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‘केसरो’ में एक औरत का संघर्ष, जो सबके विरुद्ध जाकर करती है पढ़ाई
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 17 Jan 2017 01:07 AM IST
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‘केसरो’ में औरत का संघर्ष
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब कला भवन में थिएटर फॉर थिएटर विंटर नेशनल थिएटर फेस्टिवल के दूसरे दिन बलवंत गार्गी के लिखे और सुनीता धीर के निर्देशन में नाटक केसरो का मंचन किया गया। इसे पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के थिएटर डिपार्टमेंट के छात्राें ने पेश किया।
यह एक गांव की कहानी है जहां पर औरताें का पढ़ना-लिखना अच्छा नहीं समझा जाता और वहां पर खासतार पर औरतें अनपढ़ ही रहती हैं। इसका समाज के खासकर साहूकार इस गांव के लोगाें का खूब फायदा उठाते हैं। सही तरह से शिक्षित न हो पाने पर उच्च समाज वाले गरीब लोगों की भूमि, घराें और उनके समान पर जबरदस्ती कब्जा कर लेते हैं। ऐसे में इस गांव की महिला केसरो पढ़ना-लिखना शुरू करती है और इस शिकार हुए गांव के लोगाें को इससे मुक्त करना शुरू करती है। नाटक की कहानी मुख्य पात्र केसरो के इर्द-गिर्द घूमती रहती है। वह खुद पढ़कर और औरतों को भी पढ़ने के लिए जागरूक करती है।
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यह एक गांव की कहानी है जहां पर औरताें का पढ़ना-लिखना अच्छा नहीं समझा जाता और वहां पर खासतार पर औरतें अनपढ़ ही रहती हैं। इसका समाज के खासकर साहूकार इस गांव के लोगाें का खूब फायदा उठाते हैं। सही तरह से शिक्षित न हो पाने पर उच्च समाज वाले गरीब लोगों की भूमि, घराें और उनके समान पर जबरदस्ती कब्जा कर लेते हैं। ऐसे में इस गांव की महिला केसरो पढ़ना-लिखना शुरू करती है और इस शिकार हुए गांव के लोगाें को इससे मुक्त करना शुरू करती है। नाटक की कहानी मुख्य पात्र केसरो के इर्द-गिर्द घूमती रहती है। वह खुद पढ़कर और औरतों को भी पढ़ने के लिए जागरूक करती है।
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