Punjab: पद्मश्री ओलंपियन कौर सिंह का निधन, कुछ दिन पहले ही जीवनी को सिलेबस में किया गया था शामिल
कौर सिंह पंजाब के ही नहीं बल्कि भारत के प्रमुख बॉक्सरों में से एक थे। उन्होंने महान खिलाड़ी मोहम्मद अली के साथ फाइट की थी। कौर सिंह ने देश के लिए कई मेडल जीते थे। 1982 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार और 1983 में पद्मश्री दिया गया था।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
देश के महान हैवीवेट मुक्केबाज अर्जुन अवार्डी कौर सिंह का बुधवार रात तीन बजे कुरुक्षेत्र के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 74 वर्ष के थे। पिछले कुछ दिनों से उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। वे देश के इकलौते बॉक्सर थे, जिन्होंने लीजेंड मोहम्मद अली के साथ नई दिल्ली में रिंग के अंदर दो-दो हाथ किए थे।
संगरूर के कस्बा दिड़बा के नजदीकी गांव खनाल खुर्द के रहने वाले कौर सिंह ने मुक्केबाजी से पंजाब का नाम दुनिया भर में चमकाया। उनके निधन की खबर से खेल जगत शोक में डूब गया। कौर सिंह ने देश के लिए छह गोल्ड मेडल जीते थे। राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैंपियनशिप, एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप, एशियाई खेलों, कॉमनवेल्थ गेम्स और और किंग कप में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता। नौवीं एशियन चैंपियनशिप मुंबई में गोल्ड मेडल जीतने वाले वे एकमात्र खिलाड़ी थे।
उनके करीबी बताते हैं कि सेना से रिटायर होने के बाद उन्हें मुक्केबाजी की ओर मोड़ने में सबसे अहम योगदान कर्नल बलजीत सिंह जौहल का रहा, जिन्होंने कौर सिंह को पुणे इंस्टीट्यूट में ट्रेनिंग कैंप लगाने के लिए प्रेरित किया। पहली बार उन्होंने सिकंदराबाद नेशनल गेम्स में गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद उन्हें इंडिया कप के लिए चुना गया। उनकी उपलब्धियों के लिए उन्हें 1982 में अर्जुन अवार्ड और 1983 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। 1984 में अमेरिका के लास एंजलिस में हुए ओलंपिक खेलों में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया। यहां उन्होंने तीन में दो मुकाबले जीते। 1984 में उन्होंने संन्यास ले लिया था।
सेना में भी दुश्मनों के छुड़ाए थे छक्के
मुक्केबाजी से पहले कौर सिंह ने सेना में रहकर दुश्मनों के छक्के छुड़ाए थे। गोल्ड मेडलिस्ट सूबेदार कौर सिंह 1970 में फौज में भर्ती हुए थे। 1971 के युद्ध में भी उन्होंने अपने जौहर दिखाए। भारतीय फौज में शानदार सेवाओं के लिए वर्ष 1988 में उन्हें विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया।
कौर ने कहा था- अली के मुक्के दमदार
27 जनवरी, 1980 में कौर सिंह ने दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में चार राउंड के एक प्रदर्शनी मैच में मोहम्मद अली के खिलाफ रिंग में उतरे। इस मुकाबले के बाद कौर सिंह ने कहा था कि अली के मुक्के बहुत दमदार थे। उनके मुताबिक अली का प्रसिद्ध जैब स्पष्ट रूप से याद है। उसकी गति अद्भुत थी। चार राउंड के खेल में एक बार भी उनकी गति कम नहीं हुई। वह कद में मुझसे छोटे थे लेकिन फुर्ती के कारण वह मेरी पहुंच से बाहर हो गए।
जोरदार पंच और फुर्ती के लिए जाने जाते थे
कौर सिंह के भाई अमरजीत सिंह ने बताया कि कौर सिंह अपने जोरदार पंच और फुर्ती के लिए जाने जाते थे। यही कारण था कि बड़े खिलाड़ी भी उनके सामने नहीं टिक पाते थे। वह शांत स्वभाव के थे लेकिन रिंग में उतरते ही उनका शांत स्वभाव बदल जाता था। उनके दो बेटे और एक बेटी है। एक बेटा फौज में है।
स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल जीवनी, फिल्म भी बनी
पंजाब सरकार ने हाल में उनकी जीवनी स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल की है। उन पर एक फिल्म भी बन चुकी है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने शोक संदेश में कहा कि कौर सिंह का जीवन उभरते खिलाड़ियों को सख्त मेहनत के लिए प्रेरित करेगा।
गांव में हुआ अंतिम संस्कार, जल्द बनेगा स्मारक
कौर सिंह का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव खनाल खुर्द में पूरे सम्मान के साथ किया गया। 152 सिख रेजिमेंट के जवानों ने उन्हें अंतिम सलामी दी। कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने उन्हें श्रद्धासुमन भेंट किए। उन्होंने कहा कि जल्द ही कौर सिंह की याद में स्मारक का निर्माण किया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी इस महान शख्सियत के जीवन से दिशा लेकर खेलों से जुड़े।