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राष्ट्रपति से मिले शिअद नेता, बिना मंजूरी कृषि विधेयकों को वापस संसद भेजने की अपील की
Tue, 22 Sep 2020 12:13 AM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Tue, 22 Sep 2020 12:13 AM IST
सार
- शिअद प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने सौंपा ज्ञापन, बोले, किसानों की मांगें सर्वोपरि
- आगे की रणनीति को लेकर जल्द बुलाई जाएगी शिअद की कोर कमेटी की बैठक
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राष्ट्रपति से मिले अकाली नेता।
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
राज्यसभा में पास होने के बाद कृषि विधेयकों को लेकर शिअद के नेता सोमवार को दिल्ली पहुंचे। जहां उन्होंने राष्ट्रपति से मिलकर ज्ञापन सौंपा। जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति से बिना मंजूरी के ही विधेयकों को संसद वापस भेजने की अपील की। इस दौरान उन्होंने कहा कि किसानों की मांगे शिअद के लिए सर्वोपरि हैं। आगे की रणनीति बनाने के लिए जल्द ही वह कोर कमेटी की बैठक बुलाएंगे।
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शिअद के प्रधान ज्ञापन सौंपने के बाद कहा कि हम किसानों के साथ प्रतिपल खड़े हैं। हम एक किसान पार्टी हैं तथा हमारे 95 फीसदी सदस्य किसान हैं। शिअद अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि किसानों की भावनाओं की अनदेखी करना सामाजिक सद्भावना और शांति को बिगाड़ने का कारण बन सकती है।
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बिल के लिए सत्ता का किया दुरुपयोग
सत्ताधारी पार्टी ने संसद में अपने बहुमत का उपयोग करके महत्वपूर्ण मसलों पर विपक्ष तथा सहयोगियों को विश्वास में लेने तथा राष्ट्रीय आम राय बनाने की समय रिवायतों की अनदेखी की है। इससे हमारी रिवायतों पर काली परछाई पड़ी है। क्योंकि इससे संसद में लोकतंत्र के मूल्यों तथा तरीकों को दरकिनार किया गया है।
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विधेयक की हो जांच
किसानों के मुद्दों को लेकर विधेयक की गहराई से जांच की शिअद मांग करता है। इसका कारण विधेयकों का असर किसान, खेत और मंडी मजदूरों, आढ़तियों और अनुसूचित जाति पर पड़ेगा, जो हमारे देश की जनसंख्या में 65 फीसदी से अधिक हैं। यह बिल भी शेष 35 फीसदी के लिए निहितार्थ है, चूंकि कृषि हमारी पूरी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।