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थिएटर विंटर फेस्टिवल: ‘ऊंच नीच के बाद’ नाटक का मंचन
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 20 Jan 2017 12:58 AM IST
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‘ऊंच नीच के बाद’ नाटक का मंचन
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब कला भवन में थिएटर फॉर थिएटर विंटर फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है। इसमें विभिन्न थिएटर ग्रुप की ओर से नाटकों का मंचन किया जा रहा है। वीरवार को देवेंदर राज अंकुर के निर्देशन में ‘ऊंच नीच के बाद’ नाटक का मंचन किया गया। इसे दिल्ली केमैथिली लोक रंग के कलाकाराें की ओर से पेश किया गया।
नाटक के बाद मैथिली भाषा के कहानीकार प्रदीप बिहारी की चार कहानियाें का संकलन है। ये कहानियां समाज में औरत की चार कहानियाें का संकलन है। पहली कहानी ऊंच नीच में मां-बेटी की अपनी स्पर्धा को दिखाया गया है। इसमें दोनों एक दूसरे से बढ़कर बेहतर साबित करने की कोशिश में लगी रहतीं हैं।
दूसरी कहानी मकड़ी है। इसमें एक औरत अपनी जिंदगी रूपी जाल में एक मकड़ी की तरह स्वयं उलझती चली जाती है। तीसरी कहानी फांक हैं, जिसमें वैवाहिक जीवन में संतान से उत्पन्न फांक या रिक्तता को दर्शाया गया हैं। नाटक की अंतिम कहानी पुरनियावाली है। इसमें एक औरत को संतान सुख प्राप्ति के लिए जद्दोजहद करते हुए दिखाया गया है। नाटक में मुकेश झा, अमरजीत राय, ज्योति झा, रमन कुमार, पूजा प्रियदर्शन, ऋतुराज और नतीश कुमार काम किया।
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नाटक के बाद मैथिली भाषा के कहानीकार प्रदीप बिहारी की चार कहानियाें का संकलन है। ये कहानियां समाज में औरत की चार कहानियाें का संकलन है। पहली कहानी ऊंच नीच में मां-बेटी की अपनी स्पर्धा को दिखाया गया है। इसमें दोनों एक दूसरे से बढ़कर बेहतर साबित करने की कोशिश में लगी रहतीं हैं।
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दूसरी कहानी मकड़ी है। इसमें एक औरत अपनी जिंदगी रूपी जाल में एक मकड़ी की तरह स्वयं उलझती चली जाती है। तीसरी कहानी फांक हैं, जिसमें वैवाहिक जीवन में संतान से उत्पन्न फांक या रिक्तता को दर्शाया गया हैं। नाटक की अंतिम कहानी पुरनियावाली है। इसमें एक औरत को संतान सुख प्राप्ति के लिए जद्दोजहद करते हुए दिखाया गया है। नाटक में मुकेश झा, अमरजीत राय, ज्योति झा, रमन कुमार, पूजा प्रियदर्शन, ऋतुराज और नतीश कुमार काम किया।
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