Punjab: सरारी को मंत्री पद से हटाकर मान ने दिया भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का संदेश, विपक्ष का था दबाव
सरकार की साफ छवि के लिए फौजा सिंह को हटाना मजबूरी बन गया था। राज्य सरकार चार माह से फौजा सिंह मामले में विपक्ष के तीखे हमले झेल रही थी। सरारी सरकार के भ्रष्टाचार मुक्त चेहरे को सूट नहीं कर रहे थे। सिंगला को हटाने के बाद सरारी को लेकर विपक्ष का दबाव था।
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भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलने का दावा करने वाली पंजाब सरकार को मंत्रिमंडल की साफ छवि दिखाने के लिए फौजा सिंह सरारी को हटाना मजबूरी बन गया था। चार माह पहले जो ऑडियो क्लिप वायरल हुई थी, उसकी सत्यता की जांच के बाद मान सरकार ने सरारी को मंत्री पद से हटाया। इस दौरान सरकार ने विपक्ष के तीखे हमलों को बर्दाश्त किया और आलाकमान से हरी झंडी मिलने के बाद फौजा सिंह का इस्तीफा लिया। हालांकि विपक्ष केा सरकार पर हमला जारी है। उधर, भाजपा ने कहा है कि इस्तीफा लेने मात्र से सरारी की गलती माफ नहीं की जा सकती।
सरकार के साफ चेहरे पर शुरुआत में स्वास्थ्य मंत्री विजय सिंगला को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए थे। अब विपक्ष के पास दूसरा मुद्दा सरारी का था। लिहाजा पार्टी में शीर्ष स्तर पर इस पर विचार किया गया, उसके बाद मंत्री का इस्तीफा लिया गया। हालांकि शनिवार को सरारी का इस्तीफा स्वीकार होने के बाद विपक्ष ने यही सवाल उठाया है कि आखिर मुख्यमंत्री इस मामले में किसका इंतजार कर रहे थे?
जबकि इससे पहले डॉ विजय सिंगला को रिश्वतखोरी के मौखिक आरोप पर ही स्वास्थ्य मंत्री के पद से हटा दिया गया था। पार्टी सूत्रों का कहना है कि सितंबर में मुख्यमंत्री के जर्मनी दौरे से लौटने के बाद हिमाचल और गुजरात विधानसभा चुनाव में व्यस्तता के चलते यह मामला लटका रहा। लेकिन असलियत यह है कि कानून-व्यवस्था समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर बिगड़ती छवि को सुधारने और आगामी निगम चुनाव को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाना सरकार की मजबूरी थी।
स्वास्थ्य महकमा लेकर जौड़ामाजरा का भी बचाव
सरारी के इस्तीफे के सहारे ही भगवंत मान ने विपक्ष का अगला निशाना बनने जा रहे चेतन सिंह जौड़ामाजरा का भी समय रहते बचाव कर लिय। जौड़ामाजरा को बाबा फरीद यूनिवर्सिटी के पूर्व वीसी डॉ राज बहादुर के मेडिकल कालेज के गंदे गद्दे पर लिटाने के कारण कड़ी आलोचना झेलनी पड़ी थी। विपक्ष ने जौड़ामाजरा के इस्तीफे की मांग उठाई थी। राजबहादुर ने वीसी का पद छोड़ दिया था। यह पद अब तक खाली है और विपक्ष हमेशा इस बात को लेकर सरकार पर चढ़ाई करता है।
बैंस से वापस लिया जेल, नहीं रुक रहा था खेल
मुख्यमंत्री ने हरजोत बैंस से जेल विभाग वापस लेकर अपने इस मंत्री के कमजोर प्रदर्शन का संकेत तो दिया ही, साथ ही उन्होंने मीत हेयर के कुछ विभाग बैंस को सौंपकर उन्हें भविष्य के बारे में सजग भी कर दिया है। दरअसल, सूबे की जेलों में बंद गैंगस्टरों की सक्रिय गतिविधियों के बारे में केंद्र सरकार भी पंजाब सरकार को बार-बार चौकस करती रही है। राज्य सरकार द्वारा जेलों में अवैध गतिविधियां रोकने के अब तक के सभी प्रयास फेल साबित हुए हैं। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ने गुरमीत सिंह मीत हेयर से कुछ विभाग वापस लेने के बाद उन्हें महत्वपूर्ण खनन विभाग देकर उन पर भरोसा भी जताया है।
फौजा सिंह सरारी के आडियो के रूप में विपक्ष को मुख्यमंत्री भगवंत मान को घेरने के लिए एक ठोस मुद्दा मिल गया था। सरारी के इस्तीफे के साथ ही उन्हें गिरफ्तार करने की मांग भी लगातार हुई, जिस पर मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी ने चुप्पी साधे रखे। दरअसल, विपक्ष का तर्क था कि डा. विजय सिंगला को मुख्यमंत्री ने केवल आरोपों के आधार पर ही मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया था तो सरारी के बारे में आडियो के तौर पर सबूत सामने आने के बाद भी उन्हें मंत्री पद से क्यों नहीं हटाया जा रहा।
सरारी को बचाने में छह माह क्यों लगाए : भाजपा
पंजाब भाजपा के अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने आप सरकार के कैबिनेट मंत्री फौजा सिंह सरारी के इस्तीफे पर कहा है कि यह भाजपा की जीत है। भाजपा शुरू से ही कहती रही है कि सरारी की सोशल मीडिया पर वायरल हुई ऑडियो की जांच होनी चाहिए, लेकिन भगवंत मान सरकार ने अपने मंत्री को बचाने के लिए 6 महीने का समय निकाल दिया और अब जब राजनीतिक दबाव बढ़ गया तो उससे इस्तीफा ले लिया है।
शनिवार को जारी बयान में अश्वनी शर्मा ने कहा कि दिल्ली के कई मंत्री जेल में हैं और पंजाब सरकार ने इस मामले में कार्यवाही करने में 6 महीने का समय लगा दिया। इन 6 महीनों के दौरान फौजा सिंह सरारी ने और क्या कुछ किया, इसकी जांच कौन करेगा? क्या सरारी पर एफआईआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया जाएगा? शर्मा ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा राज्य की जनता को मूर्ख बनाने के लिए सिर्फ सरारी को पद से हटाया गया है। उसके विरुद्ध कोई कार्यवाही अभी तक क्यों नहीं की गई? इसका स्पष्ट मतलब है कि पंजाब सरकार की नीयत में खोट है, वह अपने मंत्री को बचाना चाहती है।