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एसिड अटैक हत्या से भी जघन्य अपराध, सजा ऐसी हो कि रूह कांप जाए: हाईकोर्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 03 Apr 2018 03:53 PM IST
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एसिड अटैक
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तेजाब फेंक कर जिंदगी नर्क बनाना हत्या से भी जघन्य अपराध है। ऐसा करने वाले को वो सजा दी जानी चाहिए कि रूह तक कांप जाए। सजा सख्त होगी तो वह ऐसा अपराध करने का दोबारा साहस ही नहीं करेगा। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की।
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को एसिड अटैक की सजा बढ़ाने पर विचार करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि पीड़ितों को मुआवजा और इलाज का पूरा खर्च सरकार दे रही है और यह उनकी जिम्मेदारी भी बनती है। लेकिन 8-10 लाख देकर पीड़ितों के दर्द को कम नहीं किया जा सकता।
उन्हें नौकरी देकर उनका पुनर्वास किया जाना भी बेहद जरूरी है। हाईकोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ से अब तक हुए एसिड अटैक के सभी मामलों की जानकारी मांगी है ताकि फिर इस मुद्दे को लेकर आदेश जारी कर सके।
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हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को एसिड अटैक की सजा बढ़ाने पर विचार करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि पीड़ितों को मुआवजा और इलाज का पूरा खर्च सरकार दे रही है और यह उनकी जिम्मेदारी भी बनती है। लेकिन 8-10 लाख देकर पीड़ितों के दर्द को कम नहीं किया जा सकता।
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उन्हें नौकरी देकर उनका पुनर्वास किया जाना भी बेहद जरूरी है। हाईकोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ से अब तक हुए एसिड अटैक के सभी मामलों की जानकारी मांगी है ताकि फिर इस मुद्दे को लेकर आदेश जारी कर सके।
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तस्वीरें देख मन विचलित हो जाता है
चेहरे पर फेंका तेजाब
हाईकोर्ट ने कहा कि जब एसिड अटैक से पहले और बाद की तस्वीरें देखते हैं जो मन विचलित हो जाता है। इन तस्वीरों को देखकर यह लगता है कि कोई कैसे ह्दयविहीन हो सकता है। यह तो हत्या से भी बड़ा अपराध है। हत्या में तो एक बार किसी व्यक्ति की मौत होती है। लेकिन एसिड अटैक पीड़ितों को हर दिन मृत्यु सामान यातना से गुजरना पड़ता है। जिन्होंने पीड़िता को बड़े ही चाव से पाल-पोस का बड़ा किया, उनके लिए भी यह यातना नर्क के समान ही है।
विदेशों की तर्ज पर मिले सजा
हाईकोर्ट ने कहा कि लॉ कमीशन को चाहिए कि वे विदेशों की तर्ज पर ऐसे अपराध के दोषियों के लिए सरेआम सजा का प्रावधान करें, ताकि फिर कोई भी व्यक्ति ऐसा अपराध करने से पहले हजार बार सोचे। इसके साथ ही ऐसे अपराध के दोषियों को जमानत और अन्य कोई राहत भी नहीं दी जानी।
विदेशों की तर्ज पर मिले सजा
हाईकोर्ट ने कहा कि लॉ कमीशन को चाहिए कि वे विदेशों की तर्ज पर ऐसे अपराध के दोषियों के लिए सरेआम सजा का प्रावधान करें, ताकि फिर कोई भी व्यक्ति ऐसा अपराध करने से पहले हजार बार सोचे। इसके साथ ही ऐसे अपराध के दोषियों को जमानत और अन्य कोई राहत भी नहीं दी जानी।