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हाइकोर्ट की टिप्पणी- सोशल मीडिया पर भड़काना, भीड़ को भड़काने जैसा है

Mon, 11 Jun 2018 04:19 PM IST
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 11 Jun 2018 04:19 PM IST
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punjab haryana highcourt statement on social media
कोर्ट
हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर लोगों को भड़काने को इसे भीड़ को भड़काने के समान बताते हुए याचिकाकर्ता की जमानत याचिका खारिज कर दी। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि चाहे लोगों की भीड़ इकट्ठी कर उन्हें हिंसा के लिए भड़काया जाए या सोशल मीडिया पर दोनों की परिस्थितियां एक समान होती हैं। इसके साथ ही जस्टिस सुदीप आहलुवालिया ने ट्रायल कोर्ट को इस केस का निपटारा तीन महीने के भीतर करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही ट्रायल कोर्ट को आरोपी अरविंदर सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा-122 के तहत भी मामला चलाने के आदेश दिए हैं।
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फिलहाल आरोपी के खिलाफ देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोप में आईपीसी की धारा-121 और 121 ए के तहत मामला दर्ज किया गया है। याचिकाकर्ता अरविंदर सिंह के एडवोकेट आरएस बैंस ने दलील दी थी कि याचिकाकर्ता ने फेसबुक पर अलग खालिस्तान बनाने के पक्ष में सिख युवकों को शामिल होने की अपील की थी। उसे देशद्रोह नहीं माना जा सकता है। इसका विरोध करते हुए पंजाब सरकार ने कहा था कि याचिकाकर्ता ने फेसबुक पर न सिर्फ अपील की थी बल्कि एक समुदाय विशेष के खिलाफ हिंसा के लिए उकसाया भी था।
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इतना ही नहीं गत वर्ष आनंदपुर साहिब में होला मोहल्ला के समय भी उसने खालिस्तान के समर्थन में पंफलेट बांटे थे और भीड़ को हिंसा के लिए उकसाने का प्रयास भी किया था। भले ही भीड़ ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया, लेकिन उसकी फेसबुक पोस्ट पर उसकी जैसी मानसिकता वाले लोगों ने उसी तरह के कमेंट भी किये हैं। सरकार ने याचिकाकर्ता के पाकिस्तान और विदेश में बैठे अलगाववादी प्रतिबंधित संगठनों से संबंध होने और फंड लेने का भी हाईकोर्ट को हवाला दिया। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि इस मामले में याचिकाकर्ता को जमानत नहीं दी जा सकती है।
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ट्रायल कोर्ट में इस मामले के 24 में से 9 की गवाहियां हो चुकी हैं और बाकी के गवाहों की गवाहियां भी जल्द पूरी करवाई जाए। ऐसे में हाईकोर्ट ने अरविंदर सिंह की जमानत याचिका खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट को तीन महीने में इस केस का ट्रायल पूरा कर केस का निपटारा करने के आदेश दे दिए हैं।
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