कथित स्कॉलरशिप घोटाले की जांच रिपोर्ट पर सियासत गरमाई, आप और शिअद ने उठाई ये मांग
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63.91 करोड़ रुपये के कथित स्कॉलरशिप घोटाले के बाद एक बार फिर सियासी पारा चढ़ गया है। आम आदमी पार्टी (आप) ने घोटाला उजागर होने पर मुख्यमंत्री से घोटाले की जांच हाईकोर्ट की निगरानी में कराने की मांग की। साथ ही जिम्मेदार मंत्री और अधिकारियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
विपक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि विभाग के एडिशनल चीफ सचिव द्वारा मुख्य सचिव पंजाब को जांच सौंप दी गई है। 31 पन्नों की जांच रिपोर्ट में फरवरी-मार्च में इस स्कीम के अधीन पंजाब सरकार को 303 करोड़ रुपये का फंड बांटने के लिए जिम्मेदार मंत्री धर्मसोत और भागीदार अधिकारियों ने वजीफा राशि जारी करने के समय न सिर्फ ‘पिक एंड यूज’ की नीति अपनाई बल्कि ऐसे कॉलेजों, संस्थानों को भी मोटी रकमें जारी कर दी जिनका वजूद ही नहीं है।
दलित विद्यार्थियों के नाम पर जारी की 39 करोड़ रुपये की राशि का कोई रिकॉर्ड ही नहीं मिल रहा। जबकि 24.91 करोड़ रुपये का अधिक भुगतान शिक्षा संस्थानों को बढ़ाकर किया गया। घपला करने के लिए अलग फाइलें बनाईं गईं और फाइलों की मंजूरी निर्धारित प्रक्रिया के बजाए हाथों-हाथ करवाई गई।
यहां तक कि प्रिंसिपल सचिव की नोटिंग्स हटा कर डायरेक्टर की नोटिंग्स चढ़ाई गईं और प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय को फर्जी सूचनाएं भेजी गईं। हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि अगर इतने सबूत और दस्तावेज ऑन रिकार्ड मिलने के बावजूद भी मंत्री को कैबिनेट से बर्खास्त करके उस पर केस नहीं दर्ज किया जाता तो स्पष्ट हो जाएगा कि इसमें बड़े लोग भी शामिल हैं।
मैं किसी भी जांच के लिए तैयार, धर्मसोत ने बताए आंकड़े
सामाजिक न्याय, अधिकारिता और अल्पसंख्यक मंत्री साधु सिंह धर्मसोत ने कहा कि वह किसी भी जांच और कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार हैं। पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप फंड में कुप्रबंधन के बारे में रिपोर्ट पर जोरदार प्रतिक्रिया देते हुए धर्मसोत ने कहा कि आरोप बाहरी रूप से निंदनीय, बेतुके और राजनीति से प्रेरित हैं।
कुछ निहित स्वार्थ हैं, जो इस तथ्य को पचा नहीं सकते हैं कि राज्य के एससी छात्रों को सरकार अच्छी सुविधाएं और शिक्षा दे रही है। उन्होंने बताया कि पंजाब में अनुसूचित जाति के छात्रों की अधिकतम आबादी है, जिनके लिए विभाग उचित शैक्षिक सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए बाध्य हैं। पंजाब सरकार लगातार पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए केंद्र से लड़ाई लड़ रही है।
केंद्र द्वारा 1550 करोड़ रुपये का आहरण किया जा रहा है, जिसके लिए मैं रोजाना इस मुद्दे को उठा रहा हूं। मुख्य रूप से, राज्य सरकार को पिछले तीन वर्षों के दौरान केंद्र से 811 करोड़ मिले हैं जो पहले ही वितरित किए जा चुके हैं। विभाग पहले से ही 309 करोड़ रुपये के अनुदान के वितरण की प्रक्रिया में है।
शिरोमणि अकाली दल का हमला- मंत्री धर्मसोत को बर्खास्त करे सरकार
पंजाब में केंद्रीय पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना में 63.91 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का मामला गर्मा गया है। शिरोमणि अकाली दल ने गुरुवार को सामाजिक न्याय सशक्तीकरण व अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री साधु सिंह धर्मसोत पर अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। पार्टी ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि मुख्यमंत्री उन्हें तत्काल बर्खास्त नहीं करते हैं तो शिअद इस मुद्दे पर आंदोलन शुरू करने पर विवश होगा।
मजीठिया और टीनू ने कहा कि धर्मसोत को अनुसूचित जाति के छात्रों को अपात्र निजी संस्थानों को छात्रवृत्ति देने के कारण केंद्र से प्राप्त 39 करोड़ रुपये वितरित करने का दोषी पाया गया है। उन्होंने कहा कि प्रमुख मुख्य सचिव कृपा शंकर सरोज द्वारा तैयार की रिपोर्ट में यह भी विस्तार से बताया गया है कि कैसे अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए बने इस केंद्रीय कोष से 24.91 करोड़ रुपये अवैध रिऑडिट के बाद निजी संस्थानों को दिए गए थे।