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पंजाब के आईजीपी की चार्जशीट खारिज करने की अपील खारिज

Thu, 15 Sep 2016 02:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 15 Sep 2016 02:00 AM IST
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Punjab, IGP chargesheet, to dismiss appeal, Pathankot, Inspector General, Narcotics Cell police
Court - फोटो : Demo Pic
पठानकोट में नारकोटिक्स सेल में बतौर इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (आईजीपी) तैनात परमपाल सिंह सिद्धू की अर्जी केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने सुनवाई के बाद खारिज कर दी। इसमें उन्होंने अपने खिलाफ चार्जशीट को खारिज करने की अपील की थी।
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परमपाल सिद्धू  पर अमृतसर में एक हाउसिंग कॉलोनी की सेटिंग और प्लानिंग में कंडक्ट रूल्स के उल्लंघन करने का आरोप था। सिद्धू ने अर्जी में अपने खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई पर भी रोक लगाने की अपील की थी। 1991 बैच के आईपीएस अफसर सिद्घू ने केस में केंद्र सरकार, पंजाब सरकार और रिटायर्ड आईएएस सुरजीत सिंह को पार्टी बनाया था। 29 अगस्त 2016 को सिद्धू ने कैट में दायर अर्जी में कहा था कि 29 मार्च 2016 को उनके खिलाफ जो चार्जशीट जारी की गई थी, वह राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित थी और वह अमृतसर में शेरवुड ऑफिसर्स सोसाइटी बनाने में गलत नहीं थे। 
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सिद्धू का कहना था कि उन्होंने संबंधित चार्जशीट पर 22 अप्रैल को जवाब भी दायर किया था, लेकिन इसके बावजूद प्रतिवादी पक्ष ने आगे बढ़ते हुए एक जांच अधिकारी नियुक्त कर दिया और जांच प्रक्रिया शुरू कर दी। आईजी के वकील ने कहा कि ऑल इंडिया सर्विस (कं डक्ट) रूल्स के नियम 13 (2) के तहत अर्जीकर्ता सिद्धू को सोसाइटी के निर्माण के लिए राज्य सरकार से अनुमति नहीं थी। यह सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट-1860 के तहत रजिस्टर्ड थी। वहीं कहा गया कि सिद्धू का सिर्फ इसलिए शोषण किया गया, क्योंकि उनके एक पारिवारिक सदस्य ने राज्य में रूलिंग पार्टी के खिलाफ चुनाव में हिस्सा लिया था। 
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अनुशासनात्मक प्रक्रिया पर स्टे नहीं दे सकते 
ट्रिब्यूनल ने फैसले में कहा कि शेरवुड ऑफिसर्स सोसाइटी की एक्टिविटी लिटरेरी, साइंटिफिक, चैरिटेबल, स्पोर्ट्स, कल्चरल और रिक्रिएशनल के मकसद से आगे निकल गई। ऐसे में प्रतीत होता है कि अर्जीकर्ता ऑल इंडिया सर्विस रूल्स के नियम 13 (2) का सहारा नहीं ले सकता। बेंच ने फैसले में कहा कि अनुशासनात्मक प्रक्रिया पर स्टे नहीं लगाया जा सकता और इन्हें इनके तार्किक निष्कर्ष तक जाना चाहिए। 
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