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केंद्रीय बजट: किसानों को तकनीक से जोड़ने की योजना, मगर पंजाब के उद्योगों को नहीं मिली राहत

Tue, 01 Feb 2022 08:04 PM IST
ajay kumar सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Tue, 01 Feb 2022 08:04 PM IST
सार

केंद्रीय बजट में किसानों को हाईटेक बनाने व तकनीक से जोड़ने की झलक दिखी लेकिन दम तोड़ रहे पंजाब के उद्योगों को कोई राहत नहीं मिली है।

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Punjab industries did not get relief package in Union Budget 2022
फाइल फोटो

विस्तार

बजट में केंद्र सरकार ने पंजाब की उद्योगों को खाली हाथ दिखाया है, जबकि किसानों को डिजिटल और हाईटेक सेवाएं मुहैया कराने के लिए ‘किसान ड्रोन’, रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती, सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देने की घोषणा जरूर की गई है। इन योजनाओं से किसानों को अपनी तरफ आकर्षित करने की योजना है लेकिन दम तोड़ रहे पंजाब के उद्योगों को राहत पैकेज नहीं दिया गया है।

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समावेशी विकास के हिस्से के रूप में सरकार फसल मूल्यांकन, भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण और कीटनाशकों के छिड़काव के लिए ‘किसान ड्रोन’ के उपयोग को बढ़ावा देगी। सरकार कृषि स्टार्टअप और ग्रामीण उद्यमों के वित्तपोषण के लिए नाबार्ड के माध्यम से सह-निवेश मॉडल के तहत जुटाई गई मिश्रित पूंजी के साथ एक फंड की सुविधा भी देगी। सरकार की ओर से 2021-22 के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं और धान संबंधित 163 लाख किसानों से 1208 लाख टन की खरीद सुनिश्चित करेगी।
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किसानों को राहत पैकेज की जरूरत है: बलवंत
किसान नेता बलवंत सिंह का कहना है कि किसानों को राहत पैकेज की जरूरत है। किसान कर्ज के बोझ तले दबा है, इसके लिए राहत दी जानी चाहिए थी। हमारे कर्ज कैसे माफ करने चाहिए, इसकी तरफ केंद्र सरकार का ध्यान नहीं गया। खेती के धंधे को कैसे मुनाफे वाला बनाया जाए, इसकी तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया है। पंजाब में खेती अधिक मुनाफे वाली नहीं रही। केंद्र सरकार ने किसानों को डिजिटल और हाईटेक सेवाएं देने के लिए निजी एग्रोटेक कंपनियों और कृषि मूल्य श्रृंखला के हितधारकों के साथ सार्वजनिक क्षेत्र के अनुसंधान और विस्तार संस्थानों की भागीदारी के साथ पीपीपी मोड की एक योजना शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक शून्य बजट और जैविक खेती, आधुनिक कृषि, मूल्य संवर्धन और प्रबंधन की जरूरतों को पूरा करने के लिए राज्यों को कृषि विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम को संशोधित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा लेकिन इससे किसान की आर्थिक दशा नहीं सुधर सकती है। 
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उद्योग को कुछ नहीं मिला: रविंदर धीर 
पंजाब के लेदर, स्पोर्ट्स, पाइप फिटिंग, हैंडलूम, साइकिल, होजरी उद्योगों को कुछ नहीं मिला है। व्यापारी नेता रविंदर धीर का कहना है कि पंजाब के उद्योग पलायन कर रहे हैं। पहले पहाड़ी राज्यों के पैकेज के कारण पंजाब का नुकसान हुआ तो नतीजतन उद्योग बद्दी, गगरेट की तरफ शिफ्ट हो गए। फिर यूपी में खेल उद्योग को वैट मुक्त किया गया तो खेल का सामान बनाने वाली इकाइयां मेरठ शिफ्ट हो गईं। पंजाब सीमावर्ती राज्य है, इसके लिए राहत पैकेज मिलना चाहिए था लेकिन सूबे के हाथ खाली रहे हैं।

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