हरसिमरत बोलीं- किसान विरोधी फैसले में सहयोगी नहीं बन सकती, सुखबीर के निशाने पर कांग्रेस
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अकाली नेता हरसिमरत कौर बादल ने गुरुवार को यह कहते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया कि वह और उनकी पार्टी किसी भी किसान विरोधी फैसले में सहयोगी नहीं बन सकते। उन्होंने कहा कि मेरा फैसला शिरोमणि अकाली दल की उस पवित्र सोच, विरासत और समर्पण की भावना का प्रतीक है, जिसके अनुसार अकाली दल किसानों के हित की लड़ाई में किसी भी हद तक जाने से पीछे नहीं हटा है और न हटेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे अपने चार पेज के इस्तीफे में हरसिमरत बादल ने कहा कि उन्हें इस बात पर बेहद गर्व है कि आज वह अकाली दल के गौरवमयी विरासत को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि मुझे इस बात पर गर्व है कि हमारे किसान हमेशा ही सबसे ज्यादा उम्मीद शिरोमणि अकाली दल पर करते आए हैं और पार्टी उनकी उम्मीदों एवं विश्वास पर खरी उतरी है।
जो मर्जी हो जाए, हम पार्टी की इस विरासत और किसानों के इस भरोसे को कोई ठेस नहीं पहुंचने देंगे। केंद्र ने किसानों को विश्वास में लिए बिना ही विधेयक को लाने का फैसला लिया। शिअद ने इस विधेयक का विरोध किया। इसी के परिणामस्वरूप मैंने कैबिनेट से इस्तीफा दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि वह उनके इस्तीफे को स्वीकार कर लें।
संसद में विरोध कृषि बिलों का, निंदा कांग्रेस की
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) अध्यक्ष सुखबीर बादल ने कहा कि ये कृषि अध्यादेश 20 लाख किसानों, तीन लाख मंडी मजदूरों, 30 लाख खेत मजदूरों और 30 हजार आढ़तियों को तबाह कर देंगे। उनके भाषण की खास बात यह भी रही कि वे कृषि अध्यादेश के लिए संसद में मोदी सरकार का नहीं बल्कि कांग्रेस की सरकारों की आलोचना करते रहे।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने अपने 2019 के राष्ट्रीय घोषणा पत्र में स्पष्ट कर दिया था कि वह एपीएमसी एक्ट को खत्म कर देगी। कई वादों को पूरा करने के लिए श्री गुटका साहिब और दशम पिता के नाम पर पवित्र शपथ लेने वाले पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस हाईकमान के निर्देशों पर राज्य एपीएमसी एक्ट में संशोधन करते हुए यह बात साबित कर दी थी।
शिअद अध्यक्ष ने कहा कि पंजाब ने आजादी के बाद अपने कृषि बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए आगे बढ़कर देश के खाद्यान्न आपूर्ति की जिम्मेदारी ली थी। ‘पंजाब ने 1980 में अनाज की जरूरत की 80 फीसदी आपूर्ति की और आज भी केंद्रीय पूल में 50 फीसदी अनाज की आपूर्ति जारी है। सिर्फ इतना ही नहीं पंजाब ने राष्ट्र के लिए अपनी संपत्ति और जल संसाधन का बलिदान किया है। हमने राज्य में स्थापित नहर और नलकूप नेटवर्क के कारण लगातार कठोर परिस्थितियों में भी चावल का उत्पादन किया है।
सुखबीर बादल ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल किसानों की पार्टी है और पंजाब की खरीद प्रणाली बहुत मेहनत से स्थापित की गई है। इस व्यवस्था ने जो दुनिया में सर्वश्रेष्ठ था, इसमें छह गांवों को कवर करने वाले एक खरीद केंद्र के साथ 1900 खरीद केंद्र शामिल थे। यदि निजी कंपनियों को शुल्क चलाने की अनुमति दी गई तो इस प्रणाली के साथ-साथ किसान भी मुश्किल में पड़ जाएंगे, जिसके परिणामस्वरूप एकाधिकार हो जाएगा।
अकाली दल अध्यक्ष ने कांग्रेस द्वारा फैलाए जा रहे दुष्प्रचार को भी खारिज कर दिया कि पार्टी ने कृषि अध्यादेशों पर यू-टर्न ले लिया है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले अकाली दल सलाह देने वाली प्रक्रिया में शामिल नहीं था।