहीं लिया गया तो हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की जाएगी।
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नोटिस के मुताबिक पंजाब की 106 पंचायतें अपने गांवों में ठेका नहीं चाहती हैं और इनमें से 40 पंचायतों ने प्रस्ताव पास कर एक्साइज कमिश्नर को भेज भी दिया है। इन पंचायतों के प्रस्ताव पर एक महीने में फैसला लिया जाए।

सरकार ने प्रस्ताव पर अभी तक नहीं लिया फैसला

Punjab Panchayats Dont Want Wine Shops in Villages

नोटिस में कहा है कि पिछले साल भी कई पंचायतों ने अपने गांवों में अगले वित्त वर्ष से ठेके नहीं खोलने के लिए प्रस्ताव पारित कर एक्साइज कमिश्नर को भेजा था। आरोप है कि इन प्रस्तावों पर फरवरी महीने तक कोई फैसला नहीं लिया गया और न ही पंचायतों को किसी फैसले के बारे में सूचित किया गया। इस बीच अगले वित्त वर्ष के ठेके इन गांवों के नीलाम कर दिए गए और पंचायतें एक्साइज कमिश्नर के फैसलों को चुनौती नहीं दे पाईं, क्योंकि वक्त निकल चुका था।

यह है ठेका खोलने के लिए कानून
पंचायती राज एक्ट के तहत प्रावधान है कि यदि कोई पंचायत अपने गांव में ठेका नहीं चाहती तो एक अप्रैल से 30 सितंबर के बीच दो तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित कर एक्साइज कमिश्नर को भेज सकती है।

नियमानुसार एक्साइज कमिश्नर इन प्रस्तावों के मुताबिक अगले वित्त वर्ष से ठेका नहीं खोलने के लिए पाबंद हैं। एक्साइज कमिश्नर पंचायत का प्रस्ताव केवल उसी सूरत में रद्द कर सकते हैं जब प्रस्ताव भेजने वाली पंचायत में नाजायज शराब न बनती हो या फिर शराब की तस्करी न होती हो।

ये पंचायतें नहीं चाहती ठेके

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मालेरकोटला की कुठाला, हत्थां, बनभोरा और रामपुरा भिंडरां। धूरी की दौलतपुर, ढंडरां, पलशोर, कहेड़ू, ईसी बोजोवाली, मीमसा, कोलशेरी, बटुआ व कांझला। शेरपुर की बड़ी, चहिला शेरपुर, रामनगर छन्नां, फुड़वाही, कलेर, दीदारगढ़, सुल्तानपुर, अलाल, फतेहगढ़ पंजगराइयां, मुलोवाल, अलीपुर खालसा, ईसापुर व गोबिंदपुरा। भवानीगढ़ की बीबरी। लहरागागा की कोटड़ा लहिल। रइया की संत गुरबचन सिंह नगर मेहता। अमृतसर की दबुर्जी और बुंगा (होशियारपुर) की थिंदा।

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