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संसद के शीतकालीन सत्र को रद्द करने पर भड़के पंजाब के सांसद, मान बोले- सवालों से भाग रहा केंद्र
Wed, 16 Dec 2020 03:00 PM IST
निवेदिता वर्मा
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 16 Dec 2020 03:00 PM IST
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सांसद हरसिमरत कौर बादल और भगवंत मान।
- फोटो : फाइल फोटो
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केंद्र सरकार की तरफ से संसद के शीतकालीन सत्र को रद्द करने से पंजाब के सांसद नाराज हैं। भारतीय जनता पार्टी की पुरानी सहयोगी शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने केंद्र के इस फैसले की निंदा की। वहीं आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों के सवालों से भाग रहा है।
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पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि सरकार तीन कृषि कानूनों को निरस्त कर किसानों की शिकायतों का समाधान करने की अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है। उन्होंने मांग की कि किसान समुदाय की इच्छा के अनुसार तीन कानूनों को रद्द करने के लिए जल्द से जल्द एक दिवसीय सत्र बुलाया जाए।
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पंजाब के बठिंडा की सांसद ने कहा कि केंद्र जानता है कि यह गलत है। वह जानता है कि खेती कानून राज्य का विषय है तथा सभी राज्यों के किसानों ने पिछले सत्र में उन तीन अधिनियमों को अस्वीकार कर दिया है। केंद्र जानता है कि वह इस मुद्दे पर लोगों का सामना नहीं कर सकता और यही कारण है कि इसने संसद के शीतकालीन सत्र को रद्द करने के लिए कोविड-19 महामारी का बहाना बना लिया है। हरसिमरत कौर बादल ने इस कदम को लोकतंत्र की हत्या बताया।
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आप आदमी पार्टी (आप) पंजाब के अध्यक्ष और संगरूर से सांसद भगवंत मान ने केंद्र सरकार की ओर से शीतकालीन सत्र न बुलाने के फैसले की निंदा करते कहा कि किसानों के सवालों से मोदी सरकार भाग रही है। मोदी सरकार किसान आंदोलन के चलते कृषि कानूनों को वापस लेने के दबाव से डरते हुए चर्चा नहीं करना चाहती।
उन्होंने कहा कि किसानों के मसलों पर संसद में जवाब देने के बजाए मोदी सरकार कोविड-19 की आड़ में शीतकालीन सत्र न बुलाना ही ठीक समझती है। जब कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकार ने संसद में जबरदस्ती कानून पास करने थे, तो कोरोना के समय भी सत्र बुलाया गया। अब जब किसानों की ओर से अपना अस्तित्व बचाने के लिए लड़े जा रहे आंदोलन के चलते संसद में घिरने का डर है तो सवालों का जवाब देने से हाथ खड़े कर दिए। मोदी सरकार जबसे सत्ता में आई है, तब से ही सवालों का जवाब देने से भागती रही है। सरकार ने हमेशा ही ऐसे हथकंडे अपनाएं हैं जो देश के लिए घातक सिद्ध हुए हैं।
पिछले दिनों प्रधानमंत्री की ओर से नए संसद भवन के रखे नींव पत्थर पर मान ने कहा कि यदि केंद्र सरकार ने संसद बंद ही रखनी है तो फिर हजारों करोड़ रुपये खर्च करके नए भवन बनाने का क्या लाभ है। मोदी सरकार वास्तव में प्रजातांत्रिक देश को एक तानाशाह की तरह चला रही है।