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'हरियाणा सरकार ने गायें तो भिजवा दीं, पर जिंदा हैं या नहीं, ये पता नहीं'
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 05 Oct 2017 01:23 PM IST
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गोवंश संरक्षण
- फोटो : अमर उजाला
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16096 गायों को हरियाणा से अन्य राज्यों में भिजवाया गया है। लेकिन किन राज्यों में कितनी गाय भेजी गईं, सरकार के पास इसका कोई हिसाब नहीं है। जबकि हरियाणा सरकार ने राज्य में गोवंश संरक्षण एवं गो संवर्धन एक्ट-2015 पारित किए जाने के बाद गायों के रखरखाव पर ध्यान देते हुए गायों को अन्य राज्यों में भिजवाया है।
यह बात बुधवार को हरियाणा सरकार द्वारा गो हत्या मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दायर याचिका पर दाखिल किए गए जवाब में सामने आई। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार के इस आधे-अधूरे जवाब देने पर जमकर फटकार लगाई। हरियाणा की ओर से कोर्ट में पेश हुए एडिशनल एडवोकेट जनरल रणधीर सिंह से हाईकोर्ट ने पूछा कि ये गायें भारत के ही अन्य राज्यों में भेजी गई हैं तो सरकार के पास इस बारे में जानकारी क्यों नहीं है?
हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार को यह भी पता नहीं है कि भेजी गईं गायें जीवित भी हैं या नहीं। जबकि हाईकोर्ट ने मामले की पिछली सुनवाई के दौरान सरकार से साफ शब्दों में यह जवाब मांगा था कि प्रदेश में गोवंश संरक्षण एवं गो संवर्धन एक्ट-2015 लागू होने के बाद से अब तक कितनी गायें किन राज्यों में भेजी गई हैं और बाहर भेजी गई तो जीवित हैं या नहीं।
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जानकारी कुछ मांगी, जवाब और दिया
बुधवार को इसके जवाब में राज्य सरकार ने सिर्फ इस बाबत जारी परमिट की संख्या ही हाईकोर्ट को बताई। इस पर हाईकोर्ट ने कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि हमने परमिट की जानकारी नहीं मांगी थी। जो जानकारी मांगी गई है, वह सरकार नहीं दे रही। इस पर एएजी रणधीर सिंह ने हाईकोर्ट से कुछ समय और दिए जाने की मांग की, जिसे स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई एक नवंबर तय कर दी गई।
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यह बात बुधवार को हरियाणा सरकार द्वारा गो हत्या मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दायर याचिका पर दाखिल किए गए जवाब में सामने आई। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार के इस आधे-अधूरे जवाब देने पर जमकर फटकार लगाई। हरियाणा की ओर से कोर्ट में पेश हुए एडिशनल एडवोकेट जनरल रणधीर सिंह से हाईकोर्ट ने पूछा कि ये गायें भारत के ही अन्य राज्यों में भेजी गई हैं तो सरकार के पास इस बारे में जानकारी क्यों नहीं है?
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हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार को यह भी पता नहीं है कि भेजी गईं गायें जीवित भी हैं या नहीं। जबकि हाईकोर्ट ने मामले की पिछली सुनवाई के दौरान सरकार से साफ शब्दों में यह जवाब मांगा था कि प्रदेश में गोवंश संरक्षण एवं गो संवर्धन एक्ट-2015 लागू होने के बाद से अब तक कितनी गायें किन राज्यों में भेजी गई हैं और बाहर भेजी गई तो जीवित हैं या नहीं।
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जानकारी कुछ मांगी, जवाब और दिया
बुधवार को इसके जवाब में राज्य सरकार ने सिर्फ इस बाबत जारी परमिट की संख्या ही हाईकोर्ट को बताई। इस पर हाईकोर्ट ने कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि हमने परमिट की जानकारी नहीं मांगी थी। जो जानकारी मांगी गई है, वह सरकार नहीं दे रही। इस पर एएजी रणधीर सिंह ने हाईकोर्ट से कुछ समय और दिए जाने की मांग की, जिसे स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई एक नवंबर तय कर दी गई।