{"_id":"587a80264f1c1b2e53ba8230","slug":"punjab-kala-bhavan-began-a-two-day-national-seminar","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकार के रवैये पर JNU प्रो. ने उठाए सवाल, बोले- आईकन पर ध्यान, गरीबों पर नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरकार के रवैये पर JNU प्रो. ने उठाए सवाल, बोले- आईकन पर ध्यान, गरीबों पर नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 15 Jan 2017 01:16 AM IST
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पंजाब कला भवन में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार शुरू
- फोटो : अमर उजाला
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सेक्टर - 16 स्थित पंजाब कला भवन में शनिवार को केंद्रीय पंजाबी लेखक सभा, पंजाब अकादमी दिल्ली और पंजाब कला परिषद केसहयोग से दो दिवसीय जात, समाज और साहित्य विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन शुरू हुआ। इस मौके पर पंजाबी साहित्य के लेखक पद्मश्री सुरजीत पातर सहित कई नामचीन लोग उपस्थित रहे।
इसकी अध्यक्षता जेएस ग्रेवाल ने की। कार्यक्रम का संचालन डा. सर्वजीत सिंह ने किया। जात, जमात और साहित्य सम्मेलन में जेएनयू से आए प्रोफेसर सुबोध नारायण मालाकार ने कहा कि अंबेडकर के पूना पैक्ट की कई बातें दबाई गई। इसी कारण आज भी दलित दबा हुआ है। जो भी सरकारें अब तक भारत में आईं वह आईकान पर नजर रखती है और गरीब लोगों पर ध्यान नहीं देता है। दलित समाज में पढ़े लिखे लोगों को अपनी जिम्मेवारी समझनी होगी।
डा. अपूर्वानंद ने कहा कि समाज में जब समानता का भाव आएगा तो गरीबी अपने आप खत्म हो जाएगी। जहां पर पढ़े लिखे लोग होते हैं, वहां पर वर्ग की बात नहीं आती है। वहां पर लोग ठीक रहते हैं। जहां पर गरीबी है, वहां पर दलितों से जातिवाद का व्यवहार होता है। नजरिया बदलते हुए सरकार को भी सही तरीकों से लोगों की मदद करनी चाहिए। किसी सरकार ने गरीबों क ा ध्यान नहीं रखा। इसी कारण आज भी लोगों को अपना अधिकार नहीं मिल पाया है।
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सेमिनार में आए लोगों ने वक्ताओं से सवाल जवाब किए। इस दौरान शहर के कई प्रोफेसरों ने अपने विचार रखे। सेमिनार में डा. सर्वजीत सिंह, डा. चौथी राम यादव, पंजाब कला परिषद के जनरल सेक्रेटरी लखविंदर जौहल ,सुशील दोसांझ, डा. भूपेंदर बराड़ भी विचार रखे।
तीसरे सेशन में भारतीय संविधान और मानवाधिकार पर चर्चा की गई। इसकी अध्यक्षता पंजाब के पूर्व एडवोकेट जनरल राजिंदर सिंह चीमा ने की। मुख्य वक्ताओं में डा. हरीश पुरी, डा. तेजवंत सिंह गिल थे जबकि संचालन करमजीत सिंह ने किया।
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इसकी अध्यक्षता जेएस ग्रेवाल ने की। कार्यक्रम का संचालन डा. सर्वजीत सिंह ने किया। जात, जमात और साहित्य सम्मेलन में जेएनयू से आए प्रोफेसर सुबोध नारायण मालाकार ने कहा कि अंबेडकर के पूना पैक्ट की कई बातें दबाई गई। इसी कारण आज भी दलित दबा हुआ है। जो भी सरकारें अब तक भारत में आईं वह आईकान पर नजर रखती है और गरीब लोगों पर ध्यान नहीं देता है। दलित समाज में पढ़े लिखे लोगों को अपनी जिम्मेवारी समझनी होगी।
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डा. अपूर्वानंद ने कहा कि समाज में जब समानता का भाव आएगा तो गरीबी अपने आप खत्म हो जाएगी। जहां पर पढ़े लिखे लोग होते हैं, वहां पर वर्ग की बात नहीं आती है। वहां पर लोग ठीक रहते हैं। जहां पर गरीबी है, वहां पर दलितों से जातिवाद का व्यवहार होता है। नजरिया बदलते हुए सरकार को भी सही तरीकों से लोगों की मदद करनी चाहिए। किसी सरकार ने गरीबों क ा ध्यान नहीं रखा। इसी कारण आज भी लोगों को अपना अधिकार नहीं मिल पाया है।
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सेमिनार में आए लोगों ने वक्ताओं से सवाल जवाब किए। इस दौरान शहर के कई प्रोफेसरों ने अपने विचार रखे। सेमिनार में डा. सर्वजीत सिंह, डा. चौथी राम यादव, पंजाब कला परिषद के जनरल सेक्रेटरी लखविंदर जौहल ,सुशील दोसांझ, डा. भूपेंदर बराड़ भी विचार रखे।
तीसरे सेशन में भारतीय संविधान और मानवाधिकार पर चर्चा की गई। इसकी अध्यक्षता पंजाब के पूर्व एडवोकेट जनरल राजिंदर सिंह चीमा ने की। मुख्य वक्ताओं में डा. हरीश पुरी, डा. तेजवंत सिंह गिल थे जबकि संचालन करमजीत सिंह ने किया।