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बड़ी राहतः पंजाब का पहला हॉटस्पॉट नवांशहर हुआ कोरोना मुक्त, यहीं पर हुई थी वायरस से पहली मौत

Thu, 23 Apr 2020 01:05 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 23 Apr 2020 01:05 AM IST
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Punjab hotspot Nawanshahr now coronavirus-free, 18 patients cured
कोरोना वायरस - फोटो : अमर उजाला

पंजाब में कोरोना से पहली मौत के बाद सुर्खियों में आए नवांशहर जिले में अब कोई भी मरीज कोरोना से संक्रमित नहीं रहा है। रेड जोन में आए नवांशहर के लिए बुधवार की सुबह खुशी लेकर आई, क्योंकि अस्पताल में उपचारधीन कोरोना पीड़ित मरीज की रिपोर्ट जैसे ही नेगेटिव आई तो अस्पताल में तैनात कर्मचारियों के चेहरे खिल गए। ऐसे में अब नवांशहर जिला कोरोना की जंग में रोल माडल बन सकता है। 

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किसी समय नवांशहर में प्रदेश भर में सबसे ज्यादा 19 मरीज कोरोना प्रभावित थे। सबसे पहले विदेश से लौटे संत बाबा बलदेव सिंह की मौत के बाद नवांशहर जिला बेहद सुर्खियों में आ गया था। उसके बाद बाबा बलदेव सिंह के परिवार व उनके नजदीकियों के जब टेस्ट हुए तो जिले में 19 मरीज कोरोना पीड़ित पाए गए। बाबा बलदेव सिंह की कोरोना रिपोर्ट उनकी मौत के बाद आई थी। बता दें कि करोना की चेन को तोड़ने के पीछे प्रशासन का सबसे बड़ा फैसला लोगों को पहले ही सेल्फ लॉकडाउन के लिए मनाना रहा।
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19 मार्च को पहला पॉजिटिव केस आया था 
19 मार्च को जैसे ही पहला पॉजिटिव केस व 20 मार्च को इसी परिवार के छह अन्य के पॉजिटिव मिलने का पता चला तो रातोंरात गांव पठलावा को सील कर दिया गया। वहीं जिले में व्यापार मंडल को मनाकर 21 मार्च को ही सेल्फ लॉकडाउन करवा दिया। इसके बाद भले पहले से संक्रमित मरीज जरूर मिले और संख्या 18 तक जरूर पहुंची लेकिन इस चेन को आगे बढ़ने से रोक लिया गया। 
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बता दें कि दो सप्ताह पहले तक नवांशहर पंजाब में कोरोना का एपिक सेंटर बना हुआ था। नवांशहर से ही कोरोना जालंधर पहुंचा और होशियारपुर के भी अधिकतर पॉजिटिव मामले नवांशहर की चेन से ही जुड़े हुए थे। लेकिन नवांशहर प्रशासन ने सख्ती और संयम से बिना वजह किसी को घर से बाहर निकलने नहीं दिया और जरूरतमंदों को परेशान भी नहीं होने दिया।

इस तरह मिली कामयाबी

गांव व जिला अपने अपने स्तर पर सील: पठलावा में पहला केस आने के बाद जिला प्रशासन की ओर से बिना देरी किए पूरे गांव को सील कर दिया गया और इसके बाद करीब एक दर्जन गांव और पूरी तरह से सील कर दिए गए। 

 

कर्फ्यू का इंतजार किए बिना सेल्फ लॉकडाउन: जिला प्रशासन की ओर से प्रदेश व केंद्र सरकार की ओर से लाकडाउन या कर्फ्यू घोषित किए जाने से पहले ही 21 मार्च को ही सेल्फ लॉकडाउन करवा दिया गया। इस दौरान पुलिस की ओर से पूरी सख्ती की गई। 

 

 राशन: समाजसेवी संस्थाओं की मदद से दिहाड़ीदारों व जरूरतमंद परिवारों तक राशन पहुंचाना शुरू किया। जिससे लोगों में मदद की आस जाग गई। हर वार्ड में होम डिलीवरी के लिए दो-तीन किराना की दुकानों को ही लाइसेंस दिए।

 

सिविल, पुलिस व सेहत महकमे में बढ़िया तालमेल: यही नहीं डीसी विनय बुवलानी की ओर से एसएसपी अल्का मीणा की मदद से सेहत विभाग के साथ पूरा तालमेल बनाया गया और सुबह-शाम सभी विभागों के प्रमुखों की बैठकें होती रहीं।

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